लखनऊ [TV 47 न्यूज नेटवर्क ]। यूपी में छात्रों की छात्रवृत्ति को लेकर योगी सरकार ने एक बार फिर सीधे बैंक खाते में पैसा भेजने की व्यवस्था को आगे बढ़ाया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 3 अक्टूबर 2026 को लखनऊ के लोक भवन में वित्तीय वर्ष 2026-27 की छात्रवृत्ति वितरण प्रक्रिया की शुरुआत की। इस चरण में 4.60 लाख से अधिक विद्यार्थियों के बैंक खातों में 148 करोड़ रुपये से ज्यादा की छात्रवृत्ति और शुल्क प्रतिपूर्ति की राशि भेजी जा रही है।
सबसे ज्यादा लाभ पिछड़ा वर्ग और अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को मिला है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार OBC के 2,23,615 विद्यार्थियों को 60.01 करोड़ रुपये, जबकि SC के 1,59,959 विद्यार्थियों को 64.54 करोड़ रुपये दिए जा रहे हैं। इसके अलावा सामान्य वर्ग के 38,084 विद्यार्थियों को 11.43 करोड़ रुपये और अल्पसंख्यक वर्ग के 38,901 विद्यार्थियों को 12.06 करोड़ रुपये मिलेंगे।
इस वितरण को केवल छात्रवृत्ति की रकम भेजने की कवायद के तौर पर नहीं देखा जा रहा है। इसके पीछे सरकार की ओर से छात्रवृत्ति व्यवस्था को ऑनलाइन, आधार-लिंक्ड और सीधे बैंक खाते में भुगतान करने की नीति भी है।
4.60 लाख से ज्यादा छात्रों को मिली छात्रवृत्ति, किस वर्ग को कितनी रकम?
3 अक्टूबर के वितरण में कुल 4,60,000 से अधिक विद्यार्थियों को लाभ मिल रहा है। उपलब्ध वर्गवार आंकड़ों के मुताबिक रकम का बंटवारा इस प्रकार है।
पिछड़ा वर्ग यानी OBC:
2,23,615 विद्यार्थियों को 60.01 करोड़ रुपये।
अनुसूचित जाति यानी SC:
1,59,959 विद्यार्थियों को 64.54 करोड़ रुपये।
सामान्य वर्ग:
38,084 विद्यार्थियों को 11.43 करोड़ रुपये।
अल्पसंख्यक वर्ग:
38,901 विद्यार्थियों को 12.06 करोड़ रुपये।
इस तरह इस चरण में कुल राशि 148 करोड़ रुपये से अधिक है। खास बात यह है कि राशि विद्यार्थियों के आधार से जुड़े बैंक खातों में भेजी जा रही है।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ऊपर दिए गए आंकड़े 3 अक्टूबर 2026 के इस चरण के वितरण से संबंधित हैं। इन्हें पूरे वित्तीय वर्ष में दी जाने वाली कुल छात्रवृत्ति नहीं माना जाना चाहिए।
SC-ST और OBC छात्रों के लिए क्या है व्यवस्था?
उत्तर प्रदेश में छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति योजना के तहत अलग-अलग वर्गों के विद्यार्थियों को सहायता दी जाती है। इसमें पूर्वदशम यानी कक्षा 9-10 और दशमोत्तर यानी कक्षा 11-12 के विद्यार्थियों के साथ उच्च शिक्षा में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए भी योजनाएं हैं।
2026-27 के लिए सरकार ने आवेदन से लेकर सत्यापन, डाटा लॉक करने और भुगतान तक की प्रक्रिया के लिए समय-सारिणी निर्धारित की है। सरकार का लक्ष्य है कि छात्रवृत्ति की रकम सीधे विद्यार्थियों के बैंक खाते में पहुंचे और बीच की अनावश्यक प्रक्रिया कम हो।
यूपी सरकार के संबंधित पोर्टल पर वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, सामान्य वर्ग, अन्य पिछड़ा वर्ग और अल्पसंख्यक वर्ग के विद्यार्थियों की दशमोत्तर छात्रवृत्ति तथा शुल्क प्रतिपूर्ति से जुड़े निर्देश भी जारी किए गए हैं।
योगी ने क्यों कहा था- ‘बाबू हजम कर जाते थे’?
छात्रवृत्ति के मौजूदा वितरण के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का मार्च 2026 का बयान भी चर्चा में है। 30 मार्च को छात्रवृत्ति वितरण कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने पिछली सरकारों पर योजनाओं की रकम में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया था।
योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि 2017 से पहले गरीबों, छात्रों और वंचित वर्गों के लिए चलने वाली योजनाओं में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार होता था। उन्होंने आरोप लगाया कि पेंशन और दूसरी सरकारी सहायता की रकम का हिस्सा लाभार्थियों तक पहुंचने से पहले ही बिचौलियों और अधिकारियों द्वारा हड़प लिया जाता था।
मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से दिव्यांग पेंशन का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया था कि पहले छह महीने की राशि एक साथ आने के बावजूद लाभार्थी को पूरी रकम नहीं मिलती थी और उनके शब्दों में बाकी रकम “सपा कार्यकर्ता और बाबू चट कर जाते थे।” यह मुख्यमंत्री द्वारा लगाया गया राजनीतिक आरोप था; इसे किसी स्वतंत्र जांच के निष्कर्ष के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।
यही वजह है कि छात्रवृत्ति के मौजूदा DBT मॉडल को सरकार भ्रष्टाचार रोकने की अपनी नीति से जोड़ती है।
छात्रवृत्ति में DBT क्यों बना सरकार का बड़ा हथियार?
