नई दिल्ली [TV 47 न्यूज नेटवर्क ]। 2014 के लोकसभा चुनाव से पहले भारतीय जनता पार्टी एक ऐसे नेता की तलाश में थी जो पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर नई ऊर्जा दे सके और केंद्र की तत्कालीन यूपीए सरकार के खिलाफ मजबूत चुनौती पेश कर सके। इसी दौर में गुजरात के तत्कालीन मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी का राजनीतिक कद तेजी से बढ़ा। लगातार तीन विधानसभा चुनावों में जीत और गुजरात में विकास, निवेश तथा बुनियादी ढांचे को लेकर किए गए कार्यों ने उन्हें भाजपा के सबसे लोकप्रिय नेताओं में शामिल कर दिया।
वर्ष 2001 में गुजरात के मुख्यमंत्री बनने के बाद नरेंद्र मोदी ने राज्य में प्रशासनिक सुधार, औद्योगिक विकास और निवेश को बढ़ावा देने पर विशेष ध्यान दिया। “वाइब्रेंट गुजरात” जैसे आयोजनों के माध्यम से उन्होंने गुजरात को निवेशकों के लिए आकर्षक राज्य के रूप में स्थापित किया। भाजपा और उसके समर्थक इस मॉडल को “गुजरात मॉडल” के रूप में प्रस्तुत करने लगे। धीरे-धीरे यह मॉडल राष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चा का विषय बन गया।
2012 के गुजरात विधानसभा चुनाव में लगातार तीसरी बार भाजपा की जीत ने मोदी की दावेदारी को और मजबूत कर दिया। पार्टी कार्यकर्ताओं और भाजपा के एक बड़े वर्ग का मानना था कि मोदी ही ऐसे नेता हैं जो राष्ट्रीय स्तर पर कांग्रेस के मुकाबले मजबूत विकल्प बन सकते हैं। उस समय देश में भ्रष्टाचार, महंगाई और नीति-निर्णय में सुस्ती जैसे मुद्दों को लेकर यूपीए सरकार आलोचनाओं का सामना कर रही थी। ऐसे माहौल में भाजपा को एक ऐसे चेहरे की जरूरत थी जो विकास और निर्णायक नेतृत्व का संदेश दे सके।
भाजपा के भीतर कई दौर की चर्चाओं और रणनीतिक बैठकों के बाद सितंबर 2013 में नरेंद्र मोदी को आधिकारिक रूप से पार्टी का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया गया। इस घोषणा के साथ ही भाजपा ने 2014 के चुनाव अभियान की कमान मोदी को सौंप दी। मोदी ने देशभर में व्यापक जनसभाएं, रैलियां और संवाद कार्यक्रम आयोजित किए। उन्होंने विकास, सुशासन, रोजगार सृजन, भ्रष्टाचार मुक्त शासन और मजबूत नेतृत्व को अपने अभियान का मुख्य आधार बनाया।
चुनाव प्रचार के दौरान “अबकी बार मोदी सरकार” जैसे नारे पूरे देश में लोकप्रिय हुए। सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म का बड़े पैमाने पर उपयोग भी भाजपा के अभियान की विशेषता रहा। नरेंद्र मोदी ने स्वयं को एक ऐसे नेता के रूप में प्रस्तुत किया जो देश को नई दिशा दे सकता है और भारत को तेज विकास की राह पर ले जा सकता है।
यही कारण रहा कि 2014 के लोकसभा चुनाव में नरेंद्र मोदी भाजपा के सबसे बड़े प्रचारक और चेहरे के रूप में उभरे। उनकी उम्मीदवारी ने भाजपा कार्यकर्ताओं में नया उत्साह पैदा किया और पार्टी को राष्ट्रीय राजनीति के केंद्र में ला खड़ा किया। आगे चलकर यही अभियान भाजपा की ऐतिहासिक जीत और नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने की आधारशिला साबित हुआ।
गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शुरुआत
