नई दिल्ली/लखनऊ [TV 47 न्यूज नेटवर्क ]। 20 अक्टूबर 2026। देशभर में आज विजयादशमी यानी दशहरे का पर्व श्रद्धा और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और कई अन्य नेताओं ने देशवासियों को शुभकामनाएं दी हैं। संदेशों में सत्य की जीत, धर्म के मार्ग पर चलने, सामाजिक सद्भाव और सकारात्मक संकल्पों को मजबूत करने की अपील की गई है।
पीएम मोदी – संकल्प और विश्वास को मजबूत करने का संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विजयादशमी पर देशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए कामना की कि यह पर्व हर व्यक्ति के संकल्प को नई शक्ति प्रदान करे। उन्होंने अपने संदेश में सभी के जीवन में सुख, सौभाग्य और सफलता की कामना की।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने धर्म और न्याय पर दिया जोर
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने देश और विदेश में रहने वाले भारतीयों को विजयादशमी की शुभकामनाएं दीं। अपने संदेश में उन्होंने इस पर्व को भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और धर्म तथा न्याय की अधर्म एवं अन्याय पर जीत का प्रतीक बताया।
राष्ट्रपति ने नागरिकों से भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के नैतिक मूल्यों और कर्तव्यबोध को अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने समावेशी समाज और विकसित भारत के निर्माण में योगदान देने की अपील भी की। साथ ही सभी के सुख, अच्छे स्वास्थ्य और कल्याण की कामना की।
सीएम योगी आदित्यनाथ ने क्या अपील की?
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विजयादशमी पर प्रदेशवासियों को शुभकामनाएं देते हुए भगवान श्रीराम के आदर्शों और मां दुर्गा के पराक्रम से प्रेरणा लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह पर्व सत्य, न्याय और धर्म की विजय का संदेश देता है।
मुख्यमंत्री के संदेश में धार्मिक परंपरा के साथ सामाजिक सुधार पर भी जोर दिखाई दिया। उनका आह्वान था कि रावण दहन का प्रतीकात्मक अर्थ जीवन में भी उतारा जाए। समाज में अन्याय और भेदभाव को कम करने की जिम्मेदारी केवल सरकार की नहीं, बल्कि नागरिकों की भी है।
योगी ने अपने संदेश में प्रयागराज के कसारी-मसारी क्षेत्र का भी उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि माफिया के कब्जे से मुक्त कराई गई भूमि पर गरीबों के लिए आवास बनाए जाने की योजना है और इस क्षेत्र को ‘श्रीकृष्णपुरी’ के रूप में विकसित किया जाएगा।
उपराष्ट्रपति और राजनाथ सिंह ने भी दी बधाई
उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने दशहरा और विजयादशमी के अवसर पर देशवासियों तथा विदेशों में बसे भारतीयों को शुभकामनाएं दीं। उनके संदेश में पर्व की शुभकामनाओं के साथ राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक जुड़ाव की भावना दिखाई दी।
विजयादशमी क्यों मनाई जाती है?
विजयादशमी को दशहरा भी कहा जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार यह आश्विन मास के शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को मनाया जाता है। यह शारदीय नवरात्र के समापन से जुड़ा पर्व है। इसकी प्रमुख धार्मिक मान्यताएं भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और मां दुर्गा द्वारा महिषासुर के वध से संबंधित हैं।
दूसरी ओर, देवी परंपरा में यह दिन मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय का प्रतीक है। इस मान्यता में देवी की शक्ति, साहस और अन्याय के विरुद्ध संघर्ष को महत्व दिया जाता है। इस तरह विजयादशमी भारतीय धार्मिक परंपराओं में शक्ति और धर्म दोनों की विजय का पर्व है।
दशहरे पर क्या है खास ? जानिए प्रमुख परंपराएं
देश के अनेक हिस्सों में रामलीला के समापन के बाद रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतले जलाए जाते हैं। यह अहंकार, अन्याय और बुराई के अंत का प्रतीक है।
कई क्षेत्रों में शमी वृक्ष की पूजा की जाती है। शमी के पत्ते शुभता और समृद्धि के प्रतीक माने जाते हैं। इन्हें परिचितों को देकर शुभकामनाएं देने की परंपरा भी है।
3. शस्त्र और औजारों की पूजा
कुछ क्षेत्रों में शस्त्र, वाहन, औजार, मशीनों और कामकाज में इस्तेमाल होने वाले उपकरणों की पूजा की जाती है। यह अपने कार्य, कौशल और जिम्मेदारी के प्रति सम्मान जताने की परंपरा है।
मैसूर में दशहरा जुलूस और सांस्कृतिक आयोजन प्रसिद्ध हैं। बंगाल में दुर्गा पूजा के समापन से जुड़ी विजयादशमी की परंपराएं निभाई जाती हैं। कुल्लू में दशहरा उत्सव की अपनी विशिष्ट पहचान है।
20 अक्टूबर को दशहरा, लेकिन कुछ क्षेत्रों में 21 अक्टूबर को भी आयोजन
वर्ष 2026 में भारत के अधिकांश उत्तर, पश्चिम और मध्य क्षेत्रों में विजयादशमी 20 अक्टूबर को मनाई जा रही है। हालांकि, पंचांग और स्थानीय परंपराओं के अंतर के कारण कुछ स्थानों पर उत्सव की तिथि अलग हो सकती है। पश्चिम बंगाल में बिजोया दशमी 21 अक्टूबर को मनाई जाएगी।
दशहरे का सामाजिक संदेश: अपने भीतर की बुराइयों पर विजय
विजयादशमी का सबसे महत्वपूर्ण संदेश यह है कि बुराई पर विजय केवल किसी पौराणिक कथा की घटना नहीं, बल्कि रोजमर्रा के जीवन से भी जुड़ी है। झूठ, अन्याय, अहंकार, क्रोध, भेदभाव और हिंसा जैसी प्रवृत्तियां परिवार और समाज को कमजोर करती हैं।
यदि दशहरे के अवसर पर व्यक्ति अपने व्यवहार में ईमानदारी, संवेदनशीलता और जिम्मेदारी लाने का संकल्प ले, तो त्योहार का संदेश अधिक सार्थक हो सकता है। नारी सम्मान, बच्चों की सुरक्षा, दहेज का विरोध, नशे से दूरी और सामाजिक सद्भाव जैसे मुद्दे भी इसी भावना से जुड़े हैं।
रावण दहन के साथ यह आत्ममंथन जरूरी है कि हम अपने आसपास की किन बुराइयों को समाप्त करने में योगदान दे सकते हैं। किसी कमजोर व्यक्ति के साथ अन्याय रोकना, परिवार में सम्मानपूर्ण व्यवहार करना और सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा करना भी सकारात्मक बदलाव के छोटे लेकिन महत्वपूर्ण कदम हैं।
