नोएडा [TV 47 न्यूज नेटवर्क ]। देशभर में मानसून अब पूरी तरह सक्रिय हो चुका है। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने उत्तर प्रदेश सहित 17 राज्यों में भारी बारिश, आंधी-तूफान और बिजली गिरने की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों तक देश के कई हिस्सों में सामान्य से अधिक बारिश हो सकती है, जिससे जनजीवन प्रभावित होने की आशंका है।
विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, बिहार, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर, राजस्थान, पंजाब, हरियाणा, महाराष्ट्र, कर्नाटक और पूर्वोत्तर राज्यों में मौसम को लेकर हाई अलर्ट जारी किया गया है। कई क्षेत्रों में जलभराव, बाढ़, भूस्खलन और यातायात बाधित होने की आशंका भी जताई गई है।
क्यों सक्रिय हुआ मानसून?
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार बंगाल की खाड़ी और आसपास बने कम दबाव के क्षेत्र (Low Pressure Area) तथा मानसूनी ट्रफ के सक्रिय होने से देश के अधिकांश हिस्सों में नमी तेजी से पहुंच रही है। इसके कारण भारी बारिश की परिस्थितियां बन रही हैं। IMD का कहना है कि अगले दो से तीन दिनों में मानसून पूरे देश को कवर कर सकता है।
उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा चिंता क्यों?
उत्तर प्रदेश इस समय मानसून की सबसे सक्रिय पट्टी में शामिल है। मौसम विभाग ने प्रदेश के सभी 75 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। नोएडा, गाजियाबाद, लखनऊ, कानपुर, प्रयागराज, वाराणसी, गोरखपुर, बरेली, अयोध्या और मेरठ सहित अधिकांश जिलों में अगले पांच दिनों तक लगातार बारिश की संभावना है।
विशेषज्ञों का कहना है कि पूर्वांचल और तराई क्षेत्रों में भारी से अति भारी बारिश दर्ज हो सकती है। इससे नदियों का जलस्तर बढ़ने और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति बनने की आशंका है।
दिल्ली-एनसीआर में ऑरेंज अलर्ट
दिल्ली, नोएडा और गुरुग्राम में भी भारी बारिश का दौर जारी है। IMD ने ऑरेंज अलर्ट जारी करते हुए अगले 24 घंटों में 180 से 250 मिमी तक बारिश की संभावना जताई है। कई क्षेत्रों में जलभराव और यातायात प्रभावित होने की खबरें सामने आई हैं।
बारिश के चलते एयरलाइंस ने भी यात्रियों के लिए एडवाइजरी जारी की है और उड़ानों में देरी की आशंका जताई है।
पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन का खतरा
उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में लगातार बारिश के कारण भूस्खलन और सड़क अवरोध की घटनाएं बढ़ सकती हैं। मौसम विभाग ने पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी है।
हिमाचल प्रदेश में प्रशासन ने आपदा प्रबंधन टीमों को अलर्ट मोड पर रखा है और सड़कों की निगरानी बढ़ा दी है।
महाराष्ट्र और पश्चिमी तट पर भी भारी बारिश
महाराष्ट्र, कर्नाटक और केरल में मानसून की सक्रियता बनी हुई है। पश्चिमी तट के कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश दर्ज की जा रही है। मुंबई महानगर क्षेत्र में पहले ही रेड अलर्ट जारी किया जा चुका है और कई जिलों में स्कूल बंद रखने के आदेश दिए गए हैं।
केरल में भूस्खलन ने बढ़ाई चिंता
केरल के वायनाड क्षेत्र में भारी बारिश के कारण भूस्खलन की घटना सामने आई है, जिसमें लोगों की मौत और कई के लापता होने की खबर है। यह घटना दर्शाती है कि लगातार हो रही बारिश किस प्रकार आपदा का रूप ले सकती है।
किसानों के लिए राहत या चुनौती? मानसून की बारिश का कृषि पर दोहरा असर
देश के अधिकांश हिस्सों में सक्रिय हुए मानसून ने किसानों के लिए राहत और चुनौती दोनों स्थितियां पैदा कर दी हैं। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि समय पर और संतुलित बारिश खरीफ फसलों के लिए बेहद फायदेमंद होती है, लेकिन अत्यधिक वर्षा कई बार किसानों की मेहनत पर पानी फेर सकती है।
किसानों को मिलने वाली राहत
उत्तर प्रदेश, बिहार, मध्य प्रदेश और अन्य कृषि प्रधान राज्यों में हो रही बारिश से धान की रोपाई को गति मिली है। जिन क्षेत्रों में किसान पर्याप्त पानी का इंतजार कर रहे थे, वहां खेतों में नमी बढ़ने से बुवाई और रोपाई का कार्य तेजी से शुरू हो गया है।
बारिश का दूसरा बड़ा लाभ भूजल स्तर में सुधार के रूप में देखने को मिलता है। लगातार वर्षा से तालाब, नहरें और जलाशय भरते हैं, जिससे सिंचाई के लिए पानी की उपलब्धता बढ़ती है। इसके अलावा मक्का, सोयाबीन, बाजरा, ज्वार और अन्य खरीफ फसलों को भी पर्याप्त नमी मिलने से उत्पादन बेहतर होने की उम्मीद बढ़ जाती है।
किसानों के सामने चुनौतियां
हालांकि अत्यधिक बारिश किसानों के लिए चिंता का कारण भी बन सकती है। लगातार और तेज वर्षा से खेतों में जलभराव की स्थिति पैदा हो जाती है, जिससे फसलों की जड़ें सड़ने लगती हैं और पौधों का विकास प्रभावित होता है।
विशेष रूप से सब्जी, दलहन और तिलहन फसलें अधिक पानी को सहन नहीं कर पातीं। ऐसे में टमाटर, मिर्च, अरहर, उड़द और मूंग जैसी फसलों को नुकसान होने की आशंका बढ़ जाती है।
इसके अलावा गंगा, घाघरा, शारदा, राप्ती और अन्य नदियों के किनारे खेती करने वाले किसानों को अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत है। यदि नदियों का जलस्तर बढ़ता है तो बाढ़ की स्थिति फसलों को भारी नुकसान पहुंचा सकती है।
विशेषज्ञों की सलाह
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि संतुलित और नियमित वर्षा कृषि के लिए वरदान साबित होती है, लेकिन अत्यधिक बारिश नुकसानदायक हो सकती है। किसानों को खेतों में जल निकासी की उचित व्यवस्था करनी चाहिए और मौसम विभाग की चेतावनियों पर लगातार नजर रखनी चाहिए। सही प्रबंधन के जरिए मानसून की बारिश को लाभ में बदला जा सकता है।
