नई दिल्ली [TV 47 न्यूज नेटवर्क ]। गुजरात में राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरदार वल्लभभाई पटेल को उनकी 151वीं जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की। दुनिया की सबसे ऊंची प्रतिमा स्टैच्यू ऑफ यूनिटी के सामने प्रधानमंत्री ने लौह पुरुष के योगदान को याद किया। इस अवसर पर उन्होंने गुजरात के एकता नगर में 400 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण, उद्घाटन और शिलान्यास किया। दूसरी तरफ, गुजरात के बनासकांठा में प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए पहुंचे पशुपालकों और किसानों के हाथों में ‘मोदी कहीं नहीं जाएगा’ के बैनर चर्चा का विषय बन गए।
प्रधानमंत्री के गुजरात दौरे ने एक साथ तीन बड़े संदेश दिए। पहला, सरदार पटेल की विरासत को राष्ट्रीय एकता और मजबूत भारत के विचार से जोड़ना। दूसरा, पशुपालन, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को विकास के केंद्र में रखना। तीसरा, विपक्ष की राजनीति और उसके बयानों पर सीधा हमला करना। प्रधानमंत्री ने आरोप लगाया कि विपक्ष देश में अफरातफरी का माहौल पैदा करना चाहता था, ताकि मोदी को बदनाम किया जा सके। ऐसे में गुजरात का यह दौरा केवल विकास परियोजनाओं तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें राष्ट्रीय राजनीति का संदेश भी साफ दिखाई दिया।
1. सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर मोदी का नमन, राष्ट्रीय एकता का संदेश
31 अक्टूबर भारत के इतिहास में महत्वपूर्ण तारीख है। इसी दिन 1875 में सरदार वल्लभभाई पटेल का जन्म हुआ था। देश की आजादी के बाद रियासतों के एकीकरण में उनकी भूमिका के कारण उन्हें लौह पुरुष और भारत के एकीकरण का शिल्पकार कहा जाता है।
सरदार पटेल की 151वीं जयंती पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुजरात के एकता नगर पहुंचे। यहां नर्मदा नदी के किनारे स्थित 182 मीटर ऊंची स्टैच्यू ऑफ यूनिटी पर उन्होंने पुष्पांजलि अर्पित की।
प्रधानमंत्री ने सरदार पटेल को अखंड भारत का प्रणेता बताते हुए उनके योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि मजबूत, समृद्ध और समर्थ भारत के निर्माण के लिए सरदार पटेल ने अपना जीवन समर्पित कर दिया था। उनका त्याग और समर्पण विकसित तथा आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के लिए प्रेरणा देता है।
यहां यह समझना जरूरी है कि स्टैच्यू ऑफ यूनिटी केवल एक विशाल प्रतिमा नहीं है। यह भारत के राजनीतिक एकीकरण और राष्ट्रीय एकता के विचार का प्रतीक भी है।
आजादी के समय देश में 500 से अधिक रियासतें थीं। इन रियासतों को भारतीय संघ में शामिल करना एक बड़ी चुनौती थी। सरदार पटेल ने वीपी मेनन के साथ मिलकर इस कठिन काम को पूरा करने में निर्णायक भूमिका निभाई।
प्रधानमंत्री मोदी के लिए सरदार पटेल की विरासत राजनीतिक और वैचारिक रूप से भी महत्वपूर्ण रही है। भाजपा लंबे समय से पटेल को राष्ट्रीय एकता, मजबूत नेतृत्व और राष्ट्र निर्माण के प्रतीक के रूप में प्रस्तुत करती रही है।
2. 182 मीटर की स्टैच्यू ऑफ यूनिटी क्यों है खास?