7 अक्टूबर 2001 को नरेंद्र मोदी ने गुजरात के 14वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली। उस समय गुजरात भुज भूकंप की तबाही से उबर रहा था। भाजपा नेतृत्व ने संगठन में लंबे समय तक काम कर चुके मोदी को राज्य की कमान सौंपी।
मुख्यमंत्री बनने के बाद मोदी ने प्रशासनिक सुधारों, निवेश आकर्षित करने और आधारभूत ढांचे को मजबूत करने पर जोर दिया। 2002, 2007 और 2012 के विधानसभा चुनावों में भाजपा को लगातार जीत मिली, जिससे उनका राजनीतिक कद लगातार बढ़ता गया।
गुजरात मॉडल और प्रमुख उपलब्धियां
नरेंद्र मोदी के मुख्यमंत्री काल को भाजपा और उनके समर्थक “गुजरात मॉडल” के रूप में प्रस्तुत करते रहे हैं।
1. निवेश और उद्योग
मोदी सरकार ने “वाइब्रेंट गुजरात समिट” की शुरुआत की, जिसने गुजरात को निवेश के प्रमुख केंद्रों में शामिल किया। बड़े औद्योगिक घरानों ने राज्य में निवेश किया और गुजरात को विनिर्माण तथा निर्यात के बड़े केंद्र के रूप में पहचान मिली।
2. बिजली और आधारभूत ढांचा
गुजरात में सड़क, बिजली और औद्योगिक कॉरिडोर के विकास पर विशेष जोर दिया गया। ग्रामीण क्षेत्रों तक बिजली पहुंचाने की योजनाओं को भी गति मिली।
3. जल प्रबंधन
जल संरक्षण, चेक डैम और भूजल पुनर्भरण परियोजनाओं को व्यापक स्तर पर लागू किया गया। हजारों जल संरचनाओं के निर्माण से कई क्षेत्रों में भूजल स्तर सुधरने की बात विभिन्न अध्ययनों में सामने आई।
4. ई-गवर्नेंस
SWAGAT जैसे प्लेटफॉर्म और तकनीक आधारित प्रशासनिक मॉडल ने गुजरात को ई-गवर्नेंस के क्षेत्र में अग्रणी राज्यों में शामिल किया।
2014: कैसे बने प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार
2010 के बाद भाजपा के भीतर नरेंद्र मोदी का कद राष्ट्रीय स्तर पर तेजी से बढ़ने लगा। लगातार चुनावी जीत और गुजरात के विकास मॉडल की चर्चा के कारण उन्हें राष्ट्रीय राजनीति में भाजपा का सबसे बड़ा चेहरा माना जाने लगा।
सितंबर 2013 में भाजपा ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किया। इसके बाद उन्होंने पूरे देश में व्यापक चुनाव अभियान चलाया। रोजगार, विकास, सुशासन और मजबूत नेतृत्व उनके अभियान के प्रमुख मुद्दे रहे।
2014 लोकसभा चुनाव: ऐतिहासिक जीत
2014 का लोकसभा चुनाव भारतीय राजनीति का टर्निंग प्वाइंट माना जाता है। भाजपा ने नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चुनाव लड़ा और अपने दम पर पूर्ण बहुमत हासिल किया।
भाजपा ने 543 में से 282 सीटें जीतीं जबकि एनडीए ने 300 से अधिक सीटों के साथ सरकार बनाई। यह 1984 के बाद पहली बार था जब किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत मिला। मोदी ने वाराणसी और वडोदरा दोनों सीटों से जीत दर्ज की।
26 मई 2014 को नरेंद्र मोदी ने भारत के प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली।
पहला कार्यकाल (2014-2019): बड़े फैसलों का दौर
जनधन योजना
करोड़ों लोगों के बैंक खाते खुलवाकर वित्तीय समावेशन को बढ़ावा दिया गया।
स्वच्छ भारत मिशन
देशव्यापी स्वच्छता अभियान शुरू किया गया, जिसके तहत करोड़ों शौचालयों का निर्माण हुआ।
उज्ज्वला योजना
गरीब परिवारों की महिलाओं को एलपीजी कनेक्शन उपलब्ध कराए गए।
डिजिटल इंडिया
डिजिटल सेवाओं, ऑनलाइन भुगतान और तकनीकी ढांचे को बढ़ावा मिला।
जीएसटी
देशभर में एक राष्ट्र-एक कर व्यवस्था लागू की गई।
