विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने न्यूयॉर्क में 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा में शिरकत करते हुए।
नई दिल्ली [TV 47 न्यूज नेटवर्क ]। संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) का मंच एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक टकराव का गवाह बना। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अपने संबोधन में जम्मू-कश्मीर और सिंधु जल संधि का मुद्दा उठाने की कोशिश की, जबकि भारत ने इसे पाकिस्तान की पुरानी रणनीति बताते हुए खारिज कर दिया।
दिलचस्प बात यह रही कि न्यूयॉर्क में एक पाकिस्तानी पत्रकार द्वारा पूछे गए सवाल पर भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर की प्रतिक्रिया सबसे अधिक चर्चा में रही। जब पत्रकार ने भारत पर पाकिस्तान में आतंकवाद प्रायोजित करने का आरोप लगाया तो जयशंकर ने जवाब दिया, “एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है?” यह टिप्पणी कुछ ही मिनटों में वैश्विक मीडिया और सोशल मीडिया की सुर्खियां बन गई।
आखिर पाकिस्तान फिर कश्मीर क्यों उठा रहा है?
पाकिस्तान कई दशकों से संयुक्त राष्ट्र के मंच पर कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय बनाने की कोशिश करता रहा है। इस बार भी शहबाज शरीफ ने अपने प्रतिनिधिमंडल के साथ न्यूयॉर्क पहुंचने से पहले संकेत दे दिए थे कि उनके भाषण में कश्मीर और सिंधु जल संधि प्रमुख विषय होंगे।
विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान घरेलू आर्थिक और राजनीतिक चुनौतियों के बीच कश्मीर मुद्दे को अपने पारंपरिक राजनीतिक नैरेटिव के रूप में इस्तेमाल करता है। संयुक्त राष्ट्र जैसा वैश्विक मंच उसे अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करने का अवसर देता है।
हालांकि पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान को इस मुद्दे पर व्यापक अंतरराष्ट्रीय समर्थन नहीं मिला है। अधिकांश देशों ने भारत और पाकिस्तान के बीच द्विपक्षीय संवाद को ही समाधान का रास्ता माना है।
भारत की स्पष्ट नीति
भारत लगातार कहता रहा है कि जम्मू-कश्मीर उसका अभिन्न अंग है और यह उसका आंतरिक विषय है। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में भी कई मौकों पर पाकिस्तान पर झूठे और पक्षपातपूर्ण दुष्प्रचार फैलाने का आरोप लगाया है।
नई दिल्ली का तर्क है कि पाकिस्तान कश्मीर पर चर्चा करते समय सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे को नजरअंदाज करता है। भारत का कहना है कि जब तक आतंकवाद और कट्टरपंथ को समर्थन मिलता रहेगा, तब तक किसी भी प्रकार की सार्थक बातचीत मुश्किल है।
पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल पर जयशंकर का जवाब क्यों बना सुर्खी?
UNGA के दौरान एक कार्यक्रम में पत्रकारों से बातचीत के समय एक पाकिस्तानी पत्रकार ने जयशंकर से पूछा कि भारत पाकिस्तान में आतंकवाद को समर्थन देना कब बंद करेगा। इस पर जयशंकर ने तुरंत जवाब दिया, “एक आतंकवादी देश मुझसे यह सवाल पूछ रहा है। Come on.”
इसके बाद भारत के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि हरिश पर्वथनेनी ने भी पत्रकार से कहा कि उसे उसका जवाब मिल चुका है।
यह घटना इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि भारत पिछले कुछ वर्षों से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर आतंकवाद के मुद्दे को प्रमुखता से उठाता रहा है। भारत की कोशिश रही है कि वैश्विक विमर्श में पाकिस्तान की छवि एक ऐसे देश की बने जो आतंकवाद के खिलाफ पर्याप्त कार्रवाई नहीं कर पाया है।
शहबाज शरीफ का ‘सिंधु राग’
कश्मीर के साथ-साथ पाकिस्तान ने सिंधु जल संधि का मुद्दा भी उठाया। इस्लामाबाद का दावा है कि भारत की नीतियों से संधि प्रभावित हो सकती है। दूसरी ओर भारत का कहना है कि वह संधि के प्रावधानों के तहत अपने अधिकारों का उपयोग कर रहा है।
सिंधु जल संधि का विषय दोनों देशों के बीच लंबे समय से संवेदनशील रहा है। हालांकि भारत ने हाल के वर्षों में बार-बार यह संकेत दिया है कि आतंकवाद और द्विपक्षीय संबंधों के व्यापक परिप्रेक्ष्य में जल सहयोग के मुद्दों की भी समीक्षा की जा सकती है।
जयशंकर की व्यस्त कूटनीति
UNGA के दौरान जयशंकर का फोकस केवल पाकिस्तान के आरोपों का जवाब देना नहीं था। उन्होंने रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव से मुलाकात कर द्विपक्षीय संबंधों और वैश्विक मुद्दों पर चर्चा की। इसके अलावा ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के साथ भी खाड़ी क्षेत्र की स्थिति पर विचार-विमर्श किया।
यह दर्शाता है कि भारत की विदेश नीति का दायरा केवल क्षेत्रीय विवादों तक सीमित नहीं है, बल्कि वह वैश्विक भू-राजनीतिक मुद्दों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहा है।
BRICS के जरिए वैश्विक प्रभाव बढ़ाने की कोशिश
जयशंकर ने BRICS देशों की बैठक में भी हिस्सा लिया और समूह के सहयोग की समीक्षा की। ब्रिक्स में ब्राज़ील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका सहित नए सदस्य देश शामिल हैं। भारत ने हाल ही में इस समूह के शिखर सम्मेलन की मेजबानी भी की थी।
विशेषज्ञों का मानना है कि BRICS जैसे मंच भारत को वैश्विक दक्षिण की आवाज़ के रूप में उभरने का अवसर देते हैं। इससे संयुक्त राष्ट्र जैसे मंचों पर भी भारत की कूटनीतिक स्थिति मजबूत होती है।
पाकिस्तान की रणनीति कितनी सफल?
कश्मीर मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उठाना पाकिस्तान की पुरानी रणनीति रही है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में उसे अपेक्षित समर्थन नहीं मिला है। कई बार पाकिस्तान के दावों का भारत ने तत्काल और सशक्त जवाब दिया है।
राजनयिक विश्लेषकों के अनुसार पाकिस्तान के लिए सबसे बड़ी चुनौती यह है कि वैश्विक एजेंडा अब आतंकवाद, आर्थिक संकट, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु परिवर्तन और क्षेत्रीय संघर्षों जैसे मुद्दों पर केंद्रित है। ऐसे में केवल कश्मीर को लेकर अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाना पहले की तुलना में अधिक कठिन हो गया है।
भारत की बदलती कूटनीतिक शैली
जयशंकर के कार्यकाल में भारत की विदेश नीति की एक विशेषता यह रही है कि भारत आरोपों का जवाब देने में अधिक आक्रामक और स्पष्ट रुख अपनाता दिखाई देता है। पाकिस्तान के साथ-साथ अन्य वैश्विक मुद्दों पर भी भारत अपने हितों को खुलकर सामने रख रहा है।
संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तानी पत्रकार को दिया गया जवाब इसी बदलती कूटनीतिक शैली का उदाहरण माना जा रहा है। भारत अब केवल बचाव की मुद्रा में नहीं दिखना चाहता, बल्कि वह अपने विरोधियों के आरोपों को सीधे चुनौती देने की रणनीति अपना रहा है।
