लखनऊ [TV 47 न्यूज नेटवर्क ]। जब भी अयोध्या के राम मंदिर, राम जन्मभूमि आंदोलन या श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की चर्चा होती है, एक नाम बार-बार सामने आता है—Champat Rai। पिछले कुछ वर्षों में वे राम मंदिर निर्माण से जुड़े सबसे प्रभावशाली चेहरों में शामिल रहे हैं। हालांकि, राजनीतिक नेताओं की तरह वे अक्सर सुर्खियों में नहीं रहते, लेकिन संगठन और रणनीति के स्तर पर उनकी भूमिका बेहद महत्वपूर्ण मानी जाती है।
आज जब राम मंदिर से जुड़े विभिन्न मुद्दों और चर्चाओं के बीच उनका नाम फिर चर्चा में है, तब यह जानना दिलचस्प है कि आखिर चंपत राय कौन हैं, वे कहां से आए और राम मंदिर आंदोलन में उनकी भूमिका क्या रही है।
उत्तर प्रदेश के बिजनौर से शुरू हुई यात्रा
चंपत राय का जन्म उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में हुआ। साधारण परिवार से आने वाले चंपत राय ने प्रारंभिक शिक्षा स्थानीय स्तर पर प्राप्त की। युवावस्था से ही उनका झुकाव सामाजिक और राष्ट्रवादी संगठनों की ओर रहा।
शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कुछ समय तक अध्यापन कार्य भी किया। बताया जाता है कि वे रसायन विज्ञान (केमिस्ट्री) के शिक्षक रहे। लेकिन उनका मन केवल नौकरी तक सीमित नहीं रहा। धीरे-धीरे वे सामाजिक और संगठनात्मक गतिविधियों में सक्रिय होते गए।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ाव
चंपत राय का सार्वजनिक जीवन Rashtriya Swayamsevak Sangh से जुड़ाव के साथ आगे बढ़ा। संघ की विचारधारा और संगठनात्मक कार्यशैली ने उन्हें प्रभावित किया।
संघ के स्वयंसेवक के रूप में उन्होंने विभिन्न क्षेत्रों में काम किया और बाद में पूर्णकालिक प्रचारक की भूमिका निभाई। इसी दौरान उनकी पहचान एक कुशल संगठनकर्ता के रूप में बनी।
जो लोग उनके साथ काम कर चुके हैं, उनका कहना है कि चंपत राय की सबसे बड़ी विशेषता उनकी कार्यशैली है। वे मंच की बजाय संगठन को मजबूत करने पर अधिक ध्यान देते हैं।
विश्व हिंदू परिषद में बढ़ती जिम्मेदारियां
संघ परिवार से जुड़े होने के कारण बाद में उनकी सक्रिय भूमिका Vishva Hindu Parishad में बढ़ी। विश्व हिंदू परिषद में उन्होंने विभिन्न पदों पर कार्य किया और संगठन के कई महत्वपूर्ण अभियानों से जुड़े रहे। यहीं से उनकी पहचान राष्ट्रीय स्तर पर बनने लगी।
वीएचपी में रहते हुए उन्होंने हिंदू धार्मिक स्थलों, सामाजिक अभियानों और विशेष रूप से राम जन्मभूमि आंदोलन से जुड़े कार्यक्रमों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
राम जन्मभूमि आंदोलन और चंपत राय
यदि चंपत राय के सार्वजनिक जीवन की सबसे बड़ी पहचान किसी एक मुद्दे से जुड़ी है, तो वह राम जन्मभूमि आंदोलन है।
1980 और 1990 के दशक में जब अयोध्या आंदोलन राष्ट्रीय राजनीति और सामाजिक विमर्श का केंद्र बना हुआ था, तब चंपत राय संगठनात्मक स्तर पर सक्रिय भूमिका निभा रहे थे।
उन्होंने आंदोलन से जुड़े दस्तावेजों, कानूनी मामलों और जनसंपर्क अभियानों में महत्वपूर्ण योगदान दिया। कई बार वे मीडिया के सामने आंदोलन का पक्ष रखने वाले प्रमुख प्रतिनिधियों में भी शामिल रहे।
