नई दिल्ली [TV 47 न्यूज नेटवर्क ]।। युद्ध, आर्थिक संकट और मानवीय त्रासदी से जूझ रहे यमन से अक्सर दुखद खबरें ही दुनिया तक पहुंचती हैं। लेकिन इसी देश से एक ऐसा नाम भी उभरा जिसने सोशल मीडिया पर लाखों लोगों का ध्यान अपनी ओर खींचा। यह नाम था Al-Qaqa Ibn Antar, जिसे लोग “स्पाइडर मैन ऑफ यमन” के नाम से जानते थे।
30 वर्षीय अल-क़ाका इब्न अंतार किसी फिल्मी सुपरहीरो की तरह ऊंची चट्टानों और खतरनाक पहाड़ों पर बिना रस्सी और सुरक्षा उपकरण के चढ़ जाते थे। उनके वीडियो देखकर लोग हैरान रह जाते थे। लेकिन 12 जून 2026 को वही साहसिक सफर एक दर्दनाक हादसे में बदल गया, जब वह एक ज्वालामुखीय क्रेटर में गिर गए और उनकी मौत हो गई।
कौन थे अल-क़ाका इब्न अंतार?
अल-क़ाका इब्न अंतार दक्षिणी यमन के रहने वाले थे। वे किसी पेशेवर पर्वतारोहण संस्थान से प्रशिक्षित नहीं थे। उनकी पहचान सोशल मीडिया के जरिए बनी, जहां वे अपने खतरनाक कारनामों के वीडियो साझा करते थे।
वह ऊंची चट्टानों, पहाड़ों और ज्वालामुखीय संरचनाओं पर बिना किसी सुरक्षा उपकरण के चढ़ते थे। कई बार वे सैकड़ों फीट ऊंचाई पर केवल एक हाथ के सहारे लटकते नजर आते थे। उनके वीडियो लाखों बार देखे गए और धीरे-धीरे उन्हें “स्पाइडर मैन ऑफ यमन” कहा जाने लगा।
क्यों कहा जाता था ‘स्पाइडर मैन’?
हॉलीवुड के काल्पनिक सुपरहीरो स्पाइडर-मैन की तरह अल-क़ाका भी लगभग सीधी खड़ी चट्टानों पर चढ़ जाते थे।
उनके वीडियो में अक्सर देखा जाता था कि वे खतरनाक ढलानों और ऊर्ध्वाधर चट्टानों पर बिना डर के आगे बढ़ रहे हैं। कई बार वे कैमरे की ओर देखकर मुस्कुराते थे, हाथ हिलाते थे और दर्शकों का अभिवादन भी करते थे।
यही वजह थी कि सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें “स्पाइडर मैन ऑफ यमन” का नाम दे दिया।
संघर्षों से भरा जीवन
अल-क़ाका की कहानी केवल रोमांच की कहानी नहीं थी। इसके पीछे आर्थिक संघर्ष भी छिपा था। यमन पिछले कई वर्षों से युद्ध, बेरोजगारी और आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। ऐसे माहौल में लाखों परिवार गरीबी की मार झेल रहे हैं।
कई रिपोर्टों और सोशल मीडिया चर्चाओं के अनुसार अल-क़ाका ने कई बार कहा था कि वे अपने परिवार की आर्थिक मदद के लिए इन खतरनाक करतबों को रिकॉर्ड करते थे। सोशल मीडिया से मिलने वाली लोकप्रियता और सहायता उनके लिए आय का एक महत्वपूर्ण स्रोत बन गई थी।
सोशल मीडिया का सितारा
अल-क़ाका के वीडियो केवल यमन तक सीमित नहीं रहे। मध्य पूर्व, यूरोप और एशिया के कई देशों में लोग उनके वीडियो देखने लगे।
उनकी लोकप्रियता का कारण केवल साहस नहीं था बल्कि उनका आत्मविश्वास भी था। वे बिना किसी भय के उन स्थानों तक पहुंच जाते थे जहां सामान्य व्यक्ति जाने की कल्पना भी नहीं कर सकता।
उनके हजारों फॉलोअर्स हर नए वीडियो का इंतजार करते थे। कुछ लोग उन्हें प्रेरणा मानते थे, जबकि कई लोग उनकी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहते थे।
वह आखिरी दिन
