गुवाहाटी [TV 47 न्यूज नेटवर्क ]। सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक गतिविधियों के लिए प्रसिद्ध असम की राजधानी गुवाहाटी में उस समय एक विशेष वातावरण देखने को मिला, जब राजस्थान की प्रख्यात समाजसेविका एवं महिला सशक्तिकरण की अग्रणी हस्ती डॉ. सरस्वती गौड़ के सम्मान में एक भव्य अभिनंदन समारोह आयोजित किया गया। अष्टलक्ष्मी परशुराम फाउंडेशन की गुवाहाटी शाखा एवं गौड़ महिला समिति के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों के प्रतिनिधियों, मातृशक्ति, सामाजिक कार्यकर्ताओं और संगठन के पदाधिकारियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण वह घोषणा रही, जिसमें अष्टलक्ष्मी परशुराम फाउंडेशन के संस्थापक एवं मुख्य संरक्षक तथा नॉर्थ ईस्ट के सुप्रसिद्ध उद्योगपति श्री रतन शर्मा ने डॉ. सरस्वती गौड़ को संगठन का प्रमुख राष्ट्रीय समन्वयक नियुक्त किए जाने की घोषणा की। इस घोषणा के साथ ही फाउंडेशन के राष्ट्रीय विस्तार और संगठनात्मक मजबूती की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
डॉ. सरस्वती गौड़ के अनुभव से संगठन को मिलेगी नई दिशा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए श्री रतन शर्मा ने कहा कि डॉ. सरस्वती गौड़ का सामाजिक और आध्यात्मिक क्षेत्र में दशकों का अनुभव संगठन के लिए अमूल्य संपत्ति है। उन्होंने कहा कि डॉ. गौड़ ने समाज सेवा के माध्यम से महिलाओं, युवाओं और समाज के विभिन्न वर्गों को जोड़ने का उल्लेखनीय कार्य किया है।
रतन शर्मा ने कहा कि वर्तमान समय में समाज को ऐसे नेतृत्व की आवश्यकता है जो केवल संगठन का विस्तार ही न करे, बल्कि समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचकर उसकी समस्याओं को समझे और समाधान के लिए कार्य करे। डॉ. गौड़ में यह क्षमता और संवेदनशीलता दोनों मौजूद हैं। यही कारण है कि उन्हें राष्ट्रीय स्तर पर संगठनात्मक जिम्मेदारी सौंपी गई है।
उन्होंने कहा कि अष्टलक्ष्मी परशुराम फाउंडेशन का उद्देश्य केवल एक संगठन बनाना नहीं है, बल्कि समाज की ऊर्जा को एक दिशा देना है। इसके लिए अनुभवी, समर्पित और दूरदर्शी नेतृत्व की आवश्यकता होती है और डॉ. सरस्वती गौड़ इस भूमिका के लिए सर्वथा उपयुक्त हैं।
महिला नेतृत्व को मजबूत बनाने की दिशा में बड़ा कदम
समारोह में वक्ताओं ने कहा कि समाज में महिलाओं की भूमिका केवल परिवार तक सीमित नहीं है। आज महिलाएं शिक्षा, प्रशासन, उद्योग, राजनीति, सामाजिक सेवा और आध्यात्मिक क्षेत्र में नेतृत्व कर रही हैं। ऐसे समय में किसी राष्ट्रीय संगठन की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी महिला नेतृत्व को सौंपना एक सकारात्मक और प्रेरणादायी संदेश है।
रतन शर्मा ने कहा कि अष्टलक्ष्मी परशुराम फाउंडेशन समाज की अनुभवी मातृशक्ति को नेतृत्व और निर्णय प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी देने के लिए प्रतिबद्ध है। उनका मानना है कि जब महिलाओं को निर्णय प्रक्रिया में उचित स्थान मिलता है, तब समाज का विकास अधिक संतुलित और व्यापक होता है।
