नई दिल्ली [TV 47 न्यूज नेटवर्क ]। अगर आप अपनी कार, बाइक या अन्य वाहन लेकर पेट्रोल पंप पर जा रहे हैं और आपके पास वैध पॉल्यूशन अंडर कंट्रोल (PUC) सर्टिफिकेट नहीं है, तो आपको खाली हाथ लौटना पड़ सकता है। दिल्ली-एनसीआर में लागू किए जा रहे “नो PUC, नो फ्यूल” अभियान के तहत बिना वैध PUC प्रमाणपत्र वाले वाहनों को पेट्रोल, डीजल, CNG और LPG देने पर रोक लगाई जा रही है। प्रशासन का दावा है कि यह कदम बढ़ते वायु प्रदूषण पर नियंत्रण पाने और प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों पर अंकुश लगाने के लिए उठाया गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि वाहन प्रदूषण दिल्ली-एनसीआर की खराब वायु गुणवत्ता का एक बड़ा कारण है। ऐसे में सरकार और प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियां अब केवल जागरूकता तक सीमित नहीं रहना चाहतीं, बल्कि नियमों को सख्ती से लागू करने की तैयारी कर रही हैं।
क्या है “नो PUC, नो फ्यूल” नियम?
नए प्रावधान के अनुसार जिन वाहनों के पास वैध Pollution Under Control Certificate नहीं होगा, उन्हें पेट्रोल पंपों पर ईंधन नहीं दिया जाएगा। पेट्रोल पंपों पर वाहन नंबर की जांच और PUC सत्यापन की व्यवस्था की जा रही है। कई स्थानों पर Automatic Number Plate Recognition (ANPR) कैमरे लगाए गए हैं, जो वाहन का विवरण रिकॉर्ड कर सकेंगे।
दिल्ली सरकार पहले ही इस व्यवस्था को लागू कर चुकी है और अब एनसीआर के कई क्षेत्रों में इसे सख्ती से लागू करने की तैयारी की जा रही है। नोएडा और गाजियाबाद में भी 1 अक्टूबर से बिना वैध PUC वाले वाहनों को पेट्रोल और डीजल नहीं देने का फैसला लागू किया गया है।
आखिर PUC होता क्या है?
PUC यानी Pollution Under Control Certificate एक ऐसा प्रमाणपत्र है जो यह बताता है कि वाहन से निकलने वाला धुआं और प्रदूषण निर्धारित मानकों के भीतर है। यह प्रमाणपत्र अधिकृत प्रदूषण जांच केंद्रों द्वारा जारी किया जाता है।
केंद्रीय मोटर वाहन नियमों के अनुसार एक वर्ष से अधिक पुराने वाहनों के लिए वैध PUC रखना अनिवार्य है। सरकार ने पूरे देश में PUC प्रमाणपत्र का एक समान प्रारूप भी लागू किया है ताकि इसकी निगरानी और सत्यापन आसान हो सके।
कितने समय तक वैध रहता है PUC?
वाहन की श्रेणी और उत्सर्जन मानकों के आधार पर PUC की वैधता अलग-अलग हो सकती है।
- BS-IV और BS-VI वाहनों के लिए सामान्यतः 12 माह तक वैधता।
- पुराने मानकों वाले वाहनों के लिए 6 माह तक वैधता।
- समय समाप्त होने पर दोबारा प्रदूषण जांच कराना जरूरी होता है।
PUC नहीं होने पर कितना लगेगा जुर्माना?
मोटर वाहन अधिनियम और प्रदूषण नियंत्रण नियमों के तहत बिना वैध PUC के वाहन चलाने पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है। कई मामलों में 10,000 रुपये तक का जुर्माना और अन्य दंडात्मक कार्रवाई का प्रावधान है। कुछ परिस्थितियों में ड्राइविंग लाइसेंस निलंबित करने जैसी कार्रवाई भी हो सकती है।
यानी अब वाहन चालकों को दोहरी मार झेलनी पड़ सकती है। एक ओर पेट्रोल नहीं मिलेगा, दूसरी ओर जुर्माना भी भरना पड़ सकता है।
सरकार इतनी सख्ती क्यों कर रही है?
दिल्ली-एनसीआर देश के सबसे प्रदूषित क्षेत्रों में गिना जाता है। हर वर्ष सर्दियों के मौसम में वायु गुणवत्ता गंभीर स्तर तक पहुंच जाती है। विशेषज्ञों के अनुसार वाहनों से निकलने वाला धुआं PM2.5, नाइट्रोजन ऑक्साइड और कार्बन मोनोऑक्साइड जैसी प्रदूषक गैसों का प्रमुख स्रोत है। इसी वजह से वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (CAQM) और राज्य सरकारें प्रदूषण फैलाने वाले वाहनों की पहचान और नियंत्रण के लिए लगातार नए कदम उठा रही हैं।
सरकार का तर्क है कि यदि ईंधन को PUC से जोड़ दिया जाए तो वाहन मालिक समय पर प्रदूषण जांच कराने के लिए मजबूर होंगे और सड़कों पर चलने वाले प्रदूषणकारी वाहनों की संख्या कम होगी।
पेट्रोल पंपों पर कैसे होगी जांच?
प्रशासन पेट्रोल पंपों पर डिजिटल सत्यापन प्रणाली लागू कर रहा है। कई स्थानों पर ANPR कैमरे लगाए गए हैं, जो वाहन नंबर पढ़कर संबंधित डेटाबेस से PUC की स्थिति की जांच कर सकते हैं। यदि वाहन का PUC समाप्त हो चुका है, तो उसे ईंधन देने से रोका जा सकता है।
इसके अलावा परिवहन विभाग और प्रदूषण नियंत्रण एजेंसियां संयुक्त अभियान भी चला रही हैं।
उत्तर प्रदेश के वाहन चालकों के लिए क्या है स्थिति?
उत्तर प्रदेश में पहले ही HSRP और PUC को लेकर नियम सख्त किए जा चुके हैं। बिना हाई सिक्योरिटी रजिस्ट्रेशन प्लेट (HSRP) वाले कई वाहनों के लिए PUC बनवाने में भी प्रतिबंध लगाए गए हैं।
हालांकि “नो PUC, नो फ्यूल” नियम फिलहाल मुख्य रूप से दिल्ली-एनसीआर क्षेत्र में लागू किया जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसका असर सकारात्मक रहा तो अन्य राज्यों में भी इसी तरह के कदम उठाए जा सकते हैं।
वाहन मालिकों को क्या करना चाहिए?
- अपने वाहन का PUC तुरंत जांच लें।
- यदि प्रमाणपत्र समाप्त हो गया है तो नजदीकी अधिकृत केंद्र पर जाकर नया PUC बनवाएं।
- वाहन की नियमित सर्विसिंग कराएं।
- HSRP, बीमा और अन्य दस्तावेज भी अपडेट रखें।
- डिजिटल कॉपी अपने मोबाइल में सुरक्षित रखें।
