नई दिल्ली [TV 47 न्यूज नेटवर्क ]। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दीपके का आंदोलन बेरोजगारी और परीक्षा विवाद से निकलकर अब राष्ट्रीय राजनीति में चर्चा का विषय बन चुका है। लेकिन जैसे-जैसे इस संगठन का प्रभाव बढ़ा है, वैसे-वैसे उसके राजनीतिक रिश्तों और फंडिंग को लेकर सवाल भी तेज हुए हैं। आखिर कॉकरोच आंदोलन का आम आदमी पार्टी (AAP) से क्या संबंध है ? क्या इस आंदोलन को किसी राजनीतिक दल से आर्थिक मदद मिल रही है ? अमेरिका में दीपके की पढ़ाई का खर्च किसने उठाया और देशभर में प्रदर्शन आयोजित करने के लिए पैसा कहां से आता है ?
कॉकरोच आंदोलन और आम आदमी पार्टी का कनेक्शन क्या है?
कॉकरोच जनता पार्टी का AAP से संबंध समझने के लिए उसके संस्थापक अभिजीत दीपके की राजनीतिक पृष्ठभूमि को देखना जरूरी है। दीपके ने खुद स्वीकार किया है कि वह अतीत में आम आदमी पार्टी से जुड़े रहे थे। हालांकि, उनका कहना है कि अमेरिका में उच्च शिक्षा के लिए जाने के बाद उनका पार्टी से संगठनात्मक और पेशेवर संबंध समाप्त हो गया था। उन्होंने कॉकरोच जनता पार्टी को एक स्वतंत्र युवा आंदोलन बताया है।
जून 2026 में The Week को दिए साक्षात्कार में दीपके ने स्पष्ट किया था कि उनका AAP से पुराना संबंध कोई छिपी हुई बात नहीं है, लेकिन कॉकरोच जनता पार्टी किसी राजनीतिक दल के निर्देश पर काम नहीं करती। उन्होंने यह भी कहा कि आंदोलन के संचालन में शामिल लोग किसी पार्टी के बजाय अपने समर्थकों के प्रति जवाबदेह हैं।
हालांकि, मामला केवल संस्थापक तक सीमित नहीं है। द प्रिंट ने 13 अगस्त 2026 की अपनी रिपोर्ट में कॉकरोच जनता पार्टी की 12 सदस्यीय राष्ट्रीय कार्यसमिति का विश्लेषण करते हुए बताया कि उसके छह सदस्य पहले AAP से जुड़े रहे थे या सार्वजनिक रूप से पार्टी का समर्थन कर चुके थे। रिपोर्ट में संगठन के पदाधिकारियों के पुराने राजनीतिक और सोशल मीडिया संबंधों का विवरण दिया गया।
इनमें संगठन के प्रभारी अजिंक्य शिंदे, मीडिया से जुड़े विजय रेड्डी मलंगी, पूर्व AAP कार्यकर्ता अंकित भारद्वाज और सह-संयोजक सौरव दास जैसे नाम शामिल किए गए। रिपोर्ट के अनुसार, इनमें से कुछ लोगों की पुरानी सोशल मीडिया गतिविधियों और राजनीतिक भूमिकाओं से AAP के साथ उनके पूर्व संबंधों की जानकारी सामने आई।
AAP के प्रवक्ता संजीव झा ने द प्रिंट से कहा था कि कॉकरोच जनता पार्टी से जुड़े कुछ लोग पहले AAP में थे, लेकिन अब वे अपने रास्ते पर आगे बढ़ चुके हैं और हाल के समय में पार्टी का उनसे संपर्क नहीं है। दूसरी ओर, राजनीतिक विश्लेषकों ने दोनों संगठनों के बीच कुछ वैचारिक और संगठनात्मक समानताओं की ओर ध्यान दिलाया है।
इसलिए फिलहाल कॉकरोच आंदोलन और AAP के बीच पुराने राजनीतिक संबंधों और संगठनात्मक समानताओं के प्रमाण हैं, लेकिन वर्तमान वित्तीय नियंत्रण या नियमित फंडिंग का पुष्ट प्रमाण नहीं है।
अभिजीत दीपके की अमेरिका में पढ़ाई का पैसा कहां से आया?
