नई दिल्ली [ TV 47 न्यूज नेटवर्क ]। भारत की राजनीति में एक बार फिर चुनावी माहौल गरमा गया है। चुनाव आयोग ने 2026 में होने वाले पांच राज्यों के विधानसभा चुनावों की तारीखों का आधिकारिक एलान कर दिया है। इन राज्यों में पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल और पुडुचेरी शामिल हैं।
इन पांचों राज्यों में कुल 824 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा। यह चुनाव न केवल इन राज्यों की राजनीति बल्कि राष्ट्रीय राजनीति के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
चुनाव आयोग के मुताबिक अलग-अलग राज्यों में मतदान की प्रक्रिया अप्रैल में पूरी कर ली जाएगी और 4 मई को सभी राज्यों के चुनाव परिणाम घोषित किए जाएंगे।
इस चुनाव में दिलचस्प बात यह है कि जहां कुछ राज्यों में एक ही चरण में मतदान होगा, वहीं पश्चिम बंगाल में दो चरणों में चुनाव कराए जाएंगे।
पांच राज्यों में चुनाव: एक नजर में
नीचे दिए गए ग्राफ से समझिए कि किस राज्य में कितनी सीटें हैं और कब वोटिंग होगी।
—————————————————-
पश्चिम बंगाल 294 23 और 29 अप्रैल 2
तमिलनाडु 234 23 अप्रैल 1
असम 126 09 अप्रैल 1
केरल 140 09 अप्रैल 1
पुडुचेरी 30 09 अप्रैल 1
—————————————————-
कुल सीटें 824
परिणाम 4 मई
यह चुनाव कई मायनों में अहम है क्योंकि इन राज्यों की राजनीतिक परिस्थितियां एक-दूसरे से बिल्कुल अलग हैं।
पश्चिम बंगाल चुनाव: दो चरणों में मतदान
पश्चिम बंगाल देश के सबसे चर्चित चुनावी राज्यों में से एक है। यहां की राजनीति पिछले कई वर्षों से राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय रही है।
इस बार चुनाव आयोग ने राज्य में दो चरणों में मतदान कराने का फैसला किया है।
बंगाल चुनाव का शेड्यूल
दूसरा चरण 29 अप्रैल
कुल सीटें 294
परिणाम 4 मई
मुख्य राजनीतिक मुकाबला
राज्य में मुख्य मुकाबला तीन ताकतों के बीच माना जा रहा है:
-
तृणमूल कांग्रेस
-
भारतीय जनता पार्टी
-
वाम-कांग्रेस गठबंधन
ममता बनर्जी की पार्टी लगातार तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रही है, जबकि बीजेपी पहली बार पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने का लक्ष्य लेकर मैदान में उतरी है।
तमिलनाडु चुनाव: सिंगल फेज में वोटिंग
दक्षिण भारत के सबसे महत्वपूर्ण राज्यों में से एक तमिलनाडु में चुनाव एक ही चरण में 23 अप्रैल को कराया जाएगा।
तमिलनाडु चुनाव का ग्राफ
सीटें : 234
मतदान : 23 अप्रैल
चरण : 1
नतीजे : 4 मई
राजनीतिक स्थिति
तमिलनाडु की राजनीति लंबे समय से दो प्रमुख दलों के इर्द-गिर्द घूमती रही है:
-
डीएमके
-
एआईएडीएमके
हालांकि पिछले कुछ वर्षों में बीजेपी भी राज्य में अपना आधार बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
इस चुनाव में कई क्षेत्रीय और राष्ट्रीय मुद्दे अहम भूमिका निभा सकते हैं।
असम चुनाव: उत्तर-पूर्व की बड़ी लड़ाई
असम उत्तर-पूर्व भारत का सबसे महत्वपूर्ण राज्य है। यहां 126 विधानसभा सीटों पर चुनाव होना है।
चुनाव आयोग ने यहां 9 अप्रैल को सिंगल फेज मतदान कराने का फैसला किया है।
