नोएडा [TV 47 न्यूज नेटवर्क ]। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार ने जेवर स्थित नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर ‘नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नोएडा-जेवर’ रखने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। 9 अक्टूबर 2026 को हुई कैबिनेट बैठक के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इसकी जानकारी दी। सरकार ने इस फैसले को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सार्वजनिक जीवन में 25 वर्ष पूरे होने और उत्तर प्रदेश के विकास में उनके योगदान से जोड़ा है।
जेवर एयरपोर्ट की खासियत क्या है?
जेवर एयरपोर्ट की सबसे बड़ी खासियत इसका विशाल आकार, आधुनिक टर्मिनल, चौड़ा रनवे, कार्गो सुविधाएं और भविष्य में विस्तार की योजना है। यह दिल्ली-एनसीआर और पश्चिमी उत्तर प्रदेश के लिए एक प्रमुख विमानन केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है।
प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, पहले चरण को लगभग 11,200 करोड़ रुपये के निवेश से विकसित किया गया। शुरुआती चरण में एयरपोर्ट की सालाना यात्री क्षमता 1.2 करोड़ यानी 12 मिलियन यात्रियों की है। पूरी परियोजना के विस्तार के बाद इसे सालाना सात करोड़ यात्रियों को संभालने योग्य बनाने की योजना है।
1. जेवर एयरपोर्ट कहां बना है?
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्ध नगर जिले के जेवर क्षेत्र में स्थित है। इसकी लोकेशन यमुना एक्सप्रेसवे के आसपास विकसित हो रहे औद्योगिक और शहरी क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है।
यह एयरपोर्ट नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, मेरठ, मथुरा और आगरा जैसे शहरों के यात्रियों को हवाई सेवा से जोड़ने की क्षमता रखता है। इससे दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर निर्भरता कम करने और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में हवाई संपर्क बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
परियोजना को सार्वजनिक-निजी भागीदारी (PPP) मॉडल के तहत विकसित किया जा रहा है। यमुना इंटरनेशनल एयरपोर्ट प्राइवेट लिमिटेड इसका विकास और संचालन करने वाली कंपनी है, जो ज्यूरिख एयरपोर्ट इंटरनेशनल एजी की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी है। परियोजना में केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार की भी भूमिका है।
2. जेवर एयरपोर्ट की रनवे क्षमता कितनी है?
एयरपोर्ट के पहले चरण में 3,900 मीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा रनवे बनाया गया है। इसे 10/28 रनवे के रूप में दर्ज किया गया है। रनवे के साथ इंस्ट्रूमेंट लैंडिंग सिस्टम (ILS) और एयरफील्ड ग्राउंड लाइटिंग की व्यवस्था है, जो खराब दृश्यता और रात के समय विमानों के सुरक्षित संचालन में मदद करती है।
भविष्य में परियोजना के अलग-अलग चरणों में रनवे की संख्या बढ़ाने की योजना है। एयरपोर्ट के मास्टर प्लान में चार चरणों के विकास की परिकल्पना की गई है। अंतिम चरण में दो रनवे और विस्तारित टर्मिनल सुविधाओं का लक्ष्य रखा गया है।
3. एक साल में कितने यात्री कर सकेंगे सफर?
जेवर एयरपोर्ट की शुरुआती यात्री क्षमता 1.2 करोड़ यात्री प्रतिवर्ष है। यह क्षमता पहले चरण के टर्मिनल और संबंधित सुविधाओं के आधार पर तय की गई है।
परियोजना की दीर्घकालीन योजना के अनुसार, अलग-अलग चरणों में विस्तार के बाद एयरपोर्ट की क्षमता बढ़ाकर सालाना सात करोड़ यात्रियों तक पहुंचाई जा सकती है। इसका मतलब है कि भविष्य में यहां घरेलू और अंतरराष्ट्रीय उड़ानों की संख्या बढ़ाने की गुंजाइश होगी।
यही वजह है कि जेवर एयरपोर्ट का पूरा आर्थिक प्रभाव इसके निर्माण से अधिक, आने वाले वर्षों में इसके उपयोग और संपर्क सुविधाओं के विकास पर निर्भर करेगा।
4. कार्गो हब की क्या है खासियत?
