मुंबई/गोवा [TV 47 न्यूज नेटवर्क ]। भारतीय सिनेमा के दिग्गज अभिनेता नाना पाटेकर के निधन की खबर से फिल्म जगत और उनके प्रशंसकों में शोक की लहर दौड़ गई है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार गोवा में उन्हें गंभीर हृदयाघात (हार्ट अटैक) आया, जिसके बाद उन्हें अस्पताल ले जाया गया, जहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। हालांकि इस संबंध में परिवार और आधिकारिक एजेंसियों की ओर से विस्तृत बयान की प्रतीक्षा की जा रही है।
नाना पाटेकर हिंदी और मराठी सिनेमा के उन चुनिंदा अभिनेताओं में शामिल थे जिन्होंने अपने दमदार अभिनय, प्रभावशाली संवाद अदायगी और अलग पहचान वाले किरदारों से करोड़ों दर्शकों के दिलों में जगह बनाई। उनका वास्तविक नाम विश्वनाथ पाटेकर था। उनका जन्म 1 जनवरी 1951 को महाराष्ट्र के मुरुड-जंजीरा में हुआ था।
संघर्ष से सफलता तक का सफर
नाना पाटेकर ने अपने करियर की शुरुआत 1978 में फिल्म “गमन” से की थी। शुरुआती दौर में उन्हें छोटे किरदार मिले, लेकिन उनकी प्रतिभा ने जल्द ही फिल्म जगत का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। 1989 में आई फिल्म “परिंदा” ने उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। इसके बाद “क्रांतिवीर”, “अंगार”, “अग्नि साक्षी”, “तिरंगा”, “अब तक छप्पन”, “वेलकम” और “राजनीति” जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को खूब सराहा गया।
राष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित अभिनेता
नाना पाटेकर उन दुर्लभ कलाकारों में रहे जिन्हें अभिनय के लिए कई राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त हुए। “परिंदा” के लिए सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता और “क्रांतिवीर” के लिए सर्वश्रेष्ठ अभिनेता का राष्ट्रीय पुरस्कार उन्हें मिला। इसके अलावा उन्हें अनेक फिल्मफेयर पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया। वर्ष 2013 में भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया।
केवल अभिनेता नहीं, समाजसेवी भी थे
नाना पाटेकर अपनी सादगी और समाजसेवा के लिए भी जाने जाते थे। महाराष्ट्र में किसानों की समस्याओं को लेकर उन्होंने लगातार आवाज उठाई और किसानों की मदद के लिए विभिन्न सामाजिक अभियानों से जुड़े रहे। यही कारण था कि वे केवल फिल्मी सितारे नहीं बल्कि समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने वाले नागरिक के रूप में भी पहचाने जाते थे।
सेना से भी रहा जुड़ाव
बहुत कम लोग जानते हैं कि नाना पाटेकर का जुड़ाव प्रादेशिक सेना (टेरिटोरियल आर्मी) से भी रहा। उन्हें मानद लेफ्टिनेंट कर्नल का सम्मान प्राप्त था। कारगिल युद्ध के दौरान भी उन्होंने सैनिकों के साथ समय बिताया और सेना के प्रति अपना सम्मान व्यक्त किया।
सिनेमा में हमेशा याद किए जाएंगे नाना
नाना पाटेकर की पहचान केवल एक अभिनेता के रूप में नहीं थी। उनकी आवाज, संवाद बोलने का अंदाज और किरदारों में जान डाल देने की क्षमता उन्हें अपने दौर के सबसे प्रभावशाली कलाकारों में शामिल करती है। “आ गए मेरी मौत का तमाशा देखने” और “ये मुसलमान का खून, ये हिंदू का खून…” जैसे संवाद आज भी दर्शकों की स्मृति में ताजा हैं।
