नई दिल्ली [TV 47 न्यूज नेटवर्क ]। भारतीय सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे होते हैं जो केवल अपने अभिनय से नहीं बल्कि अपने व्यक्तित्व से भी अलग पहचान बनाते हैं। नाना पाटेकर ऐसे ही कलाकारों में शामिल हैं। उनकी आवाज, संवाद अदायगी, गुस्सैल लेकिन संवेदनशील किरदार और समाज के प्रति उनकी प्रतिबद्धता उन्हें बॉलीवुड के सबसे अलग अभिनेताओं में खड़ा करती है।
भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर से फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार गोवा में उन्हें गंभीर हृदयाघात (हार्ट अटैक) आया, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया।
कौन हैं नाना पाटेकर?
नाना पाटेकर का वास्तविक नाम विश्वनाथ पाटेकर है। उनका जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के मुरुड-जंजीरा में हुआ था। उन्होंने मुंबई के सर जे. जे. इंस्टीट्यूट ऑफ एप्लाइड आर्ट से शिक्षा प्राप्त की। अभिनय के साथ-साथ वे लेखक, निर्देशक और सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में भी जाने जाते हैं।
आज वे भारतीय सिनेमा के उन चुनिंदा कलाकारों में गिने जाते हैं जिन्होंने समान सफलता के साथ व्यावसायिक और गंभीर दोनों प्रकार की फिल्मों में काम किया।
बचपन का संघर्ष
नाना पाटेकर का जीवन शुरू से आसान नहीं था। आर्थिक कठिनाइयों का सामना करते हुए उन्होंने अपने शुरुआती दिन बिताए। परिवार पर वित्तीय संकट आने के बाद उन्हें कम उम्र में ही काम करना पड़ा।
कहा जाता है कि पढ़ाई के साथ-साथ उन्होंने छोटे-मोटे काम भी किए। संघर्ष के इन वर्षों ने उनके व्यक्तित्व को मजबूत बनाया और यही अनुभव बाद में उनके अभिनय में भी दिखाई दिया।
अभिनय की शुरुआत
नाना पाटेकर ने 1970 के दशक में अभिनय की शुरुआत की। शुरुआती दौर में उन्हें छोटे रोल मिले, लेकिन धीरे-धीरे उनकी प्रतिभा को पहचान मिलने लगी।
उनकी असली पहचान 1989 में आई फिल्म “परिंदा” से बनी। इस फिल्म में उनके अभिनय को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
वह अभिनेता जिसने अभिनय की परिभाषा बदल दी
नाना पाटेकर की सबसे बड़ी ताकत उनकी संवाद अदायगी है। वे संवाद बोलते नहीं, बल्कि उन्हें जीते हैं। “क्रांतिवीर”, “परिंदा”, “अंगार”, “अग्नि साक्षी”, “अब तक छप्पन”, “राजनीति”, “वेलकम” और “नटसम्राट” जैसी फिल्मों ने उन्हें भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली कलाकारों में शामिल कर दिया।
उनकी अभिनय शैली पारंपरिक बॉलीवुड अंदाज से अलग रही। यही कारण है कि उनके संवाद आज भी लोगों को याद हैं।
राष्ट्रीय पुरस्कार और सम्मान
नाना पाटेकर को कई प्रतिष्ठित पुरस्कार मिल चुके हैं। वे राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीतने वाले चुनिंदा अभिनेताओं में शामिल हैं।
उन्हें “परिंदा” के लिए राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। “क्रांतिवीर” के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। इसके अलावा अनेक फिल्मफेयर पुरस्कार भी उनके खाते में हैं। भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया।
सेना से जुड़ाव: कम लोग जानते हैं यह सच