छात्रवृत्ति व्यवस्था में सबसे बड़ा बदलाव सीधे बैंक खाते में भुगतान है। पहले छात्रवृत्ति प्रक्रिया में विद्यार्थी, शिक्षण संस्थान, विभाग और बैंक के बीच कई स्तर होते थे। अब ऑनलाइन आवेदन, सत्यापन और डिजिटल भुगतान की व्यवस्था को ज्यादा महत्व दिया जा रहा है।
सरकार की व्यवस्था के अनुसार छात्रवृत्ति की राशि आधार से जुड़े बैंक खातों में भेजी जाती है। इससे सरकार का दावा है कि लाभार्थी की पहचान और भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बढ़ती है।
हालांकि केवल DBT शुरू कर देना ही पूरी समस्या का समाधान नहीं है। छात्रवृत्ति की प्रक्रिया में आवेदन, संस्थान स्तर पर सत्यापन, डाटा लॉक, विश्वविद्यालय स्तर का सत्यापन और अन्य तकनीकी चरण भी महत्वपूर्ण हैं।
2025 में सामने आई थी बड़ी लापरवाही
छात्रवृत्ति व्यवस्था में गड़बड़ी की शिकायतें केवल पिछली सरकारों के संदर्भ में ही नहीं रही हैं। योगी सरकार के कार्यकाल में भी अधिकारियों और शिक्षण संस्थानों की लापरवाही के मामले सामने आए हैं।
सितंबर 2025 में सरकार के संज्ञान में आया था कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में करीब छह लाख पात्र विद्यार्थी छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति से वंचित रह गए। रिपोर्ट के मुताबिक कई जगह अधिकारियों ने डाटा लॉक नहीं किया, जबकि कुछ विश्वविद्यालयों और कॉलेजों ने ऑनलाइन आवेदन आगे नहीं बढ़ाए।
इसके बाद कई जिलों के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की गई। बरेली में एक बाबू को निलंबित किए जाने की भी खबर सामने आई थी। मुख्यमंत्री ने वंचित छात्रों को राशि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए थे।
इस घटना से एक बात स्पष्ट होती है कि छात्रवृत्ति में समस्या केवल भ्रष्टाचार तक सीमित नहीं है। आवेदन प्रक्रिया में देरी, डाटा अपलोड न होना, संस्थान स्तर की लापरवाही और तकनीकी त्रुटियां भी विद्यार्थियों को मिलने वाली सहायता रोक सकती हैं।
2025-26 में OBC के 36 लाख से अधिक छात्रों को लाभ
पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों के लिए छात्रवृत्ति योजना का दायरा काफी बड़ा है। उपलब्ध सरकारी-संबंधित रिपोर्ट के अनुसार वित्तीय वर्ष 2025-26 में 36 लाख से अधिक OBC छात्र-छात्राओं को छात्रवृत्ति दी गई थी।
इस योजना में छात्र-छात्राओं के साथ ट्रांसजेंडर विद्यार्थियों को भी शामिल किया गया। सरकार के अनुसार ऑनलाइन प्रक्रिया और सीधे बैंक खातों में भुगतान के जरिए छात्रवृत्ति वितरण को पारदर्शी बनाया गया।
इससे समझा जा सकता है कि 3 अक्टूबर 2026 को जारी की गई रकम पूरे वर्ष की छात्रवृत्ति नहीं है, बल्कि 2026-27 के वितरण चक्र का एक चरण है।
छात्रवृत्ति बजट में OBC और SC के लिए कितनी रकम?
उत्तर प्रदेश के 2025-26 के बजट प्रावधानों में पिछड़ा वर्ग कल्याण विभाग की योजनाओं के लिए 3,402 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित थी। इसमें पूर्वदशम और दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजना के लिए 3,060.50 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए थे।
इसी बजट दस्तावेज में अनुसूचित जाति के पूर्वदशम और दशमोत्तर छात्रवृत्ति के लिए 977 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित थी। सामान्य वर्ग की पूर्वदशम और दशमोत्तर छात्रवृत्ति योजनाओं के लिए 950 करोड़ रुपये प्रस्तावित थे।
यह आंकड़े बजट प्रावधान हैं, इन्हें किसी एक दिन छात्रों के खातों में भेजी गई वास्तविक राशि नहीं समझना चाहिए।
छात्रवृत्ति का पैसा कहां जा रहा है?
