प्रतापगढ़। प्रतापगढ़ और आसपास के जिलों के लाखों रामभक्त श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी सामने आई है। आगामी नवंबर 2026 में जिले में एक भव्य और दिव्य श्रीराम कथा का आयोजन होने जा रहा है, जिसमें विश्व प्रसिद्ध कथावाचक एवं बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री अपने श्रीमुख से रामकथा का रसपान कराएंगे। इस आयोजन की घोषणा कुंडा विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया ने की है। कथा के आयोजन को लेकर तैयारियां भी शुरू कर दी गई हैं और कथा स्थल का चयन कर उसका निरीक्षण भी किया जा चुका है।
राजा भैया ने बताया कि सनातन धर्म के प्रचार-प्रसार और भगवान श्रीराम के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से यह विशाल धार्मिक आयोजन किया जा रहा है। चार दिवसीय श्रीराम कथा का आयोजन 17, 18, 19 और 20 नवंबर 2026 को संपन्न होगा। कथा में देश के विभिन्न राज्यों से लाखों श्रद्धालुओं के पहुंचने की संभावना जताई जा रही है।
कथा स्थल का किया निरीक्षण
राजा भैया ने बताया कि इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन की तैयारियों का शुभारंभ कर दिया गया है। इसी क्रम में उन्होंने अपने छोटे पुत्र बृजराज प्रताप सिंह के साथ प्रस्तावित कथा स्थल का निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान आयोजन से जुड़ी व्यवस्थाओं का विस्तृत अवलोकन किया गया और अधिकारियों एवं आयोजकों को आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।
उन्होंने कहा कि आयोजन समिति का प्रयास रहेगा कि कथा में आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु को सुरक्षित, सुगम और आध्यात्मिक वातावरण प्राप्त हो। श्रद्धालुओं को किसी भी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सभी व्यवस्थाएं समय से पूरी कर ली जाएंगी।
छह माह पहले शुरू हुई व्यापक तैयारियां
राजा भैया ने बताया कि कथा में लाखों श्रद्धालुओं की संभावित उपस्थिति को देखते हुए लगभग छह माह पूर्व से ही व्यापक स्तर पर तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। आयोजन स्थल पर पार्किंग, यातायात नियंत्रण, पेयजल व्यवस्था, चिकित्सा सुविधाएं, सुरक्षा प्रबंधन, आवास व्यवस्था तथा अन्य आवश्यक सुविधाओं को सर्वोत्तम स्तर पर विकसित किया जाएगा।
विशेष रूप से महिला श्रद्धालुओं, बुजुर्गों और दिव्यांगजनों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए अलग-अलग व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जाएंगी। आयोजन समिति प्रशासन के साथ समन्वय स्थापित कर सभी आवश्यक प्रबंधों को अंतिम रूप देने में जुटी हुई है।
धार्मिक ही नहीं, सांस्कृतिक महाआयोजन भी
राजा भैया ने कहा कि यह आयोजन केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति, सनातन परंपरा और आध्यात्मिक मूल्यों के संरक्षण और प्रसार का भी एक बड़ा माध्यम है। उन्होंने कहा कि श्रीराम केवल एक धार्मिक आस्था के प्रतीक नहीं हैं, बल्कि मर्यादा, सत्य, त्याग, न्याय और आदर्श जीवन के प्रेरणास्रोत भी हैं।
ऐसे समय में जब समाज अनेक चुनौतियों का सामना कर रहा है, तब भगवान श्रीराम के जीवन से प्रेरणा लेकर समाज को सकारात्मक दिशा देने की आवश्यकता है। श्रीराम कथा के माध्यम से युवाओं और नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति और सनातन मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया जाएगा।
धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री की कथा सुनने उमड़ते हैं लाखों श्रद्धालु
बागेश्वर धाम सरकार के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री वर्तमान समय के सबसे चर्चित धार्मिक वक्ताओं में गिने जाते हैं। उनकी कथाओं और प्रवचनों में देश-विदेश से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। सनातन धर्म, राष्ट्र और भारतीय संस्कृति के प्रति उनके विचारों को सुनने के लिए लाखों लोग जुटते हैं।
प्रतापगढ़ में होने वाली यह कथा पूर्वांचल और अवध क्षेत्र के श्रद्धालुओं के लिए विशेष महत्व रखेगी। माना जा रहा है कि प्रयागराज, कौशांबी, रायबरेली, अमेठी, सुल्तानपुर, जौनपुर और आसपास के कई जिलों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु इस आयोजन में शामिल होंगे।
श्रद्धालुओं में उत्साह
राम कथा के आयोजन की घोषणा के बाद प्रतापगढ़ और आसपास के क्षेत्रों में श्रद्धालुओं के बीच उत्साह का माहौल है। सोशल मीडिया पर भी इस आयोजन की चर्चा शुरू हो गई है। कई धार्मिक संगठनों और सनातन प्रेमियों ने इस आयोजन का स्वागत करते हुए इसे क्षेत्र के लिए गौरव का विषय बताया है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर होने वाला यह धार्मिक आयोजन जिले की पहचान को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाएगा। साथ ही इससे स्थानीय व्यापार और पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सनातन महापर्व को सफल बनाने की अपील
राजा भैया ने सभी श्रद्धालुओं से इस दिव्य आयोजन में सपरिवार शामिल होने की अपील की है। उन्होंने कहा कि यह अवसर प्रभु श्रीराम और पवनपुत्र हनुमान जी की कृपा प्राप्त करने का माध्यम बनेगा। उन्होंने लोगों से आयोजन को सफल बनाने में सहयोग करने का भी आग्रह किया।
उन्होंने विश्वास जताया कि पूज्य धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के श्रीमुख से प्रवाहित होने वाली श्रीराम कथा लाखों श्रद्धालुओं के जीवन में आध्यात्मिक ऊर्जा, भक्ति और सकारात्मक परिवर्तन का संचार करेगी। नवंबर 2026 में होने वाला यह आयोजन प्रतापगढ़ के धार्मिक इतिहास में एक महत्वपूर्ण अध्याय के रूप में दर्ज होगा।
