लखनऊ [TV 47 न्यूज नेटवर्क ]। उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी और समाजवादी पार्टी के बीच आरोप-प्रत्यारोप तेज होते दिखाई दे रहे हैं। शनिवार, 17 अक्टूबर 2026 को लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के पांचवें दीक्षांत समारोह में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में प्रदेश की पिछली सरकारों, कानून-व्यवस्था, महिला गरिमा, स्वच्छता अभियान और विकास के मुद्दों को उठाया। समारोह का आयोजन विद्यार्थियों को उपाधियां और पदक प्रदान करने के लिए किया गया था। उपलब्ध कार्यक्रम संबंधी रिपोर्टों के मुताबिक, इसमें 260 विद्यार्थियों और शोधार्थियों को डिग्रियां दी जानी थीं।
डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में योगी आदित्यनाथ का संबोधन शैक्षणिक आयोजन से आगे बढ़कर उत्तर प्रदेश की राजनीतिक बहस से भी जुड़ा रहा। कानून-व्यवस्था, स्वच्छता, महिला गरिमा, माफिया के खिलाफ कार्रवाई और विकास के दावों के जरिए मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार की प्राथमिकताओं को सामने रखा और पिछली समाजवादी पार्टी सरकारों पर निशाना साधा।
लेकिन 2027 के चुनाव में इन दावों की परीक्षा केवल भाषणों से नहीं होगी। मतदाता यह देखेंगे कि कानून का राज कितना प्रभावी है, योजनाओं का लाभ किसे मिला, रोजगार के अवसर कितने बढ़े, महिलाओं की सुरक्षा में कितना सुधार हुआ और विकास का फायदा समाज के अलग-अलग वर्गों तक कितना पहुंचा।
‘बीमारू राज्य’ से ‘टॉप थ्री’ तक पहुंचने का दावा
योगी आदित्यनाथ ने उत्तर प्रदेश को पहले की स्थिति से निकालकर देश के अग्रणी राज्यों में शामिल होने की बात कही। आपके दिए गए विवरण के मुताबिक, उन्होंने कहा कि प्रदेश अब ‘बीमारू राज्य’ की छवि से बाहर निकलकर ‘टॉप थ्री’ में शामिल है।
‘बीमारू राज्य’ शब्द का इस्तेमाल लंबे समय तक उन राज्यों के लिए किया जाता रहा, जहां विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, आर्थिक अवसर और सामाजिक संकेतकों में अपेक्षाकृत पिछड़ापन था। उत्तर प्रदेश की विशाल आबादी और क्षेत्रीय असमानताओं के कारण राज्य के विकास का आकलन कई स्तरों पर करना पड़ता है।
भाजपा सरकार निवेश, एक्सप्रेसवे, औद्योगिक परियोजनाओं, बिजली आपूर्ति, कानून-व्यवस्था और बुनियादी ढांचे को अपनी उपलब्धियों के रूप में प्रस्तुत करती है। सरकार का तर्क है कि इन क्षेत्रों में सुधार से उत्तर प्रदेश की आर्थिक क्षमता और निवेशकों का भरोसा बढ़ा है।
दूसरी ओर, प्रदेश की वास्तविक प्रगति को समझने के लिए प्रति व्यक्ति आय, बेरोजगारी, गुणवत्तापूर्ण रोजगार, स्वास्थ्य सेवाओं, स्कूलों में शिक्षा के स्तर, किसानों की आय और ग्रामीण-शहरी अंतर जैसे संकेतकों को भी देखना चाहिए।
‘टॉप थ्री’ का दावा किस विशेष मानक या रैंकिंग पर आधारित है, यह स्पष्ट होना जरूरी है। आर्थिक विकास, औद्योगिक निवेश, सकल राज्य घरेलू उत्पाद, प्रति व्यक्ति आय और मानव विकास अलग-अलग पैमाने हैं। एक क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन का अर्थ यह नहीं कि सभी क्षेत्रों में राज्य समान रूप से शीर्ष पर पहुंच गया है।
इसलिए मुख्यमंत्री के दावे का तथ्यात्मक मूल्यांकन करने के लिए यह जानना आवश्यक है कि तुलना किन राज्यों से और किन आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर की गई है।
अतीक अहमद का जिक्र और माफिया के खिलाफ कार्रवाई
मुख्यमंत्री के संबोधन में अतीक अहमद का उल्लेख भी हुआ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में अतीक अहमद का नाम अपराध, जमीन पर कथित अवैध कब्जे और माफिया नेटवर्क के आरोपों से जुड़ा रहा है। उनके खिलाफ कई आपराधिक मामले दर्ज रहे और उनकी गतिविधियां लंबे समय तक राजनीतिक बहस का हिस्सा बनी रहीं।
योगी आदित्यनाथ सरकार ने माफिया के खिलाफ कार्रवाई को अपनी कानून-व्यवस्था नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया है। सरकार की ओर से अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई, संपत्तियों की जब्ती और ध्वस्तीकरण जैसे कदमों को अपराध के नेटवर्क पर प्रहार के रूप में पेश किया जाता है।
अतीक अहमद का संदर्भ उठाकर मुख्यमंत्री ने अपनी सरकार के उस राजनीतिक संदेश को दोहराया, जिसमें माफिया के प्रभाव को समाप्त करने और सरकारी जमीन को जनहित में इस्तेमाल करने पर जोर दिया जाता है। इससे पहले भी योगी सरकार ने प्रयागराज में कथित माफिया कब्जे से मुक्त कराई गई जमीन पर गरीबों, दलितों और वंचित वर्गों के लिए बहुमंजिला आवास बनाने की योजना का उल्लेख किया है।
महिला गरिमा और सुरक्षा का मुद्दा
योगी आदित्यनाथ ने महिला गरिमा पर काम करने का भी उल्लेख किया। उत्तर प्रदेश की राजनीति में महिलाओं की सुरक्षा, पुलिस में शिकायत दर्ज कराने की प्रक्रिया, महिला हेल्पलाइन, मिशन शक्ति और सार्वजनिक स्थानों पर सुरक्षा जैसे मुद्दे लगातार चर्चा में रहे हैं।
भाजपा सरकार महिला सुरक्षा को अपनी प्रमुख उपलब्धियों में गिनाती है। सरकार की ओर से पुलिस व्यवस्था, महिला हेल्प डेस्क, मिशन शक्ति और अपराध नियंत्रण से जुड़े कदमों का उल्लेख किया जाता है। दूसरी ओर, विपक्ष महिलाओं के खिलाफ अपराधों, मामलों में कार्रवाई की गति और पीड़ितों को न्याय मिलने में देरी जैसे प्रश्न उठाता रहा है।
इसलिए 2027 के चुनाव में यह मुद्दा केवल आरोप-प्रत्यारोप का विषय नहीं होगा। मतदाता यह भी देखेंगे कि महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने, अपराध की शिकायतों पर कार्रवाई करने और न्याय तक पहुंच आसान बनाने के लिए कौन-सी व्यवस्थाएं प्रभावी साबित हुई हैं।