उनके निधन से भारतीय सिनेमा ने एक ऐसे कलाकार को खो दिया है जिसने अभिनय को केवल पेशा नहीं बल्कि कला का सर्वोच्च रूप माना। उनके योगदान को आने वाली पीढ़ियां लंबे समय तक याद रखेंगी।
फिल्म उद्योग, राजनीतिक जगत और उनके प्रशंसकों की ओर से लगातार श्रद्धांजलियां दी जा रही हैं। नाना पाटेकर का जाना भारतीय सिनेमा के लिए एक अपूरणीय क्षति माना जा रहा है।
नाना पाटेकर की प्रमुख फिल्में
नाना पाटेकर ने चार दशक से अधिक लंबे करियर में कई यादगार किरदार निभाए। उनकी कुछ सबसे चर्चित और सफल फिल्में निम्न हैं:
| वर्ष | फिल्म | भूमिका/विशेषता |
|---|---|---|
| 1989 | परिंदा (Parinda) | गैंगस्टर की भूमिका, राष्ट्रीय पुरस्कार दिलाने वाली फिल्म |
| 1991 | प्रहार: द फाइनल अटैक | अभिनेता, लेखक और निर्देशक के रूप में पहचान |
| 1992 | अंगार (Angaar) | खलनायक की दमदार भूमिका |
| 1992 | राजू बन गया जेंटलमैन | शाहरुख खान के साथ यादगार किरदार |
| 1993 | तिरंगा (Tirangaa) | राजकुमार के साथ देशभक्ति फिल्म |
| 1994 | क्रांतिवीर (Krantiveer) | करियर की सबसे बड़ी फिल्मों में शामिल, राष्ट्रीय पुरस्कार प्राप्त |
| 1996 | अग्नि साक्षी (Agni Sakshi) | राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता प्रदर्शन |
| 1996 | खामोशी: द म्यूजिकल | भावनात्मक अभिनय के लिए सराही गई |
| 1997 | गुलाम-ए-मुस्तफा | अंडरवर्ल्ड पर आधारित चर्चित फिल्म |
| 1997 | यशवंत (Yeshwant) | ईमानदार पुलिस अधिकारी की भूमिका |
| 1998 | वजूद (Wajood) | मनोवैज्ञानिक ड्रामा |
| 1999 | हू तू तू (Hu Tu Tu) | गुलजार की चर्चित फिल्म |
| 2002 | शक्ति: द पावर | करिश्मा कपूर और संजय कपूर के साथ |
| 2004 | अब तक छप्पन (Ab Tak Chhappan) | एनकाउंटर स्पेशलिस्ट सदु आगाशे का किरदार |
| 2005 | अपहरण (Apaharan) | प्रकाश झा की चर्चित राजनीतिक फिल्म |
| 2006 | टैक्सी नंबर 9211 | जॉन अब्राहम के साथ दमदार अभिनय |
| 2007 | वेलकम (Welcome) | उदय शेट्टी का कॉमिक किरदार, आज भी लोकप्रिय |
| 2010 | राजनीति (Raajneeti) | राजनीति पर आधारित सुपरहिट फिल्म |
| 2011 | शागिर्द (Shagird) | पुलिस अधिकारी की भूमिका |
| 2013 | द अटैक्स ऑफ 26/11 | मुंबई हमलों की जांच पर आधारित फिल्म |
| 2015 | वेलकम बैक | उदय शेट्टी की वापसी |
| 2016 | नटसम्राट (Natsamrat) | मराठी सिनेमा की ऐतिहासिक फिल्म, आलोचकों की प्रशंसा |
| 2018 | काला (Kaala) | रजनीकांत के साथ खलनायक की भूमिका |
नाना पाटेकर की 10 सबसे यादगार फिल्में
- क्रांतिवीर
- परिंदा
- प्रहार
- अग्नि साक्षी
- खामोशी
- अब तक छप्पन
- अपहरण
- वेलकम
- राजनीति
- नटसम्राट
इन फिल्मों ने नाना पाटेकर को भारतीय सिनेमा के सबसे प्रभावशाली और बहुमुखी अभिनेताओं में शामिल किया। उनकी संवाद अदायगी, तीव्र अभिनय और अलग शैली ने उन्हें एक विशिष्ट पहचान दिलाई