नाना पाटेकर के जीवन का एक ऐसा पहलू भी है जिसके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं। वे प्रादेशिक सेना (Territorial Army) से जुड़े रहे। उन्होंने सैन्य प्रशिक्षण लिया और कारगिल युद्ध के दौरान भी सेना के साथ सहयोग किया। बाद में वे मानद लेफ्टिनेंट कर्नल के पद तक पहुंचे। यह उपलब्धि उन्हें बॉलीवुड के अधिकांश कलाकारों से अलग बनाती है।
किसानों के लिए समर्पित जीवन
यदि नाना पाटेकर के जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से किसी एक का उल्लेख किया जाए तो वह किसानों के लिए उनका काम है।
महाराष्ट्र में किसानों की आत्महत्या की घटनाओं ने उन्हें गहराई से प्रभावित किया। इसके बाद उन्होंने ‘नाम फाउंडेशन’ के माध्यम से किसानों की सहायता का अभियान शुरू किया। उन्होंने कई मौकों पर किसानों की आर्थिक मदद की और ग्रामीण क्षेत्रों में राहत कार्यों में भाग लिया।
नाना पाटेकर का संवेदनशील पक्ष
लोग अक्सर उन्हें गुस्सैल छवि वाले अभिनेता के रूप में देखते हैं, लेकिन उनके करीब रहने वाले लोग उन्हें बेहद संवेदनशील बताते हैं।
हाल ही में कई सहयोगियों ने बताया कि जरूरतमंदों की मदद के लिए वे हमेशा आगे आते हैं। एक लेखक ने यह भी दावा किया कि उन्होंने महंगी लग्जरी कार खरीदने के बजाय किसानों की मदद करना बेहतर समझा। उनकी मित्रता और मदद करने की प्रवृत्ति के कई किस्से फिल्म इंडस्ट्री में मशहूर हैं।
निजी जीवन की त्रासदियां
नाना पाटेकर के जीवन में कई व्यक्तिगत दुख भी आए। उनके परिवार में कई असमय निधन हुए। सबसे बड़ा आघात तब लगा जब उनके छोटे बेटे का कम उम्र में निधन हो गया। इस घटना ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया।
इन कठिन परिस्थितियों के बावजूद उन्होंने जीवन में आगे बढ़ना नहीं छोड़ा।
सादगी भरा जीवन
करोड़ों रुपये कमाने के बावजूद नाना पाटेकर अपनी सादगी के लिए जाने जाते हैं। फिल्मी पार्टियों और ग्लैमर से दूरी बनाए रखना उनकी पहचान रही है। वे अक्सर कहते हैं कि दिखावे की बजाय वास्तविक जीवन अधिक महत्वपूर्ण है।
उनकी जीवनशैली कई नए कलाकारों के लिए प्रेरणा मानी जाती है।
विवादों से भी रहा नाता
नाना पाटेकर का करियर विवादों से पूरी तरह अछूता नहीं रहा। कभी उनके बेबाक बयानों को लेकर चर्चा हुई तो कभी फिल्मी जगत के कुछ विवादों में उनका नाम सामने आया।
हालांकि इन सबके बावजूद उनकी अभिनय क्षमता और सामाजिक योगदान पर शायद ही किसी ने सवाल उठाया हो।
नाना पाटेकर के कुछ अनछुए पहलू
1. उनका असली नाम विश्वनाथ पाटेकर है
बहुत कम लोग जानते हैं कि नाना उनका स्क्रीन नाम है।
2. वे प्रशिक्षित कलाकार हैं
उन्होंने फाइन आर्ट्स और डिजाइन की शिक्षा प्राप्त की थी।
3. सेना से जुड़ाव
वे केवल अभिनेता नहीं, बल्कि सैन्य प्रशिक्षण प्राप्त व्यक्ति भी हैं।
4. किसानों के लिए विशेष लगाव
नाम फाउंडेशन के जरिए उन्होंने हजारों परिवारों तक सहायता पहुंचाई।
5. सादगी उनकी पहचान है
वे बॉलीवुड की चकाचौंध से दूरी बनाए रखने के लिए जाने जाते हैं।
आज भी क्यों प्रासंगिक हैं नाना पाटेकर?
आज के दौर में जब मनोरंजन उद्योग में चमक-दमक और प्रचार को सफलता का पैमाना माना जाता है, नाना पाटेकर अपनी सादगी, स्पष्टवादिता और अभिनय कौशल के कारण अलग पहचान रखते हैं। उनका जीवन बताता है कि संघर्ष, मेहनत और ईमानदारी से किसी भी ऊंचाई तक पहुंचा जा सकता है।
