नई दिल्ली [TV 47 न्यूज नेटवर्क ]। सितंबर का अंतिम सप्ताह देश के कई हिस्सों में भारी बारिश लेकर आया है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) के अनुसार उत्तर भारत, हिमालयी राज्यों और गंगा के मैदानी क्षेत्रों में मानसूनी गतिविधियां एक बार फिर तेज हुई हैं। उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश, जम्मू-कश्मीर और बिहार के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना जताई गई है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि सक्रिय मानसूनी ट्रफ और कम दबाव के क्षेत्रों के कारण अगले कुछ दिनों तक मौसम अस्थिर बना रह सकता है।
28 सितंबर का दिन विशेष रूप से उत्तर भारत के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही वर्षा नदियों और नालों का जलस्तर बढ़ा सकती है। इससे मैदानी इलाकों में भी बाढ़ जैसी स्थिति पैदा होने का खतरा बढ़ गया है।
उत्तर प्रदेश में कई जिलों पर नजर
उत्तर प्रदेश में पूर्वांचल और तराई क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित हो सकते हैं। मौसम विभाग के अनुसार पूर्वी और पश्चिमी दोनों हिस्सों में गरज-चमक के साथ वर्षा की संभावना बनी हुई है। लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, बस्ती, कुशीनगर, बलिया, अयोध्या, बहराइच और श्रावस्ती समेत कई जिलों में मध्यम से भारी बारिश दर्ज हो सकती है।
नेपाल से निकलने वाली नदियों के जलस्तर पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। घाघरा, राप्ती, शारदा और सरयू जैसी नदियों में जलस्तर बढ़ने की आशंका बनी हुई है। यदि पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार वर्षा होती है तो तराई के जिलों में बाढ़ का जोखिम बढ़ सकता है।
उत्तराखंड में सबसे अधिक खतरा
उत्तराखंड इस समय मौसम की दृष्टि से सबसे संवेदनशील राज्यों में शामिल है। मौसम विभाग ने कई जिलों में भारी से अत्यधिक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। देहरादून, टिहरी, रुद्रप्रयाग, चमोली, उत्तरकाशी, नैनीताल और पिथौरागढ़ जैसे जिलों में भूस्खलन की आशंका बढ़ गई है।
चारधाम यात्रा मार्गों पर भी प्रशासन की विशेष निगरानी बनी हुई है। लगातार बारिश के कारण पहाड़ी ढलानों से मलबा गिरने की घटनाएं बढ़ सकती हैं। कई छोटे नदी-नाले उफान पर आ सकते हैं। मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बारिश का सिलसिला जारी रहा तो फ्लैश फ्लड की स्थिति भी बन सकती है।
हिमाचल प्रदेश में भूस्खलन और सड़क अवरोध का खतरा
हिमाचल प्रदेश में भी 28 सितंबर को मौसम खराब रहने की संभावना है। शिमला, मंडी, कुल्लू, चंबा, कांगड़ा और सिरमौर जिलों में भारी बारिश का पूर्वानुमान है। राज्य में पहले भी मानसून के दौरान बड़े पैमाने पर भूस्खलन और सड़क क्षति देखने को मिली थी। ऐसे में प्रशासन सतर्क है।
विशेषज्ञों का कहना है कि लगातार नमी के कारण पहाड़ कमजोर हो चुके हैं। यदि भारी बारिश होती है तो राष्ट्रीय राजमार्गों और संपर्क मार्गों पर यातायात प्रभावित हो सकता है। पर्यटकों को भी मौसम अपडेट देखते रहने की सलाह दी गई है।
जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में भी मौसम सक्रिय
जम्मू-कश्मीर और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में भी मौसम विभाग ने वर्षा की संभावना जताई है। जम्मू संभाग के पर्वतीय क्षेत्रों और कश्मीर घाटी के कुछ हिस्सों में बारिश के साथ तेज हवाएं चल सकती हैं। ऊंचे इलाकों में तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकती है।
हालांकि यहां व्यापक बाढ़ की संभावना कम है, लेकिन पहाड़ी मार्गों पर भूस्खलन और पत्थर गिरने का खतरा बना रहेगा। यात्रियों को सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
बिहार और झारखंड में भी भारी वर्षा का असर
उत्तर भारत से जुड़े बिहार और झारखंड में भी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। बिहार के उत्तरी जिलों और झारखंड के कई हिस्सों में भारी वर्षा के कारण नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है। निचले इलाकों में जलभराव और कृषि क्षेत्रों में नुकसान की आशंका है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि बंगाल की खाड़ी से नमी लगातार मिलती रही तो पूर्वी भारत में वर्षा की तीव्रता बनी रह सकती है।
बाढ़ का खतरा किन क्षेत्रों में सबसे ज्यादा?
मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 28 सितंबर को सबसे अधिक जोखिम वाले क्षेत्र निम्न हो सकते हैं—
- उत्तराखंड के पर्वतीय जिले
- हिमाचल प्रदेश के भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र
- उत्तर प्रदेश का तराई और पूर्वांचल क्षेत्र
- बिहार की नेपाल सीमा से जुड़े जिले
- झारखंड और उत्तर बंगाल के कुछ इलाके
इन क्षेत्रों में स्थानीय प्रशासन को अलर्ट मोड पर रहने की सलाह दी गई है।
किसानों के लिए राहत और चुनौती दोनों
बारिश जहां खरीफ फसलों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है, वहीं अत्यधिक वर्षा कई स्थानों पर नुकसान भी पहुंचा सकती है। धान की तैयार फसल वाले क्षेत्रों में जलभराव किसानों की चिंता बढ़ा सकता है। दूसरी ओर भूजल स्तर और जलाशयों के भराव में यह वर्षा सहायक सिद्ध हो रही है।
क्या कहते हैं मौसम विशेषज्ञ?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार सितंबर के अंतिम दिनों में मानसून पूरी तरह कमजोर नहीं पड़ा है। सक्रिय मानसूनी ट्रफ, पश्चिमी विक्षोभ और नमी से भरी हवाओं के कारण उत्तर भारत में बारिश का दौर जारी है। आने वाले दिनों में कुछ क्षेत्रों में मौसम में सुधार हो सकता है, लेकिन पहाड़ी राज्यों और उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में सतर्कता बरतने की जरूरत बनी रहेगी
