लखनऊ [TV 47 न्यूज नेटवर्क ]। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ सोमवार को एक दर्दनाक हादसे का गवाह बनी। अलीगंज इलाके में स्थित एक व्यावसायिक भवन में लगी भीषण आग ने देखते ही देखते कई जिंदगियां निगल लीं। इस हादसे में कम से कम 15 लोगों की मौत हो गई, जिनमें अधिकांश छात्र बताए जा रहे हैं। कई अन्य लोग घायल हुए हैं और उनका इलाज विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है। घटना के बाद पूरे प्रदेश में शोक की लहर फैल गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपना कार्यक्रम बीच में छोड़कर लखनऊ पहुंचकर हालात का जायजा लिया और उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए।
कैसे हुआ हादसा?
प्राप्त जानकारी के अनुसार, लखनऊ के अलीगंज क्षेत्र में स्थित एक तीन मंजिला व्यावसायिक भवन में दोपहर लगभग तीन बजे अचानक आग लग गई। भवन में एक कोचिंग सेंटर, एनीमेशन प्रशिक्षण संस्थान, गेमिंग जोन, पेट क्लिनिक और अन्य दुकानें संचालित हो रही थीं। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक आग तेजी से फैली और कुछ ही मिनटों में पूरे परिसर को धुएं और लपटों ने अपनी चपेट में ले लिया।
आग लगने के समय भवन में बड़ी संख्या में छात्र मौजूद थे। अचानक फैले धुएं और आग की वजह से लोगों को बाहर निकलने का मौका नहीं मिला। कई छात्र और कर्मचारी ऊपरी मंजिलों पर फंस गए। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, कुछ लोगों ने जान बचाने के लिए पहली मंजिल और छत से छलांग लगा दी। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कई लोग खिड़कियों से बाहर निकलने की कोशिश करते दिखाई दिए।
आग लगने की वजह क्या थी?
हादसे के वास्तविक कारण का अभी तक आधिकारिक खुलासा नहीं हुआ है। प्रशासन और फायर विभाग ने जांच शुरू कर दी है। शुरुआती आशंका है कि आग शॉर्ट सर्किट या किसी तकनीकी खराबी के कारण लगी हो सकती है, लेकिन इसकी पुष्टि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही होगी। अधिकारियों ने कहा है कि भवन में फायर सेफ्टी मानकों का पालन हुआ था या नहीं, इसकी भी जांच की जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि व्यावसायिक भवनों में संचालित कोचिंग सेंटरों और प्रशिक्षण संस्थानों में फायर सेफ्टी व्यवस्था की नियमित जांच न होना बड़ी समस्या बनती जा रही है। इस हादसे ने एक बार फिर सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
बचाव अभियान कैसे चला?
हादसे की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड, पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों की कई टीमें मौके पर पहुंचीं। इमारत के भीतर घना धुआं भर जाने के कारण राहत और बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया। कई लोगों को पास की इमारतों की छतों के माध्यम से सुरक्षित बाहर निकाला गया। कुछ स्थानों पर फायर कर्मियों को दीवार तोड़कर अंदर पहुंचना पड़ा।
अधिकारियों के अनुसार कई घायलों को तत्काल किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (केजीएमयू) और अन्य अस्पतालों में भर्ती कराया गया। बचाव अभियान घंटों तक चला और उसके बाद ही आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने क्या कहा?
हादसे के समय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अलीगढ़ में एक सरकारी कार्यक्रम में मौजूद थे। जैसे ही उन्हें घटना की जानकारी मिली, उन्होंने अपना कार्यक्रम छोटा किया और तुरंत लखनऊ लौट आए। उन्होंने हादसे को “अत्यंत दुखद और हृदयविदारक” बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि:
“लखनऊ में अग्निकांड में हुई जनहानि अत्यंत दुखद एवं हृदय विदारक है। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी संवेदनाएं हैं।”
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि घायलों को सर्वोत्तम चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता दी जाए। साथ ही घटना की उच्च स्तरीय जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के आदेश भी दिए।
घटनास्थल पर पहुंचे मुख्यमंत्री
लखनऊ पहुंचने के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अलीगंज स्थित घटनास्थल का दौरा किया। उनके साथ उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक तथा वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने राहत एवं बचाव कार्यों की समीक्षा की और अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट मांगी।
उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने भी कहा कि पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच होगी और दोषियों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने भी जताया दुख
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने भी इस हादसे पर गहरा दुख व्यक्त किया। प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी संदेश में मृतकों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त की गई। साथ ही प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से मृतकों के परिजनों को दो-दो लाख रुपये तथा घायलों को 50 हजार रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की गई।
फायर सेफ्टी पर उठे सवाल
यह हादसा केवल एक दुर्घटना नहीं बल्कि शहरी सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा प्रश्नचिह्न भी है। विशेषज्ञों का कहना है कि कोचिंग सेंटरों और व्यावसायिक भवनों में फायर सेफ्टी ऑडिट नियमित रूप से होना चाहिए। उत्तर प्रदेश सरकार पहले भी अग्निशमन सेवाओं के आधुनिकीकरण और विशेष फायर यूनिट बनाने की दिशा में कदम उठा चुकी है, लेकिन यह हादसा बताता है कि जमीनी स्तर पर अभी बहुत काम किए जाने की आवश्यकता है।
