मेजा संवाददाता, प्रयागराज। मेजा तहसील के डोहरिया ग्राम सभा स्थित भृंगारी गांव में उस समय खुशी की लहर दौड़ गई जब एसडीएम मेजा ने गांव को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाले प्रस्तावित सड़क मार्ग पर किए गए अवैध अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई करते हुए रास्ता साफ कराने की पहल की। प्रशासन की इस कार्रवाई से ग्रामीणों को पहली बार यह भरोसा जगा है कि उनकी दशकों पुरानी सड़क की मांग अब पूरी हो सकती है।
भृंगारी गांव लंबे समय से बुनियादी सुविधाओं की कमी से जूझ रहा है। गांव के लोगों का कहना है कि आजादी के बाद से लेकर अब तक गांव के अंदर तक पहुंचने के लिए कोई समुचित सड़क मार्ग विकसित नहीं हो सका। स्थिति यह है कि गांव तक कोई चारपहिया वाहन आसानी से नहीं पहुंच पाता। आपातकालीन परिस्थितियों में मरीजों को गांव से बाहर तक पैदल या अस्थायी साधनों से ले जाना पड़ता है।
सत्य साबित हुआ कोटेदार पर कब्जे का आरोप
ग्रामीणों के अनुसार परानीपुर मुख्य मार्ग से गांव को जोड़ने के लिए राजस्व अभिलेखों में चकरोड दर्ज है, लेकिन वर्षों से उस पर प्रभावशाली लोगों द्वारा अतिक्रमण कर लिया गया है। आरोप है कि कुछ लोगों ने चकरोड की भूमि पर स्थायी निर्माण तक कर लिया, जिसके कारण सार्वजनिक मार्ग पूरी तरह अवरुद्ध हो गया।
ग्रामीणों की लगातार शिकायतों के बाद एसडीएम मेजा ने मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण किया। राजस्व अभिलेखों और स्थल की वास्तविक स्थिति का मिलान करने पर पाया गया कि सार्वजनिक उपयोग की भूमि पर निर्माण मौजूद है। निरीक्षण के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण भी मौके पर मौजूद रहे और उन्होंने अपनी समस्याओं को प्रशासन के सामने रखा।
निरीक्षण के दौरान पाया गया कि जिस भूमि का उपयोग सार्वजनिक मार्ग के रूप में होना चाहिए था, उसके एक हिस्से पर स्थानीय कोटेदार का कब्जा है। इसके बाद एसडीएम ने संबंधित लोगों को कड़ी चेतावनी दी और अवैध कब्जे को हटाने के निर्देश जारी किए।प्रशासन की इस सक्रियता ने ग्रामीणों के बीच नया विश्वास पैदा किया है।
एडीएम ने दी कोटेदार को सख्त चेतावनी
ग्रामीणों का आरोप है कि विवादित भूखंड पर एक कोटेदार का कब्जा है। राजस्व विभाग द्वारा भू खंड की जांच के बाद यह आरोप सही पाया। उसके बाद एसडीएम श्रीमती नीलम उपध्याय ने निरीक्षण के दौरान संबंधित व्यक्ति को कड़ी चेतावनी देते हुए दस दिनों के भीतर स्वयं अवैध निर्माण हटाने का निर्देश दिया है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि निर्धारित समय सीमा में निर्माण नहीं हटाया गया तो नियमानुसार कार्रवाई करते हुए अतिक्रमण हटाया जाएगा।
एसडीएम की इस सख्ती को ग्रामीण प्रशासन की सकारात्मक पहल के रूप में देख रहे हैं। उनका मानना है कि लंबे समय बाद किसी अधिकारी ने मौके पर पहुंचकर वास्तविक स्थिति को समझा और समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाया है।
ग्रामीणों ने बताया कि सड़क के अभाव में बच्चों की शिक्षा, खेती-किसानी, स्वास्थ्य सेवाएं और सामाजिक कार्यक्रम तक प्रभावित होते हैं। गांव में किसी की तबीयत खराब होने पर एम्बुलेंस तक नहीं पहुंच पाती। बरसात के दिनों में हालात और अधिक कठिन हो जाते हैं।
सड़क बनने से बदल जाएगी गांव की तस्वीर
ग्रामीणों का कहना है कि यदि परानीपुर मुख्य मार्ग से भृंगारी गांव तक सड़क का निर्माण हो जाता है तो गांव की तस्वीर पूरी तरह बदल जाएगी। किसानों को अपनी उपज बाजार तक पहुंचाने में आसानी होगी। स्कूल जाने वाले बच्चों को बेहतर आवागमन सुविधा मिलेगी। स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ेगी और गांव का सामाजिक एवं आर्थिक विकास तेज होगा।
गांव के बुजुर्ग बताते हैं कि कई पीढ़ियां सड़क की मांग करते-करते गुजर गईं, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया। अब प्रशासनिक कार्रवाई से उन्हें उम्मीद की नई किरण दिखाई दे रही है।
ग्रामीणों में खुशी का माहौल
एसडीएम के आदेश के बाद गांव में चर्चा का विषय केवल सड़क मार्ग ही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रशासन अपने निर्णय पर दृढ़ रहा तो जल्द ही गांव का दशकों पुराना सपना साकार हो जाएगा।
महिलाओं का कहना है कि सड़क बनने से सबसे अधिक लाभ बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों को मिलेगा। वहीं युवाओं का मानना है कि बेहतर सड़क संपर्क से रोजगार और व्यापार के अवसर भी बढ़ेंगे।
सार्वजनिक भूमि पर कब्जे के खिलाफ बड़ा संदेश
प्रशासन की इस कार्रवाई को केवल एक गांव की सड़क तक सीमित नहीं माना जा रहा है। यह कदम सार्वजनिक भूमि और चकरोड पर अवैध कब्जों के खिलाफ भी एक मजबूत संदेश माना जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि सरकारी भूमि पर कब्जे के कारण अनेक गांवों में विकास कार्य प्रभावित होते हैं। यदि प्रशासन इसी प्रकार सक्रिय रहे तो कई अन्य गांवों की समस्याएं भी दूर हो सकती हैं।
उम्मीदों की राह पर भृंगारी
फिलहाल भृंगारी गांव के लोगों की निगाहें अगले दस दिनों पर टिकी हैं। वे चाहते हैं कि प्रशासनिक आदेश का पालन हो और अतिक्रमण हटने के बाद सड़क निर्माण का कार्य शुरू किया जाए। दशकों से बंद पड़े रास्ते के खुलने की संभावना ने गांव में नई ऊर्जा और उम्मीद का संचार किया है।
ग्रामीणों का विश्वास है कि यदि यह सड़क बन गई तो आने वाली पीढ़ियां उस संघर्ष को केवल कहानी के रूप में सुनेंगी, जिसे उनके पूर्वजों ने वर्षों तक झेला था।