उन्होंने कहा कि संगठन की प्राथमिकताओं में शिक्षा, कौशल विकास, आत्मनिर्भरता, सामाजिक समरसता और युवाओं का मार्गदर्शन प्रमुख रूप से शामिल रहेगा। इन क्षेत्रों में महिलाओं और युवाओं की भागीदारी को बढ़ाने के लिए विशेष अभियान चलाए जाएंगे।
नई जिम्मेदारी को सेवा का अवसर मानती हैं डॉ. गौड़
राष्ट्रीय समन्वयक की जिम्मेदारी स्वीकार करते हुए डॉ. सरस्वती गौड़ ने फाउंडेशन के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह पद उनके लिए केवल सम्मान नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी है।
उन्होंने कहा कि संगठन द्वारा उन पर व्यक्त किया गया विश्वास उनके लिए प्रेरणा का स्रोत है। वे इस दायित्व को पूरी निष्ठा, समर्पण और पारदर्शिता के साथ निभाने का प्रयास करेंगी।
डॉ. गौड़ ने कहा कि उनका लक्ष्य संगठन को गांव, कस्बे, जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक मजबूत संरचना प्रदान करना है। समाज के प्रत्येक व्यक्ति को जोड़ना, युवाओं को अवसरों से जोड़ना और मातृशक्ति को नेतृत्व की मुख्यधारा में लाना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल रहेगा।
उन्होंने कहा कि ब्राह्मण समाज केवल एक सामाजिक पहचान नहीं, बल्कि ज्ञान, संस्कार, शिक्षा और राष्ट्र निर्माण की एक परंपरा का प्रतिनिधित्व करता है। इस परंपरा को आधुनिक समय की आवश्यकताओं के अनुरूप संगठित और सशक्त बनाना आवश्यक है।
अष्टलक्ष्मी परशुराम फाउंडेशन का राष्ट्रीय दृष्टिकोण
अष्टलक्ष्मी परशुराम फाउंडेशन की स्थापना समाज को संगठित करने और उसके समग्र विकास के उद्देश्य से की गई है। संगठन का मानना है कि समाज के विभिन्न वर्गों को एक साझा मंच प्रदान कर उनकी समस्याओं, आवश्यकताओं और संभावनाओं को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई जा सकती है।
फाउंडेशन के संस्थापक रतन शर्मा पिछले दो दशकों से सामाजिक और शैक्षिक गतिविधियों से जुड़े हुए हैं। विभिन्न सामाजिक संगठनों के माध्यम से उन्होंने छात्रवृत्ति, आर्थिक सहयोग, रोजगार सृजन और सामाजिक उत्थान के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य किए हैं।
संगठन के पदाधिकारियों के अनुसार हर वर्ष बड़ी संख्या में विद्यार्थियों को छात्रवृत्ति उपलब्ध कराई जाती है। साथ ही युवाओं को रोजगार और स्वरोजगार से जोड़ने के लिए भी प्रयास किए जाते हैं। संगठन का उद्देश्य समाज के प्रतिभाशाली युवाओं को अवसरों से जोड़ना और उन्हें आत्मनिर्भर बनाना है।
गांव से राष्ट्र तक संगठन विस्तार का लक्ष्य
अष्टलक्ष्मी परशुराम फाउंडेशन की कार्ययोजना केवल महानगरों तक सीमित नहीं है। संगठन की रणनीति गांव स्तर से राष्ट्रीय स्तर तक मजबूत नेटवर्क तैयार करने की है।
फाउंडेशन का मानना है कि जब समाज का अंतिम व्यक्ति संगठन से जुड़ता है, तभी वास्तविक सामाजिक परिवर्तन संभव होता है। इसी दृष्टिकोण के साथ संगठन विभिन्न राज्यों में अपनी इकाइयों का विस्तार कर रहा है।