राम मंदिर आंदोलन से जुड़े लोगों का मानना है कि उन्होंने पर्दे के पीछे रहकर आंदोलन को संगठित करने में बड़ी भूमिका निभाई।
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बढ़ी जिम्मेदारी
नवंबर 2019 में जब Ayodhya Verdict आया और राम जन्मभूमि मामले का कानूनी विवाद समाप्त हुआ, तब केंद्र सरकार ने Shri Ram Janmabhoomi Teerth Kshetra Trust का गठन किया। इस ट्रस्ट का उद्देश्य अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण और प्रबंधन करना था।
ट्रस्ट में चंपत राय को महासचिव की जिम्मेदारी दी गई। यह पद केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि मंदिर निर्माण, दान प्रबंधन, निर्माण कार्यों की निगरानी और विभिन्न एजेंसियों के साथ समन्वय जैसी जिम्मेदारियां इसी पद से जुड़ी हैं।
राम मंदिर निर्माण में उनकी भूमिका
अयोध्या में बन रहे भव्य राम मंदिर के निर्माण कार्य के दौरान चंपत राय लगातार सक्रिय रहे। मंदिर निर्माण की प्रगति, तकनीकी जानकारियां, निर्माण सामग्री, श्रद्धालुओं की सुविधाएं और ट्रस्ट की योजनाओं की जानकारी वे समय-समय पर मीडिया को देते रहे हैं।
मंदिर निर्माण के दौरान देश और विदेश से आए दान के प्रबंधन में भी ट्रस्ट की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। इस प्रक्रिया में चंपत राय प्रमुख प्रशासनिक चेहरों में रहे।
सादगी भरी जीवनशैली
चंपत राय को जानने वाले लोग बताते हैं कि उनका जीवन अपेक्षाकृत सादा है। वे लंबे समय से संगठनात्मक जीवन से जुड़े रहे हैं और व्यक्तिगत प्रचार से दूर रहना पसंद करते हैं। बड़े राजनीतिक नेताओं की तरह वे सुरक्षा घेरे या भव्य सार्वजनिक जीवन के लिए नहीं जाने जाते।
उनकी पहचान एक ऐसे कार्यकर्ता की रही है जो पर्दे के पीछे रहकर काम करना पसंद करता है।
विवादों से भी रहा नाता
सार्वजनिक जीवन में लंबे समय तक सक्रिय रहने के कारण चंपत राय कई बार विवादों के केंद्र में भी रहे हैं। राम मंदिर निर्माण, जमीन खरीद, ट्रस्ट के निर्णयों और हाल के दिनों में दान एवं चढ़ावे से जुड़े कुछ आरोपों को लेकर उनका नाम चर्चाओं में आया।
हालांकि उन्होंने और ट्रस्ट ने कई बार इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि सभी कार्य निर्धारित प्रक्रियाओं और नियमों के तहत किए गए हैं।
उनका कहना रहा है कि ट्रस्ट के वित्तीय और प्रशासनिक कार्यों की नियमित समीक्षा और ऑडिट होती है।
समर्थक और आलोचक क्या कहते हैं?
चंपत राय के समर्थक उन्हें राम मंदिर आंदोलन का समर्पित कार्यकर्ता और कुशल संगठनकर्ता मानते हैं। उनका कहना है कि यदि आंदोलन के कई प्रमुख नेताओं ने सार्वजनिक नेतृत्व किया, तो चंपत राय ने संगठनात्मक स्तर पर उसे मजबूत किया।
वहीं आलोचक कई मुद्दों पर उनसे सवाल पूछते रहे हैं और ट्रस्ट की कार्यप्रणाली में अधिक पारदर्शिता की मांग करते हैं।
लोकतांत्रिक व्यवस्था में यह स्वाभाविक भी माना जाता है कि किसी बड़े धार्मिक और सार्वजनिक प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों पर लगातार निगाह बनी रहे।