12 जून 2026 का दिन अल-क़ाका के जीवन का अंतिम दिन साबित हुआ। उस दिन वह यमन के धाले प्रांत में स्थित हराधत दमत (Hardah Dam/Haradhat Damt) नामक ज्वालामुखीय क्रेटर की खड़ी दीवार पर चढ़ रहे थे। यह क्रेटर लगभग 120 मीटर (करीब 393 फीट) गहरा माना जाता है।
प्रत्यक्षदर्शियों और अधिकारियों के अनुसार अल-क़ाका हमेशा की तरह बिना रस्सी, हार्नेस या किसी सुरक्षा उपकरण के चढ़ाई कर रहे थे।
एक वीडियो में उन्हें चट्टान की दीवार पर ऊपर चढ़ते देखा गया। कुछ ही क्षण बाद उनका हाथ फिसल गया और वे गहराई में गिर गए। यह पूरा हादसा कैमरे में कैद हो गया।
मौत से जंग और कठिन बचाव अभियान
हादसे के बाद बचाव दल तुरंत सक्रिय हुआ।
लेकिन बचाव कार्य आसान नहीं था। ज्वालामुखीय क्रेटर की खड़ी दीवारें, गर्म सल्फरयुक्त पानी और कठिन भूभाग ने अभियान को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया।
विशेष गोताखोरों और बचावकर्मियों की टीम को क्रेटर के भीतर उतारा गया। लगभग चार घंटे तक चले अभियान के बाद उनका शव क्रेटर के भीतर स्थित झील से निकाला गया। अधिकारियों के अनुसार शव पानी की सतह से लगभग 30 मीटर नीचे मिला।
दुनिया भर में शोक
अल-क़ाका की मौत की खबर फैलते ही सोशल मीडिया पर शोक संदेशों की बाढ़ आ गई। कई लोगों ने उन्हें एक निडर साहसी व्यक्ति बताया। वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि बिना सुरक्षा उपकरण के ऐसे खतरनाक स्टंट करना बेहद जोखिम भरा होता है।
रेडिट और अन्य मंचों पर हजारों लोगों ने उनकी मौत पर दुख व्यक्त किया। कुछ लोगों ने कहा कि गरीबी और आर्थिक मजबूरी ने उन्हें ऐसे जोखिम उठाने पर मजबूर किया।
बहादुरी या लापरवाही?
अल-क़ाका की मौत के बाद एक बहस भी शुरू हुई। एक पक्ष का मानना है कि उन्होंने अपने साहस और जुनून से लाखों लोगों को प्रेरित किया। वहीं दूसरा पक्ष इसे अनावश्यक जोखिम और लापरवाही का उदाहरण मानता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पर्वतारोहण और साहसिक खेलों में सुरक्षा उपकरणों का उपयोग जीवन रक्षक साबित होता है। किसी भी परिस्थिति में बिना सुरक्षा के खतरनाक चढ़ाई करना जानलेवा हो सकता है।
यमन के युवाओं के लिए एक प्रतीक
यमन में अल-क़ाका केवल एक इंटरनेट स्टार नहीं थे। वे उन युवाओं के लिए उम्मीद का प्रतीक बन गए थे जो कठिन परिस्थितियों में भी अपने सपनों को छोड़ना नहीं चाहते।
उनकी सफलता ने यह दिखाया कि सीमित संसाधनों के बावजूद कोई व्यक्ति दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित कर सकता है।
हालांकि उनका अंत दुखद रहा, लेकिन उनकी कहानी आज भी यमन के हजारों युवाओं के लिए प्रेरणा और चेतावनी दोनों का संदेश देती है।
सोशल मीडिया की कीमत
अल-क़ाका की कहानी आधुनिक डिजिटल युग का एक महत्वपूर्ण सवाल भी उठाती है। क्या सोशल मीडिया की लोकप्रियता पाने के लिए लोग अपनी जान जोखिम में डाल रहे हैं?
दुनिया भर में ऐसे कई उदाहरण सामने आए हैं जहां लोग अधिक व्यूज़ और फॉलोअर्स पाने के लिए खतरनाक स्टंट करते हैं। अल-क़ाका की मौत ने इस बहस को फिर से तेज कर दिया है।