इस प्रतिमा का निर्माण भारत की इंजीनियरिंग क्षमता और आधुनिक तकनीक का बड़ा उदाहरण माना जाता है।
प्रतिमा के आसपास पर्यटन और आधारभूत ढांचे का विकास किया गया है। यहां संग्रहालय, प्रदर्शनी स्थल, व्यूइंग गैलरी और अन्य पर्यटन सुविधाएं मौजूद हैं।
एकता नगर को पर्यटन के बड़े केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना भी इसी सोच का हिस्सा है। सरकार का प्रयास है कि यहां आने वाले पर्यटकों को केवल प्रतिमा देखने का अवसर न मिले, बल्कि वे गुजरात की संस्कृति, प्रकृति और भारत की विविधता का अनुभव भी कर सकें।
इस बार राष्ट्रीय एकता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री ने पर्यटन और बुनियादी ढांचे से जुड़ी नई परियोजनाओं की सौगात दी।
3. एकता नगर को 400 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं की सौगात
प्रधानमंत्री मोदी ने 31 अक्टूबर को एकता नगर में 400 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का लोकार्पण, उद्घाटन और शिलान्यास किया।
इन परियोजनाओं का मुख्य उद्देश्य एकता नगर में पर्यटन सुविधाओं को बेहतर बनाना, पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना और स्थानीय आधारभूत ढांचे को मजबूत करना है।
प्रमुख परियोजनाओं में शामिल हैं:
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सीवेज और जल उपचार संयंत्र।
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नर्मदा घाट का उन्नयन।
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एकता नगर में आकर्षक फसाड लाइटिंग।
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आईआरसीटीसी होटल परियोजना।
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रेनफॉरेस्ट और यूनिटी इको ट्रेल।
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गोरा-भद्रा सड़क विकास।
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जीरो वेस्ट स्मार्ट सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट परियोजना।
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खलवानी इको टूरिज्म विकास।
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कैक्टस और बटरफ्लाई गार्डन का एकीकृत विकास।
इन परियोजनाओं से एकता नगर में पर्यटकों को बेहतर सुविधाएं मिलने की उम्मीद है। खास बात यह है कि इन योजनाओं में पर्यटन के साथ पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान दिया गया है। सीवेज ट्रीटमेंट और जीरो वेस्ट प्रबंधन जैसी परियोजनाएं इस क्षेत्र में बढ़ते पर्यटन के पर्यावरणीय प्रभाव को नियंत्रित करने में मदद कर सकती हैं।
एकता नगर में पर्यटकों की संख्या बढ़ने के साथ होटल, परिवहन, खानपान और स्थानीय रोजगार के अवसर भी बढ़ सकते हैं।
4. ‘मोदी कहीं नहीं जाएगा’ के बैनर लेकर क्यों पहुंचे पशुपालक?
प्रधानमंत्री के स्वागत के लिए पहुंचे लोगों के हाथों में ‘मोदी कहीं नहीं जाएगा’ लिखे बैनर दिखाई दिए। दरअसल, इन बैनरों के पीछे कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे का बयान भी एक बड़ा राजनीतिक कारण था। खरगे ने पटना में एक राजनीतिक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री मोदी को लेकर विवादित टिप्पणी की थी।
इसके जवाब में भाजपा नेताओं और समर्थकों ने ‘मोदी कहीं नहीं जाएगा’ का नारा दिया। बनासकांठा में यह नारा केवल राजनीतिक प्रतिक्रिया के रूप में नहीं दिखाई दिया। भाजपा नेताओं ने इसे प्रधानमंत्री और आम जनता के बीच विश्वास का प्रतीक बताया।
गुजरात के उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी ने भी इस नारे का उल्लेख करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री को देश के 140 करोड़ लोगों का समर्थन प्राप्त है।
प्रधानमंत्री के काफिले के रास्ते में भी लोगों ने बैनर लेकर उनका स्वागत किया। डेयरी और पशुपालन केंद्र के कर्मचारियों ने भी उनके साथ तस्वीर खिंचवाने के बाद नारे लगाए।
हालांकि, इस तरह के नारों को जनता के व्यापक राजनीतिक समर्थन का अंतिम प्रमाण नहीं माना जा सकता। लेकिन यह जरूर है कि भाजपा ने इसे खरगे के बयान के जवाब में एक राजनीतिक संदेश के रूप में इस्तेमाल किया।
5. पशुपालकों और किसानों के बीच प्रधानमंत्री ने क्या कहा?
बनासकांठा में प्रधानमंत्री ने कृषि और पशुपालन क्षेत्र को भारत की अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बताया। उन्होंने कहा कि भारत की कृषि व्यवस्था को आधुनिक तकनीक और वैज्ञानिक अनुसंधान से जोड़ने की जरूरत है।
प्रधानमंत्री ने पशुओं के स्वास्थ्य, दूध उत्पादन, नस्ल सुधार और किसानों की आमदनी बढ़ाने के लिए सरकार की विभिन्न योजनाओं का उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि पशुओं को खुरपका-मुंहपका जैसी बीमारियों से बचाने के लिए बड़े स्तर पर टीकाकरण अभियान चलाया गया है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि पशुपालकों को गोबर से अतिरिक्त आमदनी प्राप्त करने के अवसर मिलने चाहिए। गोबर से बायोगैस और बायो-सीएनजी बनाने की योजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे सकती हैं।
इसका महत्व इसलिए भी है क्योंकि भारत में बड़ी संख्या में ग्रामीण परिवार खेती के साथ पशुपालन पर निर्भर हैं।
अगर पशुपालकों को दूध के अतिरिक्त गोबर, जैविक खाद और ऊर्जा उत्पादन से भी आमदनी होने लगे तो उनकी आर्थिक स्थिति बेहतर हो सकती है।
6. भारत बोवाइन ब्रीडिंग एंड रिसर्च सेंटर क्यों है महत्वपूर्ण?
