मेजा में पीड़ित परिवार के बीच पहुंचे पूर्व विधायक उदयभान करवरिया
प्रयागराज [TV 47 न्यूज नेटवर्क ]। प्रयागराज के मेजा थाना क्षेत्र के कुकुरकटवा गांव में हुए तिहरे हत्याकांड ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। एक ही परिवार के तीन लोगों की निर्मम हत्या के बाद गांव में मातम पसरा हुआ है। गांव का माहौल ऐसा है मानो हर घर इस दुख में शामिल हो। पुलिस और प्रशासन की तमाम कोशिशों के बावजूद पीड़ित परिवार अपने परिजनों का अंतिम संस्कार करने को तैयार नहीं था। परिवार की एक ही मांग थी—जब तक हत्यारों को कड़ी सजा का भरोसा नहीं मिलेगा, तब तक शवों का अंतिम संस्कार नहीं किया जाएगा।
घटना के बाद कुकुरकटवा गांव पुलिस छावनी में तब्दील हो गया। बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया। वरिष्ठ अधिकारी लगातार गांव में डेरा डाले रहे। स्वयं प्रयागराज पुलिस कमिश्नर ने मामले की कमान संभाल ली। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए घटना के कुछ घंटों के भीतर एक प्रमुख आरोपी को गिरफ्तार कर लिया। बताया गया कि भागने की कोशिश के दौरान आरोपी के पैर में गोली भी लगी। इसके बावजूद पीड़ित परिवार का गुस्सा और अविश्वास कम नहीं हुआ।
प्रशासन की कोशिशें नाकाम
जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी लगातार परिजनों को समझाने का प्रयास करते रहे। उन्हें भरोसा दिलाया गया कि दोषियों को बख्शा नहीं जाएगा और मामले की निष्पक्ष जांच होगी। लेकिन जिन लोगों ने अपने घर के तीन सदस्यों को खो दिया हो, उनके लिए केवल आश्वासन पर्याप्त नहीं था।
परिवार का दर्द इतना गहरा था कि वह किसी भी सरकारी दलील को सुनने के लिए तैयार नहीं था। गांव के लोग भी परिजनों के साथ खड़े थे और पूरे क्षेत्र में आक्रोश का माहौल था।
जब पहुंचे उदयभान करवरिया
ऐसे माहौल में भाजपा के पूर्व विधायक उदयभान करवरिया गांव पहुंचे। राजनीतिक रूप से यह एक सामान्य मुलाकात लग सकती थी, लेकिन जो हुआ उसने सभी को चौंका दिया।
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय लोगों के अनुसार उदयभान करवरिया ने पीड़ित परिवार से मुलाकात की, उनका दुख सुना और उन्हें भरोसा दिलाया कि न्याय जरूर मिलेगा। उन्होंने परिवार को ढांढस बंधाया और हर स्तर पर साथ खड़े रहने का आश्वासन दिया।
कहा जाता है कि जिस परिवार को प्रशासन और पुलिस घंटों समझाने में सफल नहीं हो पा रहे थे, वह उदयभान करवरिया के कुछ मिनटों के संवाद के बाद अंतिम संस्कार के लिए तैयार हो गया।
यही वजह है कि इस घटना की चर्चा अब केवल अपराध तक सीमित नहीं रह गई, बल्कि राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी इसका जिक्र हो रहा है।
आखिर क्यों इतना असरदार रहा यह भरोसा?
इस सवाल का जवाब मेजा क्षेत्र की राजनीति और सामाजिक संबंधों में छिपा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि उदयभान करवरिया को जो सम्मान मिला, उसके पीछे उनकी दिवंगत पत्नी और पूर्व विधायक नीलम करवरिया की वर्षों की मेहनत और जनता से जुड़ाव है।
नीलम करवरिया लंबे समय तक मेजा क्षेत्र की राजनीति का लोकप्रिय चेहरा रहीं। उन्होंने अपने कार्यकाल में क्षेत्र के लोगों के बीच मजबूत संबंध बनाए। ग्रामीणों के सुख-दुख में शामिल होना उनकी पहचान बन गया था। इसी कारण आज भी करवरिया परिवार के प्रति लोगों के मन में विशेष सम्मान दिखाई देता है।
नीलम करवरिया की लोकप्रियता आज भी चर्चा में
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी नेता की वास्तविक लोकप्रियता चुनावी मंचों पर नहीं, बल्कि जनता के दिलों में दिखाई देती है।
2024 में जब नीलम करवरिया का निधन हुआ था, तब उनके अंतिम दर्शन के लिए मेजा और आसपास के क्षेत्रों से लोग पहुंचे थे। उस समय लोगों की भीड़ ने यह संकेत दे दिया था कि क्षेत्र में उनका जनाधार कितना मजबूत था।
ग्रामीण आज भी उनके कार्यों और व्यवहार को याद करते हैं। यही कारण है कि उनके निधन के बाद भी करवरिया परिवार का सामाजिक प्रभाव कम नहीं हुआ।
राजनीति में नई चर्चा
कुकुरकटवा हत्याकांड के बाद उदयभान करवरिया की भूमिका अब राजनीतिक चर्चाओं का विषय बन गई है। राजनीतिक गलियारों में यह सवाल पूछा जा रहा है कि आखिर ऐसा क्या है कि आज भी क्षेत्र में करवरिया परिवार का प्रभाव इतना मजबूत बना हुआ है। कई लोगों का मानना है कि यह केवल राजनीतिक ताकत नहीं बल्कि वर्षों में अर्जित सामाजिक विश्वास का परिणाम है।
कुछ राजनीतिक पर्यवेक्षकों का कहना है कि यह घटना बताती है कि क्षेत्रीय राजनीति में व्यक्तिगत संबंध और जनविश्वास अभी भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
गांव में अब भी है तनाव
हालांकि परिवार अंतिम संस्कार के लिए तैयार हो गया है, लेकिन गांव में तनाव पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। लोग चाहते हैं कि सभी आरोपियों की जल्द गिरफ्तारी हो और उन्हें कड़ी सजा मिले। पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है और मामले की जांच तेज कर दी गई है। वरिष्ठ अधिकारी स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।
न्याय की उम्मीद
कुकुरकटवा गांव के लोग अब न्याय का इंतजार कर रहे हैं। परिवार का कहना है कि उनके लिए सबसे बड़ी सांत्वना तभी होगी जब दोषियों को सजा मिलेगी।
इस बीच उदयभान करवरिया की पहल ने कम से कम इतना जरूर किया कि शोक और आक्रोश के बीच फंसा परिवार अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी करने के लिए तैयार हुआ।
