लखनऊ [TV 47 न्यूज नेटवर्क ]। अयोध्या के राम मंदिर में दान और चढ़ावे को लेकर उठे विवाद की जांच अब निर्णायक चरण में प्रवेश करती दिखाई दे रही है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) पिछले कई दिनों से अयोध्या में डेरा डाले हुए है और मंदिर ट्रस्ट, कर्मचारियों, वित्तीय रिकॉर्ड तथा दान प्रबंधन व्यवस्था की गहन पड़ताल कर रहा है। हालांकि जांच अभी पूरी नहीं हुई है, लेकिन अब तक की कार्रवाई से यह स्पष्ट है कि SIT केवल आरोपों की सतही जांच नहीं कर रही, बल्कि पूरे सिस्टम की परत-दर-परत जांच कर रही है।
कैसे शुरू हुई जांच?
राम मंदिर में दान राशि और चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर सोशल मीडिया, कुछ मीडिया रिपोर्टों और राजनीतिक बयानों के बाद विवाद खड़ा हुआ। इसके बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने भी तथ्यों को स्पष्ट करने के लिए निष्पक्ष जांच का समर्थन किया। मुख्यमंत्री Yogi Adityanath के निर्देश पर तीन सदस्यीय SIT का गठन किया गया।
कौन कर रहा है जांच?
SIT में तीन वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं—
- Vijay Vishwas Pant (अध्यक्ष)
- Kiran S
- Neel Ratan
सरकार ने टीम को प्रारंभिक रिपोर्ट सात दिनों में और अंतिम रिपोर्ट पंद्रह दिनों के भीतर सौंपने का निर्देश दिया है।
अयोध्या पहुंचते ही क्या किया?
SIT ने अयोध्या पहुंचने के बाद सबसे पहले राम मंदिर परिसर का निरीक्षण किया। टीम ने मंदिर प्रशासन, जिला प्रशासन और ट्रस्ट के अधिकारियों के साथ बैठक की। इसके बाद जांच का दायरा केवल दान पेटियों तक सीमित न रखते हुए पूरे वित्तीय प्रबंधन तंत्र तक बढ़ा दिया गया।
सूत्रों के अनुसार टीम ने मंदिर परिसर में कई घंटे बिताए और विभिन्न रिकॉर्ड अपने कब्जे में लेकर उनकी जांच शुरू की।
रिकॉर्ड और बैंक दस्तावेजों की जांच
जांच के तीसरे दिन SIT ने बैंक दस्तावेजों, दान रजिस्टरों और वित्तीय रिकॉर्ड की गहन जांच की। टीम यह समझने का प्रयास कर रही है कि श्रद्धालुओं द्वारा दिए गए दान का रिकॉर्ड कैसे रखा जाता है, उसकी गिनती कैसे होती है और बैंकिंग प्रक्रिया में किस प्रकार शामिल किया जाता है।
जांच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा तथाकथित “मनी ट्रेल” है। यानी दान के रूप में प्राप्त धन का पूरा प्रवाह किस तरह हुआ और कहीं कोई विसंगति तो नहीं हुई।
CCTV फुटेज भी खंगाले गए
SIT ने काउंटिंग हॉल और अन्य महत्वपूर्ण स्थानों के CCTV फुटेज भी देखे हैं। जांच अधिकारी यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि दान पेटियों की गिनती और चढ़ावे के प्रबंधन के दौरान निर्धारित प्रक्रियाओं का पालन हुआ या नहीं।
फुटेज की समीक्षा इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि इससे घटनाक्रम का स्वतंत्र सत्यापन संभव हो सकता है।
कितने लोगों से हुई पूछताछ ?
अब तक SIT दर्जनों लोगों से पूछताछ कर चुकी है।
रिपोर्टों के अनुसार—
- पहले चरण में 40 से अधिक लोगों से पूछताछ हुई।
- बाद में ट्रस्ट पदाधिकारियों और कर्मचारियों सहित 16 अन्य लोगों से भी सवाल-जवाब किए गए।
- कुछ वरिष्ठ अधिकारियों और मंदिर प्रशासन से जुड़े व्यक्तियों के बयान भी दर्ज किए गए।
पूछताछ का उद्देश्य यह समझना है कि दान संग्रहण, गिनती, रिकॉर्डिंग और जमा करने की प्रक्रिया में कौन-कौन लोग शामिल थे।
किन बिंदुओं पर फोकस है ?
जांच मुख्य रूप से पांच बिंदुओं पर केंद्रित बताई जा रही है—
- दान राशि की गिनती की प्रक्रिया
- बैंक में जमा होने वाली रकम का रिकॉर्ड
- सोना, चांदी और अन्य बहुमूल्य चढ़ावे का लेखा-जोखा
- प्रशासनिक जिम्मेदारियों का बंटवारा
- किसी भी संभावित वित्तीय अनियमितता का सत्यापन
SIT यह भी देख रही है कि कहीं प्रक्रिया संबंधी कमजोरियों का फायदा उठाकर कोई गड़बड़ी तो नहीं की गई।
नृपेंद्र मिश्र ने क्या कहा ?
राम मंदिर निर्माण समिति के अध्यक्ष Nripendra Misra ने कहा है कि जांच में किसी प्रकार की ढिलाई नहीं बरती जाएगी।
उन्होंने कहा कि जांच के दो पहलू हैं—पहला, यदि कोई आपराधिक तथ्य सामने आता है तो उसकी जांच; दूसरा, भविष्य में व्यवस्था को और बेहतर बनाना। उनके अनुसार श्रद्धालुओं का विश्वास सर्वोच्च प्राथमिकता है।
चंपत राय का पक्ष
श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव Champat Rai ने कहा है कि ट्रस्ट में नियमित ऑडिट की व्यवस्था है और अब तक किसी बड़े वित्तीय घोटाले की पुष्टि नहीं हुई है।
उन्होंने जांच में पूरा सहयोग देने का आश्वासन दिया है और कहा है कि तथ्यों के सामने आने का इंतजार किया जाना चाहिए।
क्या कोई निष्कर्ष निकला?
अब तक SIT ने कोई आधिकारिक निष्कर्ष सार्वजनिक नहीं किया है।
महत्वपूर्ण बात यह है कि जांच अभी जारी है और किसी व्यक्ति या संस्था को दोषी नहीं ठहराया गया है। जांच एजेंसियां रिकॉर्ड, गवाहों के बयान, बैंकिंग दस्तावेज और तकनीकी साक्ष्यों की समीक्षा कर रही हैं।
आगे क्या?
अगले कुछ दिनों में SIT अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट सरकार को सौंप सकती है। इसके बाद विस्तृत जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट होगा कि—
- आरोपों में कितनी सच्चाई है,
- क्या कोई वित्तीय अनियमितता हुई,
- यदि हुई तो जिम्मेदार कौन हैं,
- और भविष्य में ऐसी स्थिति रोकने के लिए क्या सुधार आवश्यक हैं।
