गाज़ियाबाद [TV 47 न्यूज नेटवर्क ]। गाज़ियाबाद के राजनगर एक्सटेंशन स्थित रामलीला मैदान में श्री सनातन परिवार फाउंडेशन के तत्वावधान में आयोजित श्रीमद्भागवत कथा एवं श्री कृष्ण नाम महायज्ञ का तृतीय दिवस आध्यात्मिक ऊर्जा, भक्ति और मानवता के संदेश से सराबोर रहा। कथा व्यास अंतर्राष्ट्रीय कथाव्यास श्रद्धेय शिवानंद भाई श्री (तीर्थ नैमिषारण्य) ने अपने ओजस्वी और भावपूर्ण प्रवचनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को जीवन के गूढ़ आध्यात्मिक रहस्यों से परिचित कराया।
कथा पंडाल में सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ने लगी थी। जैसे-जैसे कथा आगे बढ़ी, पूरा वातावरण भक्ति रस में डूबता चला गया। श्रद्धालु न केवल कथा का श्रवण कर रहे थे, बल्कि उसके आध्यात्मिक संदेशों को अपने जीवन से जोड़ने का प्रयास भी कर रहे थे।
इस अवसर पर श्री अजय शर्मा, श्री नरेंद्र सांगवान, श्रीमती विभा रावत, श्री देवेंद्र सांगवान, श्री अभिषेक शर्मा, श्री विवेक त्यागी, श्री प्रदीप शर्मा सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे।
भक्ति का वास्तविक अर्थ बताया
अपने प्रवचन में शिवानंद भाई श्री ने कहा कि भक्ति का अर्थ केवल मंदिर जाना, पूजा-पाठ करना या धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लेना नहीं है। सच्ची भक्ति तब प्रकट होती है जब मनुष्य अपने भीतर प्रेम, करुणा और सद्भाव का विकास करता है।
उन्होंने कहा,
“बड़ा भक्त वह नहीं होता जो केवल दूसरे के दुख में दुखी हो जाए, बल्कि बड़ा भक्त वह है जो दूसरे के सुख में भी सुखी हो सके।”
उन्होंने बताया कि आज के समय में अधिकांश लोग दूसरों की सफलता देखकर ईर्ष्या करने लगते हैं, जबकि सच्चा भक्त दूसरों की उन्नति और प्रसन्नता को देखकर भी आनंद का अनुभव करता है। यही भाव भगवान के प्रति समर्पण और सच्ची भक्ति की पहचान है।
ईर्ष्या नहीं, आनंद का भाव अपनाएं
महाराज श्री ने कहा कि समाज की अनेक समस्याओं का मूल कारण ईर्ष्या और प्रतिस्पर्धा की नकारात्मक भावना है। जब व्यक्ति दूसरे की प्रगति देखकर दुखी होता है तो उसके भीतर अशांति पैदा होती है।
उन्होंने कहा कि भगवान ने प्रत्येक व्यक्ति को अलग-अलग गुण और क्षमताएं प्रदान की हैं। इसलिए तुलना करने के बजाय दूसरों की उपलब्धियों का सम्मान करना चाहिए।
उन्होंने श्रद्धालुओं से आग्रह किया कि यदि समाज में प्रेम और सद्भाव बढ़ाना है तो दूसरों की खुशी में खुश होना सीखना होगा। यही आध्यात्मिकता की पहली सीढ़ी है।
कपिल चरित्र के माध्यम से दिया आत्मज्ञान का संदेश
तृतीय दिवस की कथा में श्रद्धेय शिवानंद भाई श्री ने श्रीमद्भागवत महापुराण के महत्वपूर्ण प्रसंग ‘कपिल चरित्र’ का विस्तार से वर्णन किया।
उन्होंने बताया कि भगवान कपिल ने अपनी माता देवहूति को आत्मज्ञान, योग और भक्ति का जो उपदेश दिया, वह आज भी मानव जीवन के लिए अत्यंत प्रासंगिक है।
महाराज श्री ने कहा कि संसार का प्रत्येक व्यक्ति सुख की तलाश में भटकता रहता है, लेकिन वास्तविक सुख बाहरी वस्तुओं में नहीं बल्कि अपने भीतर स्थित परमात्मा के अनुभव में निहित है।
