नई दिल्ली [TV 47 न्यूज नेटवर्क ]। 21 जून को दुनिया के 190 से अधिक देशों में करोड़ों लोग एक साथ योग करते हैं। न्यूयॉर्क के टाइम्स स्क्वायर से लेकर पेरिस के एफिल टॉवर, लंदन के ट्राफलगर स्क्वायर, सिडनी ओपेरा हाउस और दिल्ली के कर्तव्य पथ तक योग का सामूहिक अभ्यास अब एक सामान्य दृश्य बन चुका है।
लेकिन यह स्थिति अचानक नहीं बनी। इसके पीछे हजारों वर्षों की सांस्कृतिक यात्रा, आध्यात्मिक परंपरा, आधुनिक कूटनीति और भारत के एक बड़े वैश्विक अभियान की कहानी छिपी हुई है।
आज विश्व योग दिवस दुनिया के सबसे व्यापक रूप से मनाए जाने वाले अंतरराष्ट्रीय आयोजनों में शामिल है। लेकिन यह जानना दिलचस्प है कि आखिर योग संयुक्त राष्ट्र तक पहुंचा कैसे? किसने इसकी पहल की? दुनिया के 177 देशों ने इसका समर्थन क्यों किया? और आखिर 21 जून को ही योग दिवस के लिए क्यों चुना गया?
यह कहानी केवल योग की नहीं, बल्कि भारत की सांस्कृतिक शक्ति और वैश्विक प्रभाव की भी कहानी है।
योग: भारत की आत्मा से निकला जीवन दर्शन
योग का इतिहास लगभग पांच हजार वर्ष पुराना माना जाता है। भारतीय सभ्यता में योग केवल व्यायाम नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक समग्र पद्धति रहा है।
संस्कृत में “योग” शब्द “युज” धातु से बना है, जिसका अर्थ है—जोड़ना, मिलाना या एकत्व स्थापित करना। भारतीय ऋषियों ने योग को शरीर, मन और आत्मा के बीच संतुलन स्थापित करने का माध्यम बताया। वेदों, उपनिषदों, भगवद्गीता और पतंजलि योगसूत्र में योग का विस्तृत वर्णन मिलता है। महर्षि पतंजलि ने योग को व्यवस्थित रूप देकर इसे वैज्ञानिक स्वरूप प्रदान किया।
योग का मूल उद्देश्य केवल शारीरिक फिटनेस नहीं बल्कि मानसिक शांति, आत्मिक जागृति और जीवन में संतुलन स्थापित करना है।
पश्चिमी दुनिया में योग का पहला परिचय
19वीं सदी के अंत तक योग मुख्य रूप से भारत तक सीमित था। लेकिन 1893 में एक घटना ने इसकी दिशा बदल दी। 1893 में अमेरिका के शिकागो में आयोजित विश्व धर्म संसद में स्वामी विवेकानंद ने भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का परिचय दुनिया को कराया। उनके भाषण ने पश्चिमी देशों में भारतीय दर्शन, वेदांत और योग के प्रति उत्सुकता पैदा की। यहीं से पश्चिमी समाज में योग की पहली गंभीर चर्चा शुरू हुई।
योग गुरुओं ने दुनिया में फैलाया संदेश
20वीं सदी में अनेक भारतीय संतों और योगाचार्यों ने योग को वैश्विक मंच तक पहुंचाया।
इनमें प्रमुख नाम रहे—
- स्वामी शिवानंद
- परमहंस योगानंद
- महर्षि महेश योगी
- बी.के.एस. अयंगर
- श्री श्री रविशंकर
- स्वामी रामदेव
इन योगाचार्यों ने अमेरिका, यूरोप, रूस और एशिया के अनेक देशों में योग केंद्र स्थापित किए। धीरे-धीरे योग स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन का वैश्विक प्रतीक बनता गया।
21वीं सदी और योग का नया दौर
नई सदी के साथ दुनिया कई स्वास्थ्य चुनौतियों का सामना कर रही थी।
- बढ़ता तनाव
- अवसाद
- मोटापा
- मधुमेह
- उच्च रक्तचाप
- अनिद्रा
आधुनिक चिकित्सा पद्धतियों के साथ लोग प्राकृतिक और समग्र स्वास्थ्य समाधानों की तलाश करने लगे। यहीं योग ने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा। अमेरिका और यूरोप में योग स्टूडियो की संख्या तेजी से बढ़ने लगी। कॉरपोरेट कंपनियां कर्मचारियों के तनाव प्रबंधन के लिए योग को अपनाने लगीं।
2014: जब योग पहुंचा संयुक्त राष्ट्र महासभा
विश्व योग दिवस की कहानी का सबसे महत्वपूर्ण मोड़ 2014 में आया। भारत में नई सरकार बनने के कुछ महीनों बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी संयुक्त राष्ट्र महासभा के मंच पर पहुंचे। 27 सितंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण के दौरान उन्होंने योग का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा:
“योग भारत की प्राचीन परंपरा का अमूल्य उपहार है। यह मन और शरीर, विचार और कर्म, संयम और संतुष्टि का एकत्व है।”
प्रधानमंत्री ने योग को मानवता के लिए उपयोगी बताते हुए संयुक्त राष्ट्र से अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित करने का आग्रह किया। उस समय शायद ही किसी ने कल्पना की होगी कि यह प्रस्ताव इतिहास रच देगा।
दुनिया ने क्यों किया समर्थन?