यह केंद्र करीब 127 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया गया है। इसका उद्देश्य देशी पशु नस्लों के संरक्षण, नस्ल सुधार और आधुनिक प्रजनन तकनीकों को बढ़ावा देना है।
यह विशेष रूप से कांकरेज नस्ल के पशुओं के लिए महत्वपूर्ण है। कांकरेज गुजरात की प्रमुख देशी पशु नस्लों में शामिल है। इस नस्ल के पशु अपनी उपयोगिता और अनुकूलन क्षमता के लिए जाने जाते हैं।
इस केंद्र में आधुनिक प्रजनन तकनीकों, भ्रूण प्रत्यारोपण और इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन जैसी सुविधाओं के माध्यम से नस्ल सुधार पर काम किया जाएगा।
सरकार के अनुसार, इन तकनीकों से नस्ल सुधार की प्रक्रिया 10 से 20 गुना तक तेज करने में मदद मिल सकती है। यह परियोजना पशुपालन क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
भारत में दूध उत्पादन का बड़ा हिस्सा छोटे और सीमांत पशुपालकों से आता है। ऐसे में बेहतर नस्ल, पशु स्वास्थ्य और वैज्ञानिक प्रबंधन से ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने की संभावनाएं हैं।
7. गोबर से बायो-सीएनजी बनाने की तैयारी, पशुपालकों को मिलेगा नया बाजार
बनासकांठा दौरे के दौरान प्रधानमंत्री ने डेयरी क्षेत्र से जुड़ी अन्य परियोजनाओं की भी शुरुआत की। बनास डेयरी की ओर से थराद और राधनपुर में दो बायो-सीएनजी संयंत्रों की आधारशिला रखी गई।
इन संयंत्रों में प्रतिदिन क्रमशः 75 मीट्रिक टन और 100 मीट्रिक टन गोबर के प्रसंस्करण की क्षमता होगी। इन परियोजनाओं के पीछे दो प्रमुख उद्देश्य हैं।
पहला, पशुओं के गोबर का उपयोग ऊर्जा उत्पादन में करना। दूसरा, ग्रामीण क्षेत्रों में स्वच्छ ऊर्जा और अतिरिक्त रोजगार के अवसर पैदा करना।
भारत में पशुपालन का दायरा बहुत बड़ा है। लेकिन गोबर का एक बड़ा हिस्सा अभी भी पारंपरिक तरीकों से इस्तेमाल होता है।
यदि इसे व्यवस्थित तरीके से बायोगैस और बायो-सीएनजी उत्पादन से जोड़ा जाए तो यह ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए अतिरिक्त आय का स्रोत बन सकता है।
8. विपक्ष पर मोदी का हमला, बोले- अफरातफरी फैलाकर बदनाम करने की कोशिश
गुजरात दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने विपक्ष पर तीखा राजनीतिक हमला किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग देश में संकट पैदा होने पर खुश होते हैं। उन्हें देश की कठिनाइयों में राजनीतिक अवसर दिखाई देता है।
प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष और उसके कारण वैश्विक स्तर पर पैदा हुई आर्थिक चुनौतियों का उल्लेख किया।
उन्होंने कहा कि विपक्ष ने खाद और रसोई गैस की कमी को लेकर अफवाहें फैलाने की कोशिश की। प्रधानमंत्री के मुताबिक, किसानों को खाद नहीं मिलने की बात कहकर कृत्रिम कतारें बनवाई गईं। महिलाओं को गैस की कमी का डर दिखाया गया।
उन्होंने आरोप लगाया कि इसका उद्देश्य देश में अफरातफरी फैलाना था, ताकि प्रधानमंत्री मोदी को बदनाम किया जा सके। प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार ने अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के बावजूद किसानों पर खाद की बढ़ी हुई कीमतों का बोझ नहीं पड़ने दिया।
उन्होंने यूरिया और डीएपी की कीमतों का उदाहरण देते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में इनकी कीमतें काफी अधिक हैं, जबकि भारतीय किसानों को सरकार की सहायता से कम कीमत पर खाद उपलब्ध कराई जाती है।
यह बयान ऐसे समय आया है जब अंतरराष्ट्रीय संघर्षों के कारण ऊर्जा, उर्वरक और आपूर्ति श्रृंखला को लेकर चिंताएं बनी हुई हैं।
