लखनऊ [TV 47 न्यूज नेटवर्क ]। उत्तर प्रदेश के करोड़ों लोगों को आखिरकार मानसून का इंतजार खत्म होता दिखाई दे रहा है। जून महीने के अधिकांश दिनों में भीषण गर्मी और लू का सामना करने के बाद अब भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने राज्य में मानसून की स्थिति को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार, दक्षिण-पश्चिम मानसून ने उत्तर प्रदेश में प्रवेश कर लिया है और अगले 24 से 48 घंटों में इसका प्रभाव राज्य के अधिकांश हिस्सों में दिखाई देने लगेगा।
हालांकि मानसून की एंट्री की खबर राहत देने वाली है, लेकिन मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि केवल मानसून का पहुंचना ही पर्याप्त नहीं है। असली सवाल यह है कि मानसून कितना सक्रिय रहेगा और जुलाई में कितनी बारिश होगी। क्योंकि इस बार मानसून की प्रगति सामान्य वर्षों की तुलना में धीमी रही है।
उत्तर प्रदेश में मानसून की एंट्री कब हुई?
IMD के ताजा अपडेट के अनुसार, उत्तर प्रदेश में मानसून की आधिकारिक एंट्री जून के अंतिम सप्ताह में हुई। मौसम विभाग ने पहले 27 जून से 30 जून के बीच मानसून के प्रवेश की संभावना जताई थी। बाद में मानसून ने पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश के कई जिलों में दस्तक दे दी।
मौसम विभाग का कहना है कि गोरखपुर, प्रयागराज, वाराणसी, आजमगढ़, बलिया, देवरिया और आसपास के क्षेत्रों में मानसूनी गतिविधियां तेज हुई हैं। इसके बाद यह धीरे-धीरे पश्चिमी जिलों की ओर बढ़ रहा है।
इस बार मानसून में देरी क्यों हुई?
सामान्य तौर पर दक्षिण-पश्चिम मानसून जून के अंतिम सप्ताह तक उत्तर प्रदेश के अधिकांश हिस्सों को कवर कर लेता है। लेकिन 2026 में मानसून की गति कई बार धीमी पड़ी। मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार इसके पीछे प्रमुख कारण हैं:
1. एल नीनो का प्रभाव
प्रशांत महासागर में विकसित हो रही एल नीनो जैसी परिस्थितियों ने मानसून की गति को प्रभावित किया। एल नीनो के दौरान भारत में सामान्य से कम बारिश होने की आशंका बढ़ जाती है।
2. मानसूनी हवाओं की कमजोर रफ्तार
जून के शुरुआती और मध्य हिस्से में मानसूनी हवाओं की रफ्तार कमजोर रही। इससे मानसून की प्रगति रुक-रुककर हुई।
3. पश्चिमी विक्षोभ और गर्म हवाएं
उत्तर भारत में लगातार सक्रिय पश्चिमी विक्षोभ और लू जैसी परिस्थितियों ने भी मानसून की प्रगति को प्रभावित किया।
किन जिलों में होगी सबसे ज्यादा बारिश?
IMD के अनुसार पूर्वी और मध्य उत्तर प्रदेश में सबसे पहले व्यापक बारिश देखने को मिल सकती है।
पूर्वी यूपी
- गोरखपुर
- कुशीनगर
- देवरिया
- बलिया
- मऊ
- आजमगढ़
- वाराणसी
- गाजीपुर
इन जिलों में गरज-चमक के साथ मध्यम से भारी बारिश की संभावना है।
मध्य यूपी
- लखनऊ
- रायबरेली
- अमेठी
- सुल्तानपुर
- प्रतापगढ़
- बाराबंकी
- उन्नाव
इन क्षेत्रों में भी अगले कुछ दिनों में अच्छी वर्षा की उम्मीद है।
पश्चिमी यूपी
- मेरठ
- गाजियाबाद
- नोएडा
- बागपत
- सहारनपुर
- मुजफ्फरनगर
पश्चिमी जिलों में मानसून थोड़ी देरी से पहुंचेगा लेकिन जुलाई के पहले सप्ताह में बारिश की गतिविधियां बढ़ सकती हैं।
किसानों के लिए कितनी राहत?
उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था में कृषि का महत्वपूर्ण स्थान है। धान, मक्का, बाजरा, दलहन और तिलहन जैसी खरीफ फसलें मानसून पर निर्भर करती हैं।
जून में बारिश की कमी के कारण कई क्षेत्रों में बुवाई प्रभावित हुई थी। अब मानसून की सक्रियता बढ़ने से किसानों को राहत मिलने की उम्मीद है।
विशेषज्ञों के अनुसार:
- धान की रोपाई में तेजी आएगी।
- भूजल स्तर में सुधार होगा।
- सिंचाई लागत कम हो सकती है।
- पशुपालकों को भी राहत मिलेगी।
हालांकि यदि जुलाई में बारिश सामान्य से कम रहती है तो कृषि क्षेत्र पर दबाव बना रह सकता है।
जुलाई में कैसा रहेगा मौसम?
IMD ने जुलाई को लेकर मिश्रित संकेत दिए हैं। विभाग के अनुसार जुलाई में देशभर में सामान्य से कम वर्षा होने की आशंका है। जून पहले ही काफी शुष्क रहा है और जुलाई में भी बारिश औसत से कम रह सकती है।
फिर भी मौसम विभाग का मानना है कि जुलाई के शुरुआती दिनों में उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में अच्छी बारिश हो सकती है जिससे शुरुआती कमी की कुछ भरपाई हो सकेगी।
लखनऊ में कब होगी झमाझम बारिश?
राजधानी लखनऊ में पिछले कई दिनों से बादलों की आवाजाही बनी हुई थी। मौसम विभाग के अनुसार मानसून के सक्रिय होने के साथ शहर में रुक-रुककर बारिश और तेज हवाओं का दौर शुरू हो सकता है।
लखनऊ समेत आसपास के जिलों में:
- तापमान में गिरावट आएगी।
- उमस बढ़ सकती है।
- गरज-चमक के साथ बारिश होगी।
- कुछ स्थानों पर जलभराव की स्थिति बन सकती है।
क्या बाढ़ का खतरा भी बढ़ेगा?
मानसून के सक्रिय होते ही पूर्वी उत्तर प्रदेश के कई नदी तटीय जिलों में बाढ़ की आशंका भी बढ़ जाती है।
विशेष रूप से:
- गोरखपुर
- बलिया
- कुशीनगर
- देवरिया
- महाराजगंज
जैसे जिलों में प्रशासन लगातार निगरानी रख रहा है। हालांकि फिलहाल मौसम विभाग ने बड़े पैमाने पर बाढ़ जैसी स्थिति की चेतावनी नहीं दी है।
मौसम विभाग की लोगों को सलाह
IMD ने बारिश और आकाशीय बिजली को देखते हुए लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी है।
जरूरी सावधानियां
- बिजली चमकने के दौरान खुले मैदान में न रहें।
- पेड़ों के नीचे खड़े होने से बचें।
- जलभराव वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतें।
- किसानों को मौसम अपडेट पर नजर रखनी चाहिए।
- तेज हवाओं के दौरान कमजोर ढांचों से दूर रहें।
