नई दिल्ली [TV 47 न्यूज नेटवर्क ]। तमिलनाडु सरकार ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के उद्देश्य से एक अनोखी कल्याणकारी योजना शुरू की है। इस योजना के तहत सरकारी अस्पतालों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में जन्म लेने वाले नवजात शिशुओं को 1 ग्राम सोने की अंगूठी दी जाएगी। राज्य सरकार ने इस योजना का नाम ‘थाई मामन थंगा मोथिरम थिट्टम’ रखा है। योजना का औपचारिक शुभारंभ 28 सितंबर 2026 को किया गया। इसका उद्देश्य केवल उपहार देना नहीं, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर लोगों का भरोसा मजबूत करना और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देना है।
तमिलनाडु सरकार का कहना है कि यह योजना मातृत्व के सम्मान, नवजात शिशुओं के स्वागत और सरकारी चिकित्सा संस्थानों में प्रसव को प्रोत्साहित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
क्या है ‘थाई मामन थंगा मोथिरम’ का अर्थ?
तमिल संस्कृति में ‘थाई मामन’ यानी मां का भाई (मामा) नवजात शिशु को उपहार देने की परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। इसी सांस्कृतिक परंपरा से प्रेरित होकर सरकार ने इस योजना का नाम रखा है।
सरकार का संदेश है कि जिस प्रकार परिवार में मामा नवजात को आशीर्वाद और उपहार देता है, उसी तरह राज्य भी बच्चों के जन्म पर उनके भविष्य के प्रति अपनी जिम्मेदारी व्यक्त कर रहा है।
किसे मिलेगा योजना का लाभ?
योजना के तहत हर बच्चे को लाभ नहीं मिलेगा। इसके लिए कुछ शर्तें निर्धारित की गई हैं।
- बच्चा तमिलनाडु के सरकारी अस्पताल या सरकारी स्वास्थ्य संस्थान में जन्मा हो।
- बच्चे का जन्म 22 जून 2026 या उसके बाद हुआ हो।
- मां तमिलनाडु की स्थायी निवासी हो।
- गर्भावस्था का पंजीकरण PICME (Pregnancy and Infant Cohort Monitoring and Evaluation) प्रणाली में हुआ हो।
- मां के पास RCH (Reproductive and Child Health) पहचान संख्या हो।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि निजी अस्पतालों में जन्म लेने वाले बच्चों को इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा।
अंगूठी में क्या होगी खास बात?
योजना के तहत दी जाने वाली अंगूठी 1 ग्राम वजन की होगी। प्रत्येक अंगूठी पर विशिष्ट सीरियल नंबर अंकित होगा ताकि उसकी पहचान और ट्रैकिंग की जा सके। अंगूठियों को छेड़छाड़-रोधी पैकेजिंग में वितरित किया जाएगा।
सरकार का दावा है कि इससे वितरण प्रक्रिया पारदर्शी रहेगी और किसी प्रकार की अनियमितता की संभावना कम होगी।
कितने बच्चों को मिलेगा लाभ?
तमिलनाडु में हर वर्ष लगभग 7.8 लाख बच्चों का जन्म होता है। इनमें से लगभग 4.20 लाख प्रसव सरकारी अस्पतालों में होते हैं। सरकार का अनुमान है कि हर साल लाखों नवजात इस योजना से लाभान्वित होंगे।
पहले चरण के लिए लगभग 1.28 लाख सोने की अंगूठियां खरीदी गई हैं। इनका वितरण राज्यभर में स्थापित विशेष केंद्रों के माध्यम से किया जाएगा।
22 जून से जन्मे बच्चों को भी मिलेगा लाभ
योजना की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसका लाभ केवल लॉन्च के बाद जन्म लेने वाले बच्चों तक सीमित नहीं है। सरकार ने इसे 22 जून 2026 से प्रभावी माना है।
इसका मतलब है कि 22 जून से 28 सितंबर के बीच सरकारी अस्पतालों में जन्मे पात्र बच्चों को भी बाद में अंगूठियां दी जाएंगी। इसके लिए राज्यभर में 107 वितरण केंद्र बनाए गए हैं।
अस्पताल से छुट्टी के समय मिलेगी अंगूठी
योजना शुरू होने के बाद सरकारी अस्पतालों में जन्म लेने वाले पात्र बच्चों को अस्पताल से डिस्चार्ज के समय ही सोने की अंगूठी प्रदान की जाएगी।
इसके लिए अस्पतालों में विशेष भंडारण व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी और दोहरी सुरक्षा प्रणाली लागू की गई है। कई अस्पतालों में सुरक्षित लॉकर और निगरानी व्यवस्था स्थापित की गई है ताकि अंगूठियों का सुरक्षित वितरण सुनिश्चित किया जा सके।
परित्यक्त बच्चों को भी शामिल किया गया
तमिलनाडु सरकार ने बाद में योजना का दायरा बढ़ाते हुए सरकारी संस्थानों में छोड़े गए बच्चों को भी इसमें शामिल किया है।
‘थोट्टिल कुजंथई’ (क्रैडल बेबी) योजना के अंतर्गत सरकारी संरक्षण में आने वाले बच्चों को भी सोने की अंगूठी मिलेगी। ऐसे मामलों में जिला बाल संरक्षण अधिकारी अंगूठी प्राप्त करेंगे।
सरकार पर कितना आएगा खर्च?
राज्य सरकार ने इस योजना के लिए बड़े स्तर पर वित्तीय प्रावधान किया है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार योजना पर सालाना सैकड़ों करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। सरकार का तर्क है कि यह खर्च केवल एक सामाजिक उपहार नहीं बल्कि मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य में निवेश है।
राजनीतिक और सामाजिक चर्चा का विषय
योजना की घोषणा के बाद तमिलनाडु में इस पर व्यापक चर्चा हुई। समर्थकों का कहना है कि इससे सरकारी अस्पतालों में प्रसव को बढ़ावा मिलेगा और गरीब परिवारों को सम्मानजनक सहायता मिलेगी।
वहीं कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि योजना की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इससे वास्तव में संस्थागत प्रसव और स्वास्थ्य संकेतकों में कितना सुधार होता है। हालांकि सरकार का दावा है कि यह पहल मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करेगी।
सरकारी अस्पतालों पर भरोसा बढ़ाने की कोशिश
तमिलनाडु लंबे समय से देश के उन राज्यों में शामिल रहा है जहां मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं का प्रदर्शन अपेक्षाकृत बेहतर माना जाता है। सरकार का मानना है कि यह योजना लोगों को सरकारी अस्पतालों की ओर आकर्षित करेगी और सुरक्षित प्रसव की संख्या में वृद्धि करेगी