संयुक्त राष्ट्र में किसी भी प्रस्ताव को पारित कराने के लिए व्यापक वैश्विक सहमति आवश्यक होती है। लेकिन योग के मामले में जो हुआ वह असाधारण था। भारत के राजनयिक मिशनों ने दुनिया भर में विभिन्न देशों से संवाद शुरू किया।
योग को किसी धर्म या राजनीतिक विचारधारा से नहीं जोड़ा गया। इसे मानव स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और वैश्विक कल्याण से संबंधित विषय के रूप में प्रस्तुत किया गया। यही इसकी सबसे बड़ी ताकत बनी।
177 देशों का अभूतपूर्व समर्थन
संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रस्ताव को 177 देशों ने सह-प्रायोजित किया। यह संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में सबसे अधिक समर्थन प्राप्त प्रस्तावों में से एक था।
विशेष बात यह थी कि समर्थन देने वाले देशों में शामिल थे—
- अमेरिका
- रूस
- चीन
- फ्रांस
- ब्रिटेन
- जापान
- जर्मनी
- ऑस्ट्रेलिया
- दक्षिण अफ्रीका
अर्थात दुनिया की लगभग हर प्रमुख शक्ति इस प्रस्ताव के साथ खड़ी दिखाई दी।
केवल 75 दिनों में मिली मंजूरी
संयुक्त राष्ट्र के इतिहास में आमतौर पर किसी प्रस्ताव को पारित होने में काफी समय लगता है। लेकिन योग दिवस के प्रस्ताव के साथ ऐसा नहीं हुआ।
27 सितंबर 2014 को प्रस्ताव रखा गया। 11 दिसंबर 2014 को संयुक्त राष्ट्र महासभा ने इसे आधिकारिक स्वीकृति दे दी। सिर्फ 75 दिनों के भीतर यह प्रस्ताव पारित हो गया। यह भी अपने आप में एक रिकॉर्ड था।
21 जून को ही क्यों चुना गया?
विश्व योग दिवस के लिए 21 जून की तारीख सोच-समझकर चुनी गई। 21 जून उत्तरी गोलार्ध में वर्ष का सबसे लंबा दिन होता है, जिसे “समर सोल्स्टिस” कहा जाता है। भारतीय आध्यात्मिक परंपरा में इस दिन का विशेष महत्व माना जाता है। योग परंपरा के अनुसार यह काल ऊर्जा, चेतना और आध्यात्मिक उन्नति का प्रतीक है। इसलिए 21 जून को योग दिवस के लिए सबसे उपयुक्त माना गया।
पहला विश्व योग दिवस: इतिहास बन गया
21 जून 2015 को दुनिया ने पहला अंतरराष्ट्रीय योग दिवस मनाया। भारत में नई दिल्ली के राजपथ पर विशाल योग कार्यक्रम आयोजित हुआ। हजारों लोगों ने एक साथ योगाभ्यास किया। 84 देशों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। यह आयोजन विश्व रिकॉर्ड में दर्ज हुआ और दुनिया भर के मीडिया की सुर्खियां बना।
योग बना भारत की सॉफ्ट पावर का सबसे बड़ा प्रतीक
अंतरराष्ट्रीय राजनीति में केवल सैन्य शक्ति या आर्थिक ताकत ही महत्वपूर्ण नहीं होती। एक देश की संस्कृति और विचार भी उसकी वैश्विक पहचान बनाते हैं। इसे “सॉफ्ट पावर” कहा जाता है। विश्व योग दिवस ने भारत की सॉफ्ट पावर को अभूतपूर्व मजबूती दी।
जिस प्रकार:
- जापान तकनीक से
- फ्रांस कला से
- इटली संस्कृति से
पहचाना जाता है, उसी प्रकार भारत की पहचान योग से और मजबूत हुई।
कोरोना महामारी ने बढ़ाया योग का महत्व
2020 में कोरोना महामारी के दौरान पूरी दुनिया मानसिक और शारीरिक संकट से जूझ रही थी। लॉकडाउन, तनाव और स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं के बीच लोगों ने योग की ओर रुख किया। ऑनलाइन योग कक्षाएं शुरू हुईं। प्राणायाम और ध्यान को लाखों लोगों ने अपनी दिनचर्या का हिस्सा बनाया। इस दौर ने योग की उपयोगिता को और अधिक स्थापित कर दिया।
आज का विश्व योग दिवस
आज योग दिवस केवल एक सरकारी कार्यक्रम नहीं है।
यह बन चुका है—
- स्वास्थ्य आंदोलन
- वैश्विक जनअभियान
- सांस्कृतिक उत्सव
- मानसिक स्वास्थ्य का संदेश
- मानव एकता का प्रतीक
दुनिया के करोड़ों लोग 21 जून को योग के माध्यम से स्वस्थ जीवन और आंतरिक संतुलन का संदेश देते हैं।
