लखनऊ [TV 47 न्यूज नेटवर्क ]। अयोध्या के राम मंदिर को लेकर इन दिनों सोशल मीडिया और यूट्यूब पर कई वीडियो तेजी से वायरल हो रहे हैं। इन वीडियो में राम मंदिर के चढ़ावे और दान राशि में कथित गड़बड़ी के आरोप लगाए जा रहे हैं। कुछ वीडियो में करोड़ों रुपये, सोने की गदा और आभूषणों के गायब होने तक के दावे किए जा रहे हैं। इन आरोपों के बाद राजनीतिक गलियारों से लेकर धार्मिक जगत तक चर्चा तेज हो गई है। इसी बीच श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने सामने आकर अपनी सफाई दी है।
वायरल वीडियो से कैसे शुरू हुआ विवाद?
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और कुछ मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि राम मंदिर में भक्तों द्वारा दिए गए चढ़ावे और दान से जुड़ी रकम में अनियमितताएं हुई हैं। आरोपों में यह भी कहा गया कि कुछ कीमती वस्तुएं और दान की राशि का हिसाब स्पष्ट नहीं है। इन दावों के बाद विपक्षी दलों ने भी मामले की जांच की मांग उठाई।
हालांकि, वायरल वीडियो में किए गए सभी दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी तक नहीं हुई है और कई पहलुओं की जांच चल रही है।
राजनीतिक बयानबाजी से बढ़ा मामला
मामला तब और चर्चा में आया जब समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने कथित तौर पर दान राशि में गड़बड़ी की खबरों पर सवाल उठाए और निष्पक्ष जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि यदि श्रद्धालुओं के दान से जुड़ी किसी भी प्रकार की अनियमितता हुई है तो उसकी पारदर्शी जांच होनी चाहिए।
इसके बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया और सोशल मीडिया पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया।
चंपत राय ने क्या कहा?
आरोपों के बीच चंपत राय ने स्पष्ट कहा कि ट्रस्ट में समय-समय पर आंतरिक ऑडिट (Internal Audit) कराया जाता है और अभी तक किसी भी प्रकार की उल्लेखनीय गड़बड़ी सामने नहीं आई है। उन्होंने बताया कि ऑडिट प्रक्रिया में ट्रस्ट के प्रतिनिधियों के साथ State Bank of India के अधिकारी भी शामिल रहते हैं।
चंपत राय के अनुसार:
“ऑडिट की प्रक्रिया लगातार चलती रहती है और अब तक ऐसा कोई तथ्य सामने नहीं आया है जिससे बड़े वित्तीय घोटाले की पुष्टि होती हो।”
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी स्तर पर कोई शिकायत है तो उसकी जांच कराई जा सकती है, लेकिन बिना तथ्यात्मक आधार के लगाए जा रहे आरोप उचित नहीं हैं।
एसआईटी जांच में क्या हो रहा है?
विवाद बढ़ने के बाद मामले की जांच के लिए विशेष जांच दल (SIT) सक्रिय हुआ है। रिपोर्टों के अनुसार जांच टीम ने ट्रस्ट से जुड़े कई वर्तमान और पूर्व कर्मचारियों से पूछताछ की है। दान पेटियों की गिनती, रिकॉर्ड और संबंधित प्रक्रियाओं की जांच की जा रही है।
बताया जा रहा है कि जांच दल ने कई कर्मचारियों और संबंधित लोगों से पूछताछ की है तथा बैंक रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेज भी खंगाले जा रहे हैं।
ट्रस्ट के सहयोगियों का पक्ष
विवाद के बीच ट्रस्ट से जुड़े कुछ लोगों ने भी आरोपों का खंडन किया है। उनका कहना है कि मंदिर परिसर में सीसीटीवी निगरानी की व्यवस्था है और दान राशि की गिनती एक निर्धारित प्रक्रिया के तहत होती है। उनका दावा है कि जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
भक्तों के बीच चिंता
राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में दान और चढ़ावे से जुड़े किसी भी विवाद का सीधा असर लोगों की भावनाओं पर पड़ता है। यही कारण है कि सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को लेकर लोग स्पष्ट जवाब चाहते हैं।
कई श्रद्धालुओं का कहना है कि यदि कोई गड़बड़ी हुई है तो दोषियों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए, वहीं यदि आरोप गलत हैं तो जांच के जरिए सच्चाई सामने आनी चाहिए।
जांच के बाद ही सामने आएगा सच
फिलहाल सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि जांच अभी जारी है। आरोप लगाए गए हैं, लेकिन अंतिम निष्कर्ष अभी सामने नहीं आया है। ट्रस्ट का दावा है कि ऑडिट में कोई बड़ी अनियमितता नहीं मिली है, जबकि जांच एजेंसियां उपलब्ध तथ्यों और दस्तावेजों की पड़ताल कर रही हैं।