उन्होंने कहा कि जब मनुष्य आत्मा और शरीर के अंतर को समझ लेता है, तब उसके जीवन में नई चेतना का उदय होता है।
मोह से मुक्ति का मार्ग है भक्ति
कथा के दौरान उन्होंने कहा कि मनुष्य का अधिकांश जीवन मोह, माया और भौतिक इच्छाओं के पीछे भागते हुए व्यतीत हो जाता है।
भगवान कपिल के उपदेशों का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि भक्ति मनुष्य को संसार के बंधनों से मुक्त कर सकती है। जब मन भगवान के चरणों में लग जाता है तो जीवन की अनेक समस्याएं स्वतः हल होने लगती हैं।
उन्होंने कहा कि भक्ति कोई पलायन नहीं है, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली शक्ति है। यह व्यक्ति को भीतर से मजबूत बनाती है और उसे सही निर्णय लेने की क्षमता प्रदान करती है।
भक्ति से जन्म लेता है विवेक और करुणा
महाराज श्री ने कहा कि सच्ची भक्ति केवल भगवान के नाम का जाप करने तक सीमित नहीं रहती। उसका प्रभाव व्यक्ति के व्यवहार और चरित्र में भी दिखाई देता है।
उन्होंने बताया कि भक्ति से विवेक पैदा होता है, विवेक से सही मार्ग का चयन होता है और सही मार्ग पर चलने से जीवन में शांति आती है।
उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति वास्तव में भगवान से प्रेम करता है, वह किसी के प्रति घृणा नहीं रख सकता। उसके भीतर करुणा, सेवा और मानवता के भाव स्वतः जागृत हो जाते हैं।
भजनों से झूम उठा कथा पंडाल
कथा के दौरान जब प्रसिद्ध भजन “मीठे रस से भरो री राधा रानी लागे…” की प्रस्तुति हुई तो पूरा पंडाल भक्तिमय वातावरण में डूब गया।
श्रद्धालु भक्ति रस में झूमते नजर आए। कई भक्तों ने हाथ उठाकर भजन का आनंद लिया तो कई लोग भाव-विभोर होकर भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी के जयकारे लगाने लगे।
भजन और कथा का यह अद्भुत संगम उपस्थित श्रद्धालुओं के लिए अविस्मरणीय अनुभव बन गया।
सनातन संस्कृति का संदेश दे रही कथा
श्रीमद्भागवत कथा केवल धार्मिक आयोजन नहीं बल्कि सनातन संस्कृति के मूल्यों को जन-जन तक पहुंचाने का माध्यम भी बन रही है।
कथा में प्रतिदिन प्रेम, सेवा, त्याग, करुणा, मानवता और राष्ट्रधर्म जैसे विषयों पर चर्चा की जा रही है। यही कारण है कि बड़ी संख्या में युवा, महिलाएं और वरिष्ठ नागरिक कथा में भाग लेकर आध्यात्मिक ज्ञान प्राप्त कर रहे हैं।
आयोजकों का कहना है कि कथा का उद्देश्य केवल धार्मिक अनुष्ठान करना नहीं बल्कि समाज में सकारात्मक सोच और नैतिक मूल्यों का प्रसार करना है।
श्रद्धालुओं में दिखा विशेष उत्साह
तृतीय दिवस के आयोजन में श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। कथा स्थल पर सुबह से लेकर देर शाम तक भक्तों की आवाजाही बनी रही।
राजनगर एक्सटेंशन सहित गाजियाबाद के विभिन्न क्षेत्रों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा सुनने पहुंचे। कथा के बाद श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया और महाराज श्री के आशीर्वचन प्राप्त किए।