असम चुनाव का ग्राफ
मतदान : 9 अप्रैल
चरण : 1
नतीजे : 4 मई
मुख्य राजनीतिक दल
असम में मुख्य मुकाबला इन दलों के बीच माना जा रहा है:
-
बीजेपी और उसके सहयोगी दल
-
कांग्रेस
-
क्षेत्रीय दल
राज्य में विकास, बाढ़, बेरोजगारी और पहचान की राजनीति बड़े मुद्दे बने हुए हैं।
केरल चुनाव: हमेशा दिलचस्प मुकाबला
केरल की राजनीति हमेशा से ही बेहद प्रतिस्पर्धी रही है। यहां सत्ता अक्सर दो प्रमुख गठबंधनों के बीच बदलती रहती है।
-
एलडीएफ
-
यूडीएफ
इस बार भी चुनाव 9 अप्रैल को एक ही चरण में कराया जाएगा।
केरल चुनाव का ग्राफ
मतदान : 9 अप्रैल
चरण : 1
नतीजे : 4 मई
राजनीतिक समीकरण
केरल में वामपंथी दलों का गठबंधन एलडीएफ सत्ता में है, जबकि कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ विपक्ष में है। इस चुनाव में विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक कल्याण जैसे मुद्दे प्रमुख रहेंगे।
पुडुचेरी चुनाव: छोटा राज्य, बड़ी राजनीति
पुडुचेरी भले ही छोटा केंद्र शासित प्रदेश है, लेकिन यहां की राजनीति काफी दिलचस्प रहती है।
यहां कुल 30 विधानसभा सीटें हैं और मतदान 9 अप्रैल को होगा।
पुडुचेरी चुनाव का ग्राफ
मतदान : 9 अप्रैल
चरण : 1
नतीजे : 4 मई
मुख्य मुकाबला
पुडुचेरी में आम तौर पर कांग्रेस और बीजेपी के बीच राजनीतिक मुकाबला देखने को मिलता है।
पूरे चुनाव का टाइमलाइन ग्राफ
नीचे पूरे चुनाव की टाइमलाइन को सरल ग्राफ में समझा जा सकता है।
23 अप्रैल → तमिलनाडु + बंगाल पहला चरण
29 अप्रैल → बंगाल दूसरा चरण
4 मई → पांचों राज्यों के नतीजे
इस टाइमलाइन से साफ है कि चुनाव आयोग ने मतदान प्रक्रिया को अलग-अलग चरणों में व्यवस्थित किया है ताकि सुरक्षा और प्रशासनिक व्यवस्था सुचारु रूप से चल सके।
824 सीटों की राजनीतिक अहमियत
इन पांच राज्यों में कुल 824 सीटों पर चुनाव होना है।
सीटों का ग्राफ
तमिलनाडु ███████████████████████ 234
केरल █████████████ 140
असम █████████ 126
पुडुचेरी ██ 30
यह ग्राफ दिखाता है कि सबसे ज्यादा सीटें पश्चिम बंगाल में हैं।
राष्ट्रीय राजनीति पर असर
इन पांच राज्यों के चुनाव परिणाम राष्ट्रीय राजनीति पर भी बड़ा प्रभाव डाल सकते हैं।
संभावित असर
-
क्षेत्रीय दलों की ताकत का आकलन
-
राष्ट्रीय दलों की लोकप्रियता
-
दक्षिण और पूर्व भारत की राजनीतिक दिशा
-
आगामी लोकसभा चुनाव की रणनीति
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि इन चुनावों के नतीजे कई दलों की भविष्य की रणनीति तय कर सकते हैं।
चुनाव आयोग की तैयारी
चुनाव आयोग ने इन चुनावों को निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से कराने के लिए कई कदम उठाए हैं।
प्रमुख व्यवस्थाएं
-
अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती
-
ईवीएम और वीवीपैट का उपयोग
-
संवेदनशील बूथों की पहचान
-
आचार संहिता का सख्ती से पालन
चुनावी मुद्दे
हर राज्य में अलग-अलग मुद्दे चुनाव को प्रभावित कर सकते हैं।
प्रमुख मुद्दे
-
विकास और रोजगार
-
महंगाई
-
कानून व्यवस्था
-
सामाजिक कल्याण योजनाएं
-
क्षेत्रीय पहचान और संस्कृति