नोटबंदी
नवंबर 2016 में 500 और 1000 रुपये के पुराने नोट बंद करने का फैसला लिया गया, जो मोदी सरकार के सबसे चर्चित निर्णयों में शामिल रहा।
2019 लोकसभा चुनाव: और मजबूत जनादेश
2019 के चुनाव में भाजपा ने पहले से भी बेहतर प्रदर्शन किया। पुलवामा हमले और बालाकोट एयर स्ट्राइक के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा बड़ा चुनावी मुद्दा बनी।
भाजपा ने 303 सीटें जीतकर अपने दम पर बहुमत हासिल किया जबकि एनडीए ने लगभग 350 सीटों का आंकड़ा पार किया। नरेंद्र मोदी दूसरी बार प्रधानमंत्री बने।
दूसरा कार्यकाल (2019-2024):
मई 2019 में नरेंद्र मोदी ने दूसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने 303 सीटें जीतकर पहले से भी बड़ा जनादेश हासिल किया। इस जीत ने मोदी सरकार को कई महत्वपूर्ण और लंबे समय से लंबित निर्णय लेने का अवसर दिया। मोदी का दूसरा कार्यकाल राजनीतिक, संवैधानिक और आर्थिक दृष्टि से कई बड़े फैसलों के लिए याद किया जाता है।
दूसरे कार्यकाल की शुरुआत में ही अगस्त 2019 में केंद्र सरकार ने जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35ए के विशेष प्रावधानों को समाप्त कर दिया। सरकार ने इसे राष्ट्रीय एकीकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बताया। इसी कार्यकाल में नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) भी पारित किया गया, जिस पर देशभर में व्यापक राजनीतिक बहस हुई।
जनवरी 2020 के बाद कोविड-19 महामारी मोदी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती बनकर उभरी। महामारी के दौरान देशव्यापी लॉकडाउन लागू किया गया। गरीब परिवारों को मुफ्त राशन, आर्थिक सहायता और दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान के माध्यम से राहत पहुंचाने का प्रयास किया गया। भारत में विकसित कोविड वैक्सीन के बड़े पैमाने पर उपयोग को सरकार ने अपनी प्रमुख उपलब्धियों में शामिल किया।
आर्थिक मोर्चे पर सरकार ने “आत्मनिर्भर भारत” अभियान शुरू किया। विनिर्माण क्षेत्र को बढ़ावा देने, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन (PLI) योजनाओं और डिजिटल अर्थव्यवस्था के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया। इस दौरान यूपीआई आधारित डिजिटल भुगतान प्रणाली ने देश और दुनिया में नई पहचान बनाई।
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि मंदिर निर्माण का कार्य भी तेजी से आगे बढ़ा। जनवरी 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा का भव्य आयोजन हुआ, जिसे करोड़ों लोगों ने देखा।
विदेश नीति के क्षेत्र में भी भारत की भूमिका मजबूत हुई। अमेरिका, फ्रांस, जापान, ऑस्ट्रेलिया और खाड़ी देशों के साथ संबंधों में नई मजबूती आई। वर्ष 2023 में भारत की जी-20 अध्यक्षता और नई दिल्ली शिखर सम्मेलन को वैश्विक स्तर पर बड़ी कूटनीतिक सफलता माना गया।
कुल मिलाकर नरेंद्र मोदी का दूसरा कार्यकाल बड़े संवैधानिक निर्णयों, कोविड प्रबंधन, आत्मनिर्भर भारत अभियान, राम मंदिर निर्माण और वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती प्रतिष्ठा के लिए याद किया जाता है। यही उपलब्धियां 2024 के लोकसभा चुनाव में मोदी सरकार के लिए तीसरी पारी की आधारशिला भी बनीं।