कॉकरोच जनता पार्टी की फंडिंग पर सवाल उठने से पहले दीपके की अमेरिका में पढ़ाई के खर्च को लेकर भी विवाद हुआ था। वह अमेरिका की बोस्टन यूनिवर्सिटी से पब्लिक रिलेशंस में मास्टर डिग्री हासिल कर चुके हैं। विदेश में उच्च शिक्षा का खर्च कितना था और उसे किसने उठाया, इस पर सवाल उठाए गए।
3 अगस्त 2026 को प्रकाशित हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, दीपके ने अपनी पढ़ाई के लिए बोस्टन यूनिवर्सिटी से छात्रवृत्ति मिलने और शिक्षा ऋण लेने की बात कही थी। उन्होंने बताया कि शिक्षा ऋण अभी चुकाया जाना बाकी है।
दीपके ने कहा था कि उनकी शिक्षा के वित्तीय स्रोतों की जांच करने के लिए कोई भी स्वतंत्र है। यह बयान उस समय आया, जब गुजरात के एक RTI कार्यकर्ता ने उनकी विदेश में पढ़ाई के खर्च की जांच की मांग की थी।
इस मामले में उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को लेकर भी सवाल उठाए गए। शिकायतकर्ता ने महाराष्ट्र सरकार से दीपके के पिता भगवानराव दीपके की वित्तीय स्थिति की जांच करने की मांग की थी। रिपोर्ट में उनके पिता को महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (MIDC) में जूनियर इंजीनियर बताया गया। शिकायतकर्ता ने सवाल किया कि सीमित वेतन से अमेरिका में बच्चों की उच्च शिक्षा का खर्च कैसे उठाया गया।
इसके अलावा, दीपके की पढ़ाई के लिए इस्तेमाल की गई छात्रवृत्ति और शिक्षा ऋण की जानकारी को कॉकरोच आंदोलन की फंडिंग का स्रोत नहीं माना जा सकता। व्यक्तिगत शिक्षा का खर्च और किसी संगठन के प्रदर्शन का खर्च अलग-अलग वित्तीय विषय हैं।
कॉकरोच आंदोलन को पैसा कौन दे रहा है?
यही इस पूरे विवाद का सबसे बड़ा सवाल है। देश के अलग-अलग शहरों में प्रदर्शन, यात्रा, प्रचार सामग्री, सोशल मीडिया अभियान, संगठन विस्तार और कानूनी सहायता जैसे कामों के लिए धन की जरूरत होती है। ऐसे में यह जानना स्वाभाविक है कि कॉकरोच जनता पार्टी इन खर्चों को कैसे पूरा करती है।
2 अक्टूबर 2026 को मिंट में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान दीपके से संगठन की फंडिंग के बारे में सवाल पूछा गया था। उनसे पूछा गया कि जब उनका संगठन चुनाव आयोग से पारदर्शिता की मांग कर रहा है, तो क्या उसे भी अपने वित्तीय स्रोत सार्वजनिक नहीं करने चाहिए।
इस पर दीपके ने फंडिंग का पूरा विवरण देने के बजाय सवाल की प्रासंगिकता पर आपत्ति जताई। उन्होंने पूछा कि यदि वह अपने संगठन की फंडिंग सार्वजनिक कर दें, तो क्या इससे चुनाव संबंधी समस्याएं हल हो जाएंगी? उन्होंने अपने यात्रा खर्च और निजी खर्चों को लेकर उठाए गए सवालों का भी जवाब दिया।
उनका यह जवाब फंडिंग से जुड़े प्रश्नों का पूरा समाधान नहीं देता। चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना और अपने संगठन के वित्तीय स्रोतों के बारे में जानकारी देना दो अलग-अलग विषय हैं।
फिलहाल उपलब्ध रिपोर्टों में कॉकरोच जनता पार्टी के सभी दानदाताओं, कुल प्राप्त धन, बैंक खातों, प्रदर्शन के खर्च और धन के इस्तेमाल का संपूर्ण स्वतंत्र ऑडिट सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आया है। इसलिए यह दावा करना कि संगठन को किसी विशेष पार्टी, कारोबारी समूह या विदेशी स्रोत से पैसा मिल रहा है, उपलब्ध तथ्यों से आगे जाना होगा।
कपिल सिब्बल के एक करोड़ रुपये के फंड का क्या मामला है?
