लखनऊ [TV 47 न्यूज नेटवर्क ]। उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 11 सीटों के लिए चुनाव ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले सियासी मुकाबले को तेज कर दिया है। पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्रों की इन सीटों पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच कड़ी टक्कर है। मतदान के दौरान मतदाता सूची में गड़बड़ी, मतदाताओं पर दबाव और चुनावी प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं को लेकर भी विवाद सामने आए हैं। दोनों दलों की रणनीति, उम्मीदवारों का चयन और मतदाताओं तक पहुंच बनाने की कोशिशें इस चुनाव को खास बना रही हैं।
इस चुनाव का महत्व केवल विधान परिषद की सीटों तक सीमित नहीं है। इसके नतीजे यह संकेत भी देंगे कि शिक्षकों, कर्मचारियों, स्नातकों और पेशेवर वर्ग के बीच भाजपा और सपा की पकड़ कैसी है। हालांकि, इन सीटों के परिणाम को सीधे विधानसभा चुनाव का परिणाम मानना सही नहीं होगा।
यूपी एमएलसी चुनाव 2026: पांच बड़ी बातें
- 11 सीटों पर मुकाबला: पांच स्नातक और छह शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र।
- भाजपा की प्रतिष्ठा दांव पर: पार्टी अपनी मौजूदा सीटें बचाने और विपक्षी खेमे में सेंध लगाने की कोशिश में है।
- सपा की चुनौती: शिक्षक-कर्मचारी मुद्दों और अपने पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) राजनीतिक अभियान के सहारे बढ़त बनाने की कोशिश।
- आरोप-प्रत्यारोप: मतदाता सूची, कथित दबाव और मतदान केंद्रों की व्यवस्था को लेकर शिकायतें।
- 2027 पर नजर: परिणाम दोनों दलों के संगठनात्मक प्रदर्शन और राजनीतिक माहौल का संकेत दे सकते हैं।
उत्तर प्रदेश की 11 एमएलसी सीटों का चुनाव भाजपा और सपा दोनों के लिए राजनीतिक महत्व रखता है। भाजपा अपनी मौजूदा पकड़ बनाए रखने और विपक्ष को पीछे धकेलने की कोशिश में है। सपा शिक्षक-कर्मचारी मुद्दों, पीडीए अभियान और स्थानीय संपर्क के सहारे चुनौती दे रही है।
मतदाता सूची से संबंधित विवाद और मतदान के दौरान आई शिकायतें चुनाव प्रशासन की निष्पक्षता और जवाबदेही को भी चर्चा के केंद्र में ले आई हैं। इन मामलों का सही समाधान केवल आरोप-प्रत्यारोप से नहीं, बल्कि पारदर्शी जांच और नियमों के पालन से संभव है।
27 अक्टूबर को आने वाले नतीजे यह बताएंगे कि इन सीमित निर्वाचन क्षेत्रों में किस दल की रणनीति ज्यादा प्रभावी रही। यह 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले एक उपयोगी राजनीतिक संकेत जरूर होगा, लेकिन अंतिम जनादेश की भविष्यवाणी नहीं।
यूपी में 11 एमएलसी सीटों के चुनाव के दौरान प्रयागराज, फतेहपुर, लखनऊ, झांसी, जालौन, गाजियाबाद और आगरा क्षेत्र से विवादों और शिकायतों की खबरें सामने आईं। इनमें मतदाता सूची की गड़बड़ी, कथित फर्जी मतदान, बूथ पर कहासुनी और मतदाताओं पर दबाव डालने के आरोप शामिल हैं।
कहां-कहां हुआ विवाद?
सपा प्रत्याशी मान सिंह यादव ने आरोप लगाया कि सेक्टर मजिस्ट्रेट के पास भाजपा की पर्ची मिली। इससे मतदान केंद्र पर हंगामे की स्थिति बनी। इससे पहले इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में कथित गलत नामों को लेकर भी शिकायतें हुई थीं।
2. फतेहपुर — भाजपा और सपा नेताओं में धक्कामुक्की
विजयीपुर ब्लॉक के मतदान केंद्र पर राज्यमंत्री कृष्णा पासवान के साथ आए समर्थकों को सपा नेता नरेश कोरी ने रोक दिया। इसके बाद दोनों पक्षों में कहासुनी और धक्कामुक्की हुई।
सपा ने लखनऊ के बूथ संख्या 186 पर करीब 50 मतदाताओं के नाम ‘डिलीटेड’ दिखने का आरोप लगाया। पार्टी के अनुसार, इससे पात्र मतदाताओं को वोट डालने में परेशानी हुई।
सपा ने झांसी सदर क्षेत्र के बूथ संख्या 260 पर मतदान के बाद मतदाताओं की उंगलियों पर अमिट स्याही नहीं लगाने का आरोप लगाया। यह शिकायत थी; उपलब्ध रिपोर्ट में इसके आधार पर किसी गड़बड़ी की अंतिम पुष्टि नहीं दी गई।
सपा ने माधौगढ़ क्षेत्र के बूथ संख्या 230 पर कुछ सरकारी कर्मचारियों द्वारा मुस्लिम मतदाताओं पर दबाव डालने और उनकी इच्छा के विरुद्ध मतदान कराने का आरोप लगाया। इस दावे की स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध रिपोर्टों में नहीं हुई।
सपा ने साहिबाबाद के अर्थला स्थित कैलाशवती इंटर कॉलेज के बूथ संख्या 234, 235, 236 और 237 के आसपास भाजपा एजेंटों द्वारा मतदाताओं को प्रभावित करने का आरोप लगाया।
सपा प्रत्याशी आकाश अग्रवाल ने खैरागढ़ के बूथ संख्या 20 और छाता के बूथ संख्या 40 पर कब्जे की कोशिश तथा मतदान प्रक्रिया में अधिकारियों की भूमिका पर सवाल उठाए। ये प्रत्याशी के आरोप हैं; स्वतंत्र पुष्टि की जानकारी उपलब्ध नहीं है।
सबसे बड़ा विवाद: मतदाता सूची में अजीब नाम कैसे आए?
इलाहाबाद-झांसी स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की मतदाता सूची में ‘राम ने यादव को मारा’ जैसे असामान्य नाम सामने आने पर चुनाव आयोग ने जांच कराई। रिपोर्टों के अनुसार, सॉफ्टवेयर में नाम का लिप्यंतरण करने के बजाय उसका अर्थ अनुवादित हो गया था। जांच में 158 प्रविष्टियों में त्रुटियां सामने आने की खबर है। भाजपा ने भी लगभग 4,000 दोहराई गई प्रविष्टियों का आरोप लगाया था।