जेवर एयरपोर्ट की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसका मल्टी-मोडल कार्गो और लॉजिस्टिक्स हब है। इसका उद्देश्य केवल यात्रियों को विमान सेवा देना नहीं, बल्कि माल ढुलाई को भी बेहतर बनाना है।
प्रधानमंत्री कार्यालय की मार्च 2026 की जानकारी के मुताबिक, कार्गो हब की शुरुआती डिजाइन क्षमता सालाना 2.5 लाख मीट्रिक टन से अधिक है। भविष्य में इसे लगभग 18 लाख मीट्रिक टन तक विस्तारित करने की योजना बताई गई है।
इस सुविधा से इलेक्ट्रॉनिक्स, परिधान, इंजीनियरिंग उत्पाद, कृषि उत्पाद और दूसरे व्यापारिक सामान को देश-विदेश के बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है। खास तौर पर उन कारोबारियों को लाभ हो सकता है, जिनके लिए समय पर माल पहुंचाना महत्वपूर्ण है।
कार्गो हब का लाभ तभी व्यापक होगा, जब एयरपोर्ट को औद्योगिक क्षेत्रों, गोदामों, कोल्ड चेन, मालवाहक वाहनों और अन्य परिवहन नेटवर्क से कुशलतापूर्वक जोड़ा जाएगा।
5. दिल्ली एयरपोर्ट का कितना दबाव कम होगा?
दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र का प्रमुख विमानन केंद्र है। जेवर एयरपोर्ट के विकास का एक उद्देश्य इस क्षेत्र की बढ़ती हवाई यात्रा की मांग को पूरा करने के लिए अतिरिक्त क्षमता तैयार करना है।
नोएडा, ग्रेटर नोएडा, बुलंदशहर, अलीगढ़, मथुरा और आगरा की ओर रहने वाले यात्रियों के लिए जेवर एक वैकल्पिक एयरपोर्ट बन सकता है। लेकिन इससे किस हद तक दिल्ली एयरपोर्ट का दबाव कम होगा, यह उड़ानों के नेटवर्क, टिकटों की कीमत, सड़क संपर्क और यात्रियों की सुविधा पर निर्भर करेगा।
अगर एयरलाइंस जेवर से प्रमुख घरेलू और अंतरराष्ट्रीय गंतव्यों के लिए पर्याप्त उड़ानें शुरू करती हैं, तो यात्रियों को अपने गंतव्य और रहने की जगह के अनुसार एयरपोर्ट चुनने का विकल्प मिलेगा।
दिल्ली एयरपोर्ट और जेवर एयरपोर्ट एक-दूसरे के प्रतिद्वंद्वी भर नहीं होंगे। दोनों मिलकर राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की बढ़ती विमानन जरूरतों को पूरा करने में भूमिका निभा सकते हैं।
6. जेवर एयरपोर्ट से किन शहरों को मिलेगा फायदा?
जेवर एयरपोर्ट का असर केवल गौतमबुद्ध नगर तक सीमित रहने की उम्मीद नहीं है। इसके आसपास का क्षेत्र औद्योगिक विकास, आवासीय परियोजनाओं और नई परिवहन सुविधाओं के कारण तेजी से महत्वपूर्ण बन रहा है।
7. जेवर एयरपोर्ट तक कैसे पहुंचेगा यात्री?
एयरपोर्ट को यमुना एक्सप्रेसवे और क्षेत्र के अन्य प्रमुख सड़क मार्गों से जोड़ने की योजना इसकी सफलता का महत्वपूर्ण हिस्सा है। परियोजना की परिकल्पना इसे सड़क, रेल, मेट्रो और क्षेत्रीय परिवहन सेवाओं के साथ एकीकृत मल्टी-मोडल ट्रांसपोर्ट हब बनाने की है।
यहां एक महत्वपूर्ण सवाल यह भी है कि एयरपोर्ट तक पहुंचने में कितना समय लगेगा। किसी स्थान से दूरी कम होने के बावजूद ट्रैफिक, सड़क की स्थिति और सार्वजनिक परिवहन के विकल्प यात्रा का समय बढ़ा सकते हैं। इसलिए वास्तविक सुविधा का आकलन एयरपोर्ट की दूरी के साथ-साथ पूरी यात्रा व्यवस्था से करना होगा।
8. क्या जेवर एयरपोर्ट से रोजगार बढ़ेगा?