फंडिंग विवाद में एक और नाम सामने आया—राज्यसभा सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल। हिंदुस्तान टाइम्स की 3 अगस्त की रिपोर्ट के मुताबिक, RTI कार्यकर्ता अमित ने कॉकरोच जनता पार्टी की कानूनी स्थिति और कपिल सिब्बल की ओर से घोषित एक करोड़ रुपये के कानूनी सहायता कोष को लेकर भी संबंधित अधिकारियों से शिकायत की थी।
शिकायतकर्ता ने इस राशि के कर संबंधी पहलुओं की जांच की मांग की थी। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख था कि उसने चुनाव आयोग, केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) और महाराष्ट्र सरकार से संबंधित सवाल उठाए थे।
हालांकि, इस मामले में दो बातें अलग रखना जरूरी है। पहला, कानूनी सहायता के लिए घोषित राशि और आंदोलन के रोजमर्रा के खर्च के लिए उपलब्ध धन एक ही चीज नहीं हैं। दूसरा, किसी व्यक्ति द्वारा शिकायत दर्ज कराए जाने से यह साबित नहीं होता कि संबंधित राशि गैरकानूनी है या उसका इस्तेमाल गलत तरीके से हुआ है।
कानूनी सहायता कोष का वास्तविक स्वरूप, उसके संचालन की शर्तें, धन प्राप्त करने वाला पक्ष और उसके उपयोग का विवरण सार्वजनिक दस्तावेजों से स्पष्ट होना चाहिए। जब तक इन विवरणों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं होती, तब तक इसे कॉकरोच आंदोलन की नियमित फंडिंग का प्रमाण नहीं कहा जा सकता।
प्रदर्शन के लिए यात्रा और संगठन विस्तार का खर्च कौन उठाता है?
कॉकरोच आंदोलन की गतिविधियां कई राज्यों तक फैली हैं। बेंगलुरु, मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों में प्रदर्शन के अलावा संगठन सोशल मीडिया के जरिए समर्थकों को जोड़ता है। इस तरह की गतिविधियों में रेल या विमान यात्रा, स्थानीय परिवहन, पोस्टर, बैनर, डिजिटल प्रचार और कानूनी मदद पर खर्च हो सकता है।
अक्टूबर में दिल्ली में प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले महाराष्ट्र पुलिस ने कुछ समर्थकों को नोटिस जारी किए थे। द इंडियन एक्सप्रेस की 6 अक्टूबर की रिपोर्ट के मुताबिक, चंद्रपुर जिले में एक समर्थक को जारी नोटिस में दिल्ली जाने की योजना और यात्रा के लिए भुगतान करने वाले व्यक्ति के बारे में जानकारी मांगी गई थी। दीपके ने इस कदम की आलोचना की थी। पुलिस ने इसे प्रदर्शन से पहले की नियमित प्रक्रिया बताया था।
यह घटनाक्रम बताता है कि प्रदर्शन की यात्रा और वित्तीय व्यवस्था प्रशासन की जांच का विषय बनी हुई थी। वास्तविक तस्वीर जानने के लिए यह स्पष्ट होना चाहिए कि यात्रा का खर्च स्वयं समर्थक उठा रहे हैं, संगठन सामूहिक रूप से खर्च कर रहा है, किसी निजी दानदाता ने सहायता दी है या कोई अन्य व्यवस्था है। उपलब्ध सार्वजनिक रिपोर्टों में इन सभी खर्चों का पूर्ण और सत्यापित विवरण नहीं मिलता।
क्या विदेशी फंडिंग का कोई प्रमाण है?
अभिजीत दीपके की अमेरिका में पढ़ाई और उनकी अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के कारण विदेशी फंडिंग को लेकर सवाल उठ सकते हैं।
दीपके ने अपनी पढ़ाई के खर्च के लिए छात्रवृत्ति और शिक्षा ऋण का उल्लेख किया था। दूसरी ओर, कॉकरोच जनता पार्टी को किसी विदेशी सरकार, विदेशी राजनीतिक संगठन या विदेशी दानदाता से धन मिलने का कोई पुष्ट सार्वजनिक प्रमाण उपलब्ध रिपोर्टों में सामने नहीं आया है।
विदेशी योगदान के मामले में भारतीय कानूनों के तहत लागू नियमों, संगठन की कानूनी स्थिति और किसी विशिष्ट लेन-देन के दस्तावेजों की जांच जरूरी होगी।
क्या कॉकरोच जनता पार्टी एक राजनीतिक दल है?