निर्णायक फैसलों की राजनीति
अनुच्छेद 370 हटाना
अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 और 35A के विशेष प्रावधान हटाए गए।
राम मंदिर
अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का मार्ग प्रशस्त हुआ और जनवरी 2024 में प्राण प्रतिष्ठा कार्यक्रम आयोजित हुआ।
कोविड-19 प्रबंधन
महामारी के दौरान मुफ्त राशन, वैक्सीनेशन अभियान और आर्थिक पैकेज लागू किए गए।
आत्मनिर्भर भारत
घरेलू विनिर्माण और उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाओं को बढ़ावा दिया गया।
जी-20 शिखर सम्मेलन
भारत ने 2023 में जी-20 की सफल अध्यक्षता की, जिससे वैश्विक मंच पर उसकी भूमिका और मजबूत हुई।
विदेश नीति में कैसे बजा मोदी का डंका
नरेंद्र मोदी की विदेश नीति को उनकी सबसे महत्वपूर्ण उपलब्धियों में गिना जाता है।
अमेरिका के साथ संबंध
भारत-अमेरिका संबंध रणनीतिक साझेदारी के नए स्तर पर पहुंचे।
खाड़ी देशों से निकटता
यूएई, सऊदी अरब और अन्य खाड़ी देशों के साथ संबंधों में अभूतपूर्व सुधार हुआ।
क्वाड और इंडो-पैसिफिक
भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच रणनीतिक सहयोग मजबूत हुआ।
वैश्विक मंचों पर भारत
जलवायु परिवर्तन, आतंकवाद और विकासशील देशों के मुद्दों पर भारत की आवाज अधिक प्रभावी बनी। कई अंतरराष्ट्रीय मंचों पर मोदी की सक्रिय उपस्थिति ने भारत की वैश्विक पहचान को नई ऊंचाई दी।
2024 लोकसभा चुनाव और तीसरी पारी
2024 का चुनाव मोदी के लिए सबसे चुनौतीपूर्ण माना जा रहा था। विपक्षी दलों ने इंडिया गठबंधन बनाकर भाजपा को चुनौती दी।
हालांकि भाजपा अपने दम पर बहुमत के आंकड़े से नीचे रही, लेकिन एनडीए को स्पष्ट बहुमत मिला और नरेंद्र मोदी लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री बने। इसके साथ ही वह जवाहरलाल नेहरू के बाद लगातार तीसरा कार्यकाल हासिल करने वाले दूसरे प्रधानमंत्री बन गए।
मोदी युग की प्रमुख उपलब्धियां
- आधारभूत ढांचे का तेजी से विस्तार
- डिजिटल भुगतान और UPI क्रांति
- गरीब कल्याण योजनाओं का विस्तार
- भारत को दुनिया की प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में शामिल करना
- वैश्विक मंचों पर भारत की बढ़ती भूमिका
- रक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा पर विशेष जोर
- रेलवे, एक्सप्रेसवे और हवाई अड्डों का विस्तार
- प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) व्यवस्था को मजबूत करना
- स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा देना
- विकसित भारत 2047 का विजन प्रस्तुत करना।
नरेंद्र मोदी का 25 वर्षों का राजनीतिक और प्रशासनिक सफर भारतीय लोकतंत्र के सबसे महत्वपूर्ण अध्यायों में गिना जाएगा। गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में शुरू हुई यात्रा ने उन्हें देश का सबसे प्रभावशाली नेता बना दिया। समर्थकों के लिए वह विकास, निर्णायक नेतृत्व और वैश्विक प्रतिष्ठा के प्रतीक हैं, जबकि आलोचक उनके शासन मॉडल और कुछ नीतिगत फैसलों पर सवाल उठाते रहे हैं। इसके बावजूद यह तथ्य निर्विवाद है कि पिछले ढाई दशक में भारतीय राजनीति की दिशा और विमर्श को सबसे अधिक प्रभावित करने वाले नेता नरेंद्र मोदी ही रहे हैं।
