लखनऊ [TV 47 न्यूज नेटवर्क ]। अयोध्या में राम मंदिर को लेकर इन दिनों दान और चढ़ावे से जुड़े विवाद की चर्चा पूरे देश में है। सोशल मीडिया, यूट्यूब चैनलों और राजनीतिक मंचों पर इस मुद्दे को लेकर बहस जारी है। इसी बीच दो नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं—राम मंदिर ट्रस्ट के महासचिव Champat Rai और राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष Nripendra Misra।
दान और चढ़ावे में कथित अनियमितताओं के आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया है। इस जांच को लेकर नृपेंद्र मिश्र का बयान भी सामने आया है, जिसने पूरे मामले को नई दिशा दे दी है।
कैसे शुरू हुआ विवाद?
जून 2026 में कुछ रिपोर्टों और वायरल वीडियो में दावा किया गया कि राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान और चढ़ावे के प्रबंधन में अनियमितताएं हुई हैं। आरोपों में दान पेटियों से जुड़े वित्तीय प्रबंधन और कथित गबन की बातें सामने आईं।
मामले ने तब और तूल पकड़ा जब राजनीतिक दलों ने भी सवाल उठाने शुरू कर दिए। इसके बाद राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने स्वयं निष्पक्ष जांच की मांग की और उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT गठित कर दी।
SIT में कौन-कौन हैं?
उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित तीन सदस्यीय SIT की अगुवाई लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत कर रहे हैं।
टीम में शामिल हैं:
- विजय विश्वास पंत (अध्यक्ष)
- आईपीएस अधिकारी किरण एस
- वित्त विभाग के विशेष सचिव नील रतन
सरकार ने इस टीम को प्रारंभिक रिपोर्ट कुछ दिनों में और अंतिम रिपोर्ट निर्धारित समयसीमा में देने का निर्देश दिया है।
अयोध्या पहुंची SIT
जांच शुरू होने के बाद SIT अयोध्या पहुंची और उसने मंदिर परिसर से जुड़े दस्तावेजों तथा रिकॉर्ड की जांच शुरू की।
सूत्रों के अनुसार टीम दान पेटियों की गिनती, रिकॉर्ड प्रबंधन, वित्तीय प्रक्रियाओं और संबंधित कर्मचारियों से पूछताछ कर रही है। जांच का उद्देश्य केवल कथित अपराध का पता लगाना ही नहीं बल्कि भविष्य में ऐसी स्थिति न बने इसके लिए सुधारात्मक सुझाव देना भी है।
नृपेंद्र मिश्र ने क्या कहा?
विवाद के बीच नृपेंद्र मिश्र का बयान काफी महत्वपूर्ण माना गया। उन्होंने कहा कि जांच में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी। उनके अनुसार जांच के दो महत्वपूर्ण पहलू हैं—
- यदि कोई आपराधिक तथ्य है तो उसकी जांच।
- भविष्य में व्यवस्था को और मजबूत बनाने के उपाय।
उन्होंने कहा कि जब दोनों पहलुओं पर काम होगा तभी श्रद्धालुओं का विश्वास और मजबूत होगा। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ने तेजी से कार्रवाई की है और जांच पूरी पारदर्शिता से होनी चाहिए।
कौन हैं नृपेंद्र मिश्र?
नृपेंद्र मिश्र भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं। वे उत्तर प्रदेश कैडर के अधिकारी रहे और देश की नौकरशाही में अत्यंत प्रभावशाली पदों पर कार्य कर चुके हैं।
उन्हें सबसे अधिक पहचान तब मिली जब वे भारत के प्रधानमंत्री Narendra Modi के प्रधान सचिव (Principal Secretary) बने। प्रशासनिक क्षमता, निर्णय लेने की दक्षता और बड़े प्रोजेक्ट्स के प्रबंधन में उनकी विशेषज्ञता को देखते हुए उन्हें राम मंदिर निर्माण समिति का अध्यक्ष बनाया गया।
राम मंदिर निर्माण से जुड़े इंजीनियरिंग, तकनीकी और निर्माण कार्यों की निगरानी की जिम्मेदारी उन्हीं के पास है। हालांकि ट्रस्ट के वित्तीय और दान प्रबंधन से जुड़ी जिम्मेदारियां सीधे उनके अधिकार क्षेत्र में नहीं आतीं।
चंपत राय का क्या पक्ष है?
ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय लगातार यह कहते रहे हैं कि ट्रस्ट के भीतर नियमित ऑडिट प्रक्रिया चलती रहती है।
उनका कहना है कि अब तक ऐसी कोई बात सामने नहीं आई है जिससे बड़े पैमाने पर वित्तीय गड़बड़ी की पुष्टि होती हो। हालांकि उन्होंने जांच में पूरा सहयोग देने की बात कही है।
राजनीतिक बयानबाजी भी तेज
मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। Akhilesh Yadav ने SIT जांच को लेकर सवाल उठाए और कहा कि यदि कोई गड़बड़ी हुई है तो सच्चाई सामने आनी चाहिए। दूसरी ओर कई नेताओं का कहना है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
श्रद्धालुओं की सबसे बड़ी चिंता
राम मंदिर करोड़ों लोगों की आस्था का केंद्र है। ऐसे में दान और चढ़ावे से जुड़े किसी भी विवाद का असर सीधे श्रद्धालुओं की भावनाओं पर पड़ता है।
यही कारण है कि लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर आरोपों में कितनी सच्चाई है और जांच का नतीजा क्या निकलता है। कई श्रद्धालुओं का मानना है कि यदि कोई दोषी है तो उसके खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, जबकि यदि आरोप गलत हैं तो जांच से ट्रस्ट की विश्वसनीयता और मजबूत होगी।
आगे क्या होगा?
फिलहाल जांच जारी है और SIT दस्तावेजों, वित्तीय रिकॉर्ड तथा संबंधित व्यक्तियों से पूछताछ कर रही है। नृपेंद्र मिश्र ने साफ संकेत दिया है कि जांच को केवल आरोप-प्रत्यारोप तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि भविष्य की व्यवस्थाओं को और मजबूत करने पर भी ध्यान दिया जाएगा। यही वजह है कि इस जांच को राम मंदिर प्रशासन के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ माना जा रहा है