डॉ. सरस्वती गौड़ को राष्ट्रीय समन्वयक बनाए जाने का एक प्रमुख उद्देश्य भी यही बताया जा रहा है कि संगठन की गतिविधियों को जिला स्तर तक प्रभावी ढंग से पहुंचाया जा सके और विभिन्न राज्यों में एक मजबूत समन्वय स्थापित किया जा सके।
सामाजिक समरसता और राष्ट्र निर्माण पर विशेष जोर
कार्यक्रम में उपस्थित वक्ताओं ने कहा कि संगठन का उद्देश्य केवल किसी एक वर्ग तक सीमित नहीं है। सामाजिक समरसता, राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक मूल्यों का संरक्षण भी इसकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है।
वक्ताओं ने कहा कि आज के दौर में समाज को ऐसे संगठनों की आवश्यकता है जो लोगों को जोड़ने का कार्य करें। संवाद, सहयोग और सहभागिता के माध्यम से ही समाज को मजबूत बनाया जा सकता है।
डॉ. गौड़ ने भी अपने संबोधन में कहा कि समाज और राष्ट्र के विकास में हर नागरिक की भूमिका महत्वपूर्ण है। युवाओं, महिलाओं और अनुभवी नागरिकों की सामूहिक भागीदारी से ही मजबूत और समृद्ध भारत का निर्माण संभव है।
बड़ी संख्या में उपस्थित रहे समाजबंधु और पदाधिकारी
अभिनंदन समारोह में संगठन के राष्ट्रीय संयोजक चंद्रप्रकाश शर्मा, समाजसेविका संतोष शर्मा, गुवाहाटी शाखा के अध्यक्ष राजकुमार तिवाड़ी, सुरेंद्र शर्मा, महिला समिति की अध्यक्ष स्वाति भाटरा, वंदना शर्मा, पंडित तेजपाल जोशी, जितेंद्र पिंपलवा, नानक शर्मा, संजय शर्मा, ओम प्रकाश भाटीवाड़ा, सुशील व्यास, दीपक धानीवाल, नरेश जोशी, कैलाश पारीक, रोहित शर्मा, अमर भाटीवाड़ा, रामनिवास मटोलिया, दीनदयाल सिसोदिया, पंकज शर्मा, जय पिंपलवा, सरवन शर्मा, ज्योति शर्मा, कुसुम शर्मा, रितु बत्रा, सुमन शर्मा, निवेदिता शर्मा, कमला, लता, निशा शर्मा, माया गौड़, लक्ष्मी शर्मा, ममता गौड़, छाया तिवारी, कौशल्या, विकास, किरण शर्मा, बबली शर्मा और संगीता गौड़ सहित बड़ी संख्या में समाजबंधु एवं मातृशक्ति उपस्थित रही।
पारंपरिक स्वागत ने बढ़ाई कार्यक्रम की गरिमा
कार्यक्रम के दौरान अष्टलक्ष्मी परशुराम फाउंडेशन की नॉर्थ ईस्ट इकाई की मातृशक्ति ने डॉ. सरस्वती गौड़ का पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ स्वागत और अभिनंदन किया। इस अवसर पर उन्हें सम्मान स्वरूप स्मृति चिन्ह और शुभकामना संदेश भी प्रदान किए गए।
उपस्थित पदाधिकारियों और सदस्यों ने उन्हें नए राष्ट्रीय दायित्व के लिए शुभकामनाएं देते हुए विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व में संगठन नई ऊंचाइयों को प्राप्त करेगा।
संगठन के भविष्य को लेकर बढ़ी उम्मीदें
डॉ. सरस्वती गौड़ की नियुक्ति को संगठन के लिए एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। सामाजिक क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव और व्यापक संपर्कों के कारण संगठन को राष्ट्रीय स्तर पर नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि संगठन शिक्षा, कौशल विकास, महिला सशक्तिकरण और युवाओं के रोजगार जैसे विषयों पर योजनाबद्ध तरीके से कार्य करता है, तो उसका प्रभाव व्यापक स्तर पर दिखाई दे सकता है।