हालांकि, विपक्ष पर लगाए गए आरोप प्रधानमंत्री का राजनीतिक पक्ष हैं। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि और खाद-गैस की वास्तविक उपलब्धता का आकलन अलग-अलग सरकारी आंकड़ों तथा जमीनी परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए।
9. मोदी का बड़ा संदेश- आखिरी सांस तक जनता की सेवा करूंगा
प्रधानमंत्री ने बनासकांठा की सभा में अपने राजनीतिक संकल्प को भी दोहराया। उन्होंने कहा कि वह जीवन के अंतिम क्षण तक देश और जनता की सेवा में लगे रहेंगे।
प्रधानमंत्री ने कहा कि जब तक भारत विकसित राष्ट्र नहीं बन जाता, आत्मनिर्भर नहीं हो जाता और दुनिया की अग्रणी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल नहीं हो जाता, तब तक उनका प्रयास जारी रहेगा।
उन्होंने किसानों को संबोधित करते हुए सरकार की विभिन्न योजनाओं का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने गेहूं और धान के किसानों को एमएसपी के माध्यम से भुगतान, प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, सोलर पंप और मृदा स्वास्थ्य कार्ड जैसी योजनाओं का जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि खेती को आधुनिक विज्ञान और तकनीक से जोड़ना आवश्यक है। यह संदेश केवल किसानों के लिए नहीं था। इसके जरिए प्रधानमंत्री ने अपनी सरकार की विकास नीति और राजनीतिक प्रतिबद्धता को सामने रखा।
10. 2027 और राष्ट्रीय राजनीति के लिहाज से क्या हैं इस दौरे के मायने?
मोदी का गुजरात दौरा कई स्तरों पर महत्वपूर्ण है। पहला, सरदार पटेल की 151वीं जयंती के जरिए राष्ट्रीय एकता और राष्ट्र निर्माण का संदेश दिया गया।
दूसरा, बनासकांठा जैसे ग्रामीण और पशुपालन आधारित क्षेत्र में कार्यक्रम करके भाजपा ने किसानों तथा पशुपालकों के बीच अपनी राजनीतिक पहुंच को मजबूत करने की कोशिश की।
तीसरा, ‘मोदी कहीं नहीं जाएगा’ के नारे ने कांग्रेस अध्यक्ष खरगे के बयान को फिर से राजनीतिक चर्चा के केंद्र में ला दिया। चौथा, विपक्ष पर अफवाह फैलाने और देश में अव्यवस्था पैदा करने के आरोप लगाकर प्रधानमंत्री ने राजनीतिक विमर्श को सरकार के विकास और विपक्ष की भूमिका के बीच केंद्रित करने का प्रयास किया।
पांचवां, एकता नगर में पर्यटन परियोजनाओं और बनासकांठा में पशुपालन से जुड़ी योजनाओं ने विकास के दो अलग-अलग मॉडल सामने रखे।
एक तरफ पर्यटन और आधारभूत ढांचे का विकास है, दूसरी तरफ ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पशुपालन को आधुनिक बनाने की कोशिश है।
हालांकि, इन योजनाओं की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इनका लाभ स्थानीय लोगों, किसानों और पशुपालकों तक कितना पहुंचता है।
पटेल की विरासत, विकास और राजनीति का संगम बना मोदी का गुजरात दौरा
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गुजरात दौरा केवल सरदार पटेल की जयंती पर श्रद्धांजलि देने तक सीमित नहीं रहा। इसमें विकास परियोजनाओं का शुभारंभ, पशुपालन क्षेत्र में वैज्ञानिक अनुसंधान, किसानों के हितों की चर्चा और विपक्ष पर राजनीतिक हमला जैसे कई पहलू शामिल रहे।
एकता नगर में 400 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाएं पर्यटन और आधारभूत ढांचे को नई दिशा देने का प्रयास हैं। वहीं बनासकांठा में पशुपालन और डेयरी क्षेत्र से जुड़ी योजनाएं ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की कोशिश हैं।
‘मोदी कहीं नहीं जाएगा’ के बैनर ने इस दौरे को राजनीतिक रंग भी दिया। प्रधानमंत्री ने विपक्ष पर अफरातफरी फैलाने और उन्हें बदनाम करने की कोशिश का आरोप लगाया।
अब सवाल यह है कि इन विकास परियोजनाओं का जमीन पर कितना असर दिखाई देता है और भाजपा इस राजनीतिक संदेश को आने वाले चुनावों में किस तरह इस्तेमाल करती है।