इस सवाल का जवाब दो स्तर पर समझना जरूरी है। पहला है सरकार द्वारा बजट में रखी गई राशि और दूसरा है किसी खास चरण में लाभार्थियों को भेजी गई वास्तविक रकम।
3 अक्टूबर 2026 के वितरण में OBC छात्रों के लिए 60.01 करोड़ रुपये और SC छात्रों के लिए 64.54 करोड़ रुपये भेजे जा रहे हैं। सामान्य और अल्पसंख्यक वर्ग के विद्यार्थियों को मिलाकर कुल राशि 148 करोड़ रुपये से ज्यादा है।
वहीं पूरे वर्ष के बजट प्रावधान इससे कई गुना अधिक हैं, क्योंकि छात्रवृत्ति अलग-अलग चरणों में और विभिन्न कक्षाओं तथा पाठ्यक्रमों के विद्यार्थियों को दी जाती है।
इसलिए यह कहना सही नहीं होगा कि सरकार ने पूरे साल के लिए सिर्फ 148 करोड़ रुपये की छात्रवृत्ति रखी है।
क्या छात्रवृत्ति केवल SC-ST और OBC को मिलती है?
नहीं। उत्तर प्रदेश की छात्रवृत्ति एवं शुल्क प्रतिपूर्ति व्यवस्था में अलग-अलग श्रेणियों के विद्यार्थी शामिल हैं। 2026-27 की व्यवस्था में SC, ST, सामान्य, OBC और अल्पसंख्यक वर्ग के विद्यार्थियों के लिए योजनाएं संचालित हैं।
इसलिए छात्रवृत्ति को केवल SC-ST या OBC तक सीमित करके देखना पूरी तस्वीर नहीं होगी।
हालांकि सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के लिए इन योजनाओं का महत्व ज्यादा है, क्योंकि फीस, किताब, आवास और पढ़ाई से जुड़े दूसरे खर्च कई परिवारों के लिए बड़ी चुनौती होते हैं।
सरकार के सामने असली चुनौती क्या है?
सरकार ने भुगतान को ऑनलाइन और DBT आधारित बनाने की दिशा में कदम उठाए हैं। लेकिन छात्रवृत्ति की सफलता का पैमाना केवल यह नहीं है कि पैसा बैंक खाते में भेज दिया गया।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि पात्र विद्यार्थी का आवेदन समय पर स्वीकार हुआ या नहीं, उसके दस्तावेजों का सही सत्यापन हुआ या नहीं और किसी तकनीकी या संस्थागत गलती के कारण वह लाभ से वंचित तो नहीं रह गया।
2025 में करीब छह लाख छात्रों के छात्रवृत्ति से वंचित रहने का मामला इस चुनौती को सामने ला चुका है।
इसलिए सरकार की डिजिटल व्यवस्था के साथ शिक्षण संस्थानों और विभागीय अधिकारियों की जवाबदेही भी महत्वपूर्ण है।
‘बाबू खा लेते हैं’ वाले बयान का राजनीतिक संदर्भ
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जब ‘बाबू’ और लाभार्थियों की रकम हड़पने की बात कही थी, तब वह बयान पिछली सरकारों पर राजनीतिक हमला था। उन्होंने 2017 से पहले की व्यवस्था में भ्रष्टाचार का आरोप लगाया और अपनी सरकार की DBT व्यवस्था को उससे अलग बताया।
दूसरी तरफ, वर्तमान व्यवस्था में भी जब किसी छात्र का आवेदन आगे नहीं बढ़ता या डाटा अपलोड नहीं होता तो सरकार को अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करनी पड़ती है। 2025 में ऐसी कार्रवाई के मामले सामने आए हैं।
यानी छात्रवृत्ति व्यवस्था की कहानी केवल ‘पहले पैसा खाया जाता था और अब नहीं’ तक सीमित नहीं है। असल मुद्दा यह है कि पात्र छात्र तक उसका पैसा बिना देरी और बिना अनियमितता के पहुंचे।
अब आगे क्या होगा?
वित्तीय वर्ष 2026-27 में छात्रवृत्ति वितरण की प्रक्रिया अलग-अलग चरणों में जारी रहेगी। सरकार ने आवेदन, सत्यापन और भुगतान की समय-सारिणी पहले से तय की है। नवीनीकरण और नए आवेदन के लिए अलग-अलग चरण निर्धारित किए गए हैं और भुगतान PFMS के माध्यम से बैंक खातों में भेजने की व्यवस्था है।
3 अक्टूबर का वितरण इसी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण चरण है। इसमें 4.60 लाख से ज्यादा विद्यार्थियों को 148 करोड़ रुपये से अधिक मिल रहे हैं।
सबसे बड़ा हिस्सा इस चरण में SC और OBC विद्यार्थियों के खाते में जा रहा है। SC विद्यार्थियों के लिए 64.54 करोड़ और OBC विद्यार्थियों के लिए 60.01 करोड़ रुपये निर्धारित हैं।