एयरपोर्ट के निर्माण और संचालन से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार की संभावनाएं बनती हैं। प्रत्यक्ष रोजगार में एयरपोर्ट संचालन, सुरक्षा, ग्राउंड हैंडलिंग, विमान रखरखाव, टर्मिनल सेवाएं और प्रशासनिक काम शामिल हैं।
अप्रत्यक्ष रोजगार में टैक्सी और बस सेवाएं, होटल, रेस्तरां, गोदाम, माल ढुलाई, पर्यटन और आसपास के व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की नौकरियां शामिल हो सकती हैं।
इसके अलावा, बेहतर हवाई संपर्क के कारण कुछ कंपनियां अपने कार्यालय या वितरण केंद्र एयरपोर्ट के आसपास स्थापित करने में रुचि दिखा सकती हैं। इससे क्षेत्र में निवेश और कारोबार की संभावनाएं बढ़ सकती हैं।
हालांकि, रोजगार की वास्तविक संख्या इस बात पर निर्भर करेगी कि एयरपोर्ट कितनी उड़ानें संचालित करता है, कितनी कंपनियां वहां कारोबार स्थापित करती हैं और औद्योगिक परियोजनाएं कितनी तेजी से आगे बढ़ती हैं।
स्थानीय युवाओं के लिए विमानन, लॉजिस्टिक्स, आतिथ्य और तकनीकी सेवाओं से जुड़े प्रशिक्षण कार्यक्रम महत्वपूर्ण होंगे, ताकि नए अवसरों का लाभ स्थानीय आबादी को भी मिल सके।
9. जेवर एयरपोर्ट का नाम बदलने का राजनीतिक महत्व क्या है?
नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट का नाम बदलकर नरेंद्र मोदी इंटरनेशनल एयरपोर्ट, नोएडा-जेवर रखने के प्रस्ताव को उत्तर प्रदेश सरकार ने प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने से जोड़ा है। इस फैसले का राजनीतिक महत्व भी है, क्योंकि यह उत्तर प्रदेश में बड़े बुनियादी ढांचा प्रोजेक्ट और राष्ट्रीय नेतृत्व की भूमिका को एक साथ चर्चा में लाता है।
लेकिन एयरपोर्ट की सफलता का आकलन केवल उसके नाम से नहीं होगा। वास्तविक कसौटी यह होगी कि यात्रियों को कितनी सुविधाएं मिलती हैं, उड़ानें कितनी नियमित रहती हैं, टिकट कितने प्रतिस्पर्धी होते हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को कितना फायदा मिलता है।
नाम परिवर्तन का प्रस्ताव प्रशासनिक और राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा है, जबकि एयरपोर्ट की उपयोगिता उसके संचालन और दीर्घकालीन प्रदर्शन से तय होगी।
10. जेवर एयरपोर्ट का भविष्य कितना बड़ा है?
जेवर एयरपोर्ट उत्तर प्रदेश की विमानन और औद्योगिक रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। पहले चरण में 1.2 करोड़ यात्रियों की सालाना क्षमता और भविष्य में सात करोड़ यात्रियों तक विस्तार की योजना इसे दीर्घकालीन महत्व देती है। कार्गो सुविधाओं का विस्तार भी इसे केवल यात्री एयरपोर्ट के बजाय एक बड़े व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित करने की संभावना पैदा करता है।
यदि ये व्यवस्थाएं प्रभावी ढंग से विकसित होती हैं, तो जेवर एयरपोर्ट पश्चिमी उत्तर प्रदेश, दिल्ली-एनसीआर और आसपास के पर्यटन क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार बन सकता है।