कॉकरोच जनता पार्टी नाम में ‘पार्टी’ शब्द होने के बावजूद इसे चुनाव आयोग में पंजीकृत राजनीतिक दल मान लेना सही नहीं होगा। द प्रिंट की रिपोर्ट के अनुसार, संगठन खुद को राजनीतिक दबाव समूह बताता है और उसका कहना रहा है कि उसका उद्देश्य तत्काल चुनावी राजनीति में प्रवेश करना नहीं, बल्कि युवाओं के मुद्दों पर दबाव बनाना है।
यह अंतर फंडिंग के सवाल पर भी महत्वपूर्ण है। किसी पंजीकृत राजनीतिक दल, सामाजिक संगठन, अनौपचारिक आंदोलन और कानूनी सहायता कोष के वित्तीय नियम एक जैसे नहीं होते। किसी संगठन की सही कानूनी श्रेणी और उसके पंजीकरण की स्थिति स्पष्ट होने के बाद ही यह तय किया जा सकता है कि उस पर कौन-सी वित्तीय रिपोर्टिंग और अनुपालन संबंधी बाध्यताएं लागू होती हैं।
इसलिए कॉकरोच जनता पार्टी की फंडिंग पर गंभीर जांच के लिए पहले संगठन की कानूनी स्थिति, उसके बैंक खातों, दान प्राप्त करने की व्यवस्था और खर्च के आधिकारिक रिकॉर्ड सामने आने चाहिए।
राजनीतिक कनेक्शन सामने आए, लेकिन फंडिंग का पूरा हिसाब बाकी
कॉकरोच आंदोलन और आम आदमी पार्टी के बीच पुराने राजनीतिक संबंधों के प्रमाण सामने आए हैं। अभिजीत दीपके ने AAP से अपने पुराने जुड़ाव को स्वीकार किया है। द प्रिंट की रिपोर्ट में संगठन के 12 सदस्यीय कोर समूह के छह सदस्यों के पुराने AAP संबंधों या सार्वजनिक समर्थन का उल्लेख है। हालांकि, AAP ने कहा है कि संबंधित लोग अब पार्टी से अलग हो चुके हैं।
दीपके ने अपनी अमेरिका में पढ़ाई के खर्च के लिए छात्रवृत्ति और शिक्षा ऋण का विवरण दिया था। दूसरी ओर, आंदोलन की फंडिंग को लेकर पूछे गए सवालों पर उन्होंने सार्वजनिक रूप से पूरा वित्तीय ब्योरा नहीं दिया। कपिल सिब्बल के कानूनी सहायता कोष और आंदोलन के सामान्य खर्च को लेकर उठे सवालों पर भी दस्तावेजी स्पष्टता जरूरी है।
अभी उपलब्ध तथ्यों के आधार पर तीन निष्कर्ष निकलते हैं। पहला, कॉकरोच आंदोलन के कुछ प्रमुख चेहरों का AAP से पुराना राजनीतिक जुड़ाव रहा है। दूसरा, संगठन की वर्तमान फंडिंग के किसी एक प्रमुख स्रोत की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। तीसरा, किसी राजनीतिक दल, विदेशी संस्था या कारोबारी समूह द्वारा नियमित वित्तीय सहायता दिए जाने का आरोप लगाने के लिए ठोस दस्तावेज जरूरी हैं।
इस मामले में पारदर्शिता का सबसे विश्वसनीय रास्ता यही होगा कि संगठन अपनी आय, दानदाताओं, कानूनी सहायता, यात्रा खर्च और प्रदर्शन संबंधी खर्च का उचित विवरण सार्वजनिक करे। इससे न केवल राजनीतिक संदेह कम होंगे, बल्कि लोकतांत्रिक जवाबदेही की उसकी मांग भी अधिक विश्वसनीय बनेगी।
