लखनऊ । अयोध्या का राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। जनवरी 2024 में रामलला की प्राण प्रतिष्ठा के बाद देश-दुनिया से आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ी और इसके साथ ही मंदिर में चढ़ावे की राशि में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई। लेकिन जून 2026 में मंदिर के चढ़ावे और दान राशि को लेकर उठे आरोपों ने एक बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक विवाद खड़ा कर दिया।
विपक्षी दलों के आरोप, सोशल मीडिया पर वायरल दावे, ट्रस्ट की सफाई और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा विशेष जांच दल (SIT) का गठन—इन सबने इस मामले को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया। अब सवाल यह है कि आखिर पूरा विवाद क्या है और एसआईटी अब तक क्या जांच कर चुकी है?
विवाद की शुरुआत कैसे हुई?
विवाद उस समय तेज हुआ जब समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया कि राम मंदिर में चढ़ावे की राशि के संबंध में गंभीर अनियमितताओं की खबरें सामने आ रही हैं। इसके बाद सोशल मीडिया पर कई तरह के दावे वायरल होने लगे कि मंदिर में चढ़ाए गए करोड़ों रुपये का हिसाब स्पष्ट नहीं है।
इन आरोपों ने राजनीतिक रंग लेना शुरू कर दिया। विपक्षी दलों ने मामले की स्वतंत्र जांच की मांग की जबकि मंदिर ट्रस्ट ने आरोपों को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच की बात कही।
ट्रस्ट की प्रतिक्रिया
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट ने कहा कि मंदिर और चढ़ावे से जुड़ी व्यवस्था पूरी तरह पारदर्शी है, लेकिन लगातार फैल रही चर्चाओं और आरोपों के कारण श्रद्धालुओं के मन में भ्रम पैदा हो सकता है।
ट्रस्ट ने उत्तर प्रदेश सरकार से मामले की जांच कराने का अनुरोध किया ताकि तथ्यों को सार्वजनिक किया जा सके और किसी भी प्रकार की अफवाह पर विराम लगाया जा सके।
योगी सरकार की बड़ी कार्रवाई
विवाद बढ़ने के बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने तीन सदस्यीय एसआईटी गठित कर दी। टीम को आरोपों की जांच कर प्रारंभिक रिपोर्ट सात दिन और अंतिम रिपोर्ट 15 दिन के भीतर देने का निर्देश दिया गया।
एसआईटी में वरिष्ठ प्रशासनिक, पुलिस और वित्तीय अधिकारियों को शामिल किया गया ताकि जांच बहुआयामी तरीके से हो सके।
एसआईटी की अयोध्या में एंट्री
जांच दल अयोध्या पहुंचा और उसने अपनी पड़ताल मंदिर परिसर से शुरू की। शुरुआती जांच का केंद्र कैश काउंटिंग रूम रहा, जहां दान पेटियों से निकाली गई राशि की गिनती की जाती है।
सूत्रों के अनुसार जांच दल ने नकदी गिनने की प्रक्रिया, रिकॉर्ड प्रणाली और सुरक्षा प्रोटोकॉल का अध्ययन किया।
सीसीटीवी फुटेज की जांच
एसआईटी ने मंदिर परिसर के सीसीटीवी रिकॉर्ड भी खंगाले। जांच टीम ने दान पेटियों से नकदी निकालने, उसे सुरक्षित रखने और बैंक तक पहुंचाने की पूरी प्रक्रिया का अध्ययन किया।
किस समय किस कर्मचारी ने क्या जिम्मेदारी निभाई, इसकी भी समीक्षा की गई। जांच का उद्देश्य यह पता लगाना है कि कहीं किसी स्तर पर प्रक्रियागत कमी या अनियमितता तो नहीं हुई।
कर्मचारियों और संबंधित लोगों से पूछताछ
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार एसआईटी ने कई कर्मचारियों, नकदी गिनने वाले कर्मियों और अन्य संबंधित लोगों से पूछताछ की। कुछ रिपोर्टों में 11 लोगों से पूछताछ का उल्लेख है, जबकि अन्य में दर्जनों लोगों से बातचीत की बात सामने आई है।
जांच का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि दान संग्रहण और लेखांकन की प्रक्रिया में कहीं कोई गड़बड़ी हुई या नहीं।
वित्तीय रिकॉर्ड की जांच
एसआईटी ने 2021 से जुड़े दस्तावेजों सहित विभिन्न वित्तीय अभिलेखों की भी समीक्षा की है। बैंक रिकॉर्ड, जमा पर्चियां, कैश बुक और संबंधित दस्तावेज जांच के दायरे में बताए जा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी वित्तीय विवाद में दस्तावेजी साक्ष्य सबसे महत्वपूर्ण होते हैं और अंतिम निष्कर्ष इन्हीं के आधार पर निकाला जाएगा।
राजनीति भी हुई गर्म
इस मुद्दे ने राजनीतिक बहस को भी तेज कर दिया। समाजवादी पार्टी, कांग्रेस और भाजपा के नेताओं के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। कई नेताओं ने जांच की मांग की, जबकि कुछ ने ट्रस्ट की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए।
दूसरी ओर ट्रस्ट और सरकार का कहना है कि जांच का उद्देश्य सच सामने लाना और श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखना है।
श्रद्धालुओं की चिंता
राम मंदिर केवल एक धार्मिक स्थल नहीं बल्कि करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक है। इसलिए चढ़ावे और दान से जुड़ा कोई भी विवाद स्वाभाविक रूप से भावनात्मक प्रतिक्रिया पैदा करता है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पारदर्शिता, ऑडिट और जवाबदेही जैसी व्यवस्थाएं धार्मिक संस्थानों के प्रति जनता का विश्वास बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
आगे क्या होगा?
एसआईटी की जांच अभी जारी है। अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि आरोपों में कितनी सच्चाई है, क्या कोई वित्तीय अनियमितता हुई है या मामला केवल अफवाहों और गलतफहमियों का परिणाम है।
यदि जांच में किसी प्रकार की गड़बड़ी सामने आती है तो संबंधित व्यक्तियों के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। वहीं यदि आरोप निराधार साबित होते हैं तो इससे ट्रस्ट की साख और मजबूत हो सकती है।
