लखनऊ [TV 47 न्यूज नेटवर्क ]। उत्तर प्रदेश में बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और अधिकारियों के रवैये को लेकर एक बार फिर विवाद गरम हो गया है। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने विभाग के अफसरों को जमकर नसीहत दी है और सरकार तथा स्वयं को बदनाम करने का आरोप लगाया है। इस विवाद ने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी है, क्योंकि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज ऊर्जा विभाग की समीक्षा करने जा रहे हैं। इसमें हम जानेंगे कि आखिर क्या वजह है कि एके शर्मा ने इतना कड़ा कदम उठाया। उनके आरोप क्या हैं और सरकार का क्या रुख हो सकता है।
ऊर्जा मंत्री एके शर्मा का नाराजगी का कारण
उत्तर प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बिजली विभाग के अफसरों को चेतावनी दी है कि यदि उन्होंने अपनी कार्यशैली नहीं बदली, तो परिणाम भुगतने को तैयार रहें। उन्होंने आरोप लगाया है कि विभाग के कुछ अफसर उन्हें और सरकार को बदनाम करने की “सुपारी” ले चुके हैं। यह टिप्पणी सार्वजनिक रूप से ऊर्जा मंत्री का अपना गहरा गुस्सा और चिंता व्यक्त करती है कि विभाग में भ्रष्टाचार और लापरवाही चरम पर है।
गर्मी के मौसम में विभाग की कार्यशैली
मंत्री ने कहा कि उन्होंने गर्मी के मौसम में विभाग को कोई नया प्रयोग न करने की सलाह दी थी, लेकिन अफसरों ने उल्टा कार्यवाही की। संविदा कर्मियों की छंटनी और नई नियुक्तियों को लेकर भी उन्होंने नाराजगी जाहिर की। उनके अनुसार, जिन नए संविदा कर्मियों की नियुक्ति की गई है, वे एक “पार्टी विशेष” से जुड़े हैं, जो विभाग में भ्रष्टाचार और राजनीतिक हस्तक्षेप का संकेत है।
बिजली कटौती और बकायेदारों का मामला
मंत्री का आरोप है कि विभाग के अधिकारी बकायेदारों के कनेक्शन न काटने का निर्देश होने के बावजूद, पूरे-पूरे गांवों की बिजली काट रहे हैं। इससे जनता में नाराज़गी है, और सरकार की छवि धूमिल हो रही है। उन्होंने यह भी कहा कि जब अधिकारी आदेश नहीं मानते, फोन नहीं उठाते और बैठक का कोई असर नहीं होता, तो फिर इन बैठकों का क्या फायदा?
बैठक और जवाबदेही
अखिलेश यादव का उदाहरण देते हुए, मंत्री ने कहा कि जनता की नाराजगी और जवाबदेही का ध्यान रखने के बजाय, विभागीय अधिकारी अपनी मनमानी कर रहे हैं। यदि सिस्टम में सुधार नहीं हुआ, तो वह खुद मुख्यमंत्री को रिपोर्ट देंगे और सख्त कदम उठाएंगे। उनका मानना है कि भ्रष्टाचार और लापरवाही को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
मुख्यमंत्री योगी और ऊर्जा विभाग की समीक्षा
आज मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ऊर्जा विभाग की समीक्षा करने जा रहे हैं। यह बैठक इसलिए भी महत्वपूर्ण है कि इसमें विभाग के कार्यों, विशेषकर बिजली कटौती, भ्रष्टाचार, और विभागीय सुधारों पर चर्चा होगी। मुख्यमंत्री का लक्ष्य है कि जनता को बेहतर बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए और विभाग में व्याप्त भ्रष्टाचार पर लगाम लगे।
विभाग की वर्तमान स्थिति
उत्तर प्रदेश में बिजली की आपूर्ति और तकनीकी व्यवस्था में कई तरह की खामियां हैं। गर्मी के मौसम में बिजली की मांग बहुत बढ़ जाती है, लेकिन विभाग के अधिकारी और कर्मचारी मिलकर जनता को राहत नहीं दे पा रहे हैं। इसके अलावा, विभाग में भ्रष्टाचार, अव्यवस्था और राजनीतिक हस्तक्षेप की खबरें लगातार सामने आ रही हैं, जो जनता की भरोसेमंदता को नुकसान पहुंचाती हैं।
विभागीय भ्रष्टाचार और राजनीतिक हस्तक्षेप का मामला
संविदा कर्मियों की नियुक्ति और छंटनी को लेकर भी विवाद है। मंत्री का आरोप है कि नई नियुक्तियों में राजनीतिक दलों का हस्तक्षेप हो रहा है। इससे विभाग की कार्यप्रणाली प्रभावित हो रही है और जनता को सही सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। विभागीय अधिकारियों के बीच भी आपसी मनमुटाव और भ्रष्टाचार की खबरें आम हैं।
बिजली कनेक्शन और बकायेदारों का मामला
बिजली कनेक्शन काटने और बकायेदारों के कनेक्शन न काटने के निर्देशों में भी विरोधाभास है। विभाग के अधिकारी इन आदेशों का उल्लंघन कर रहे हैं, जो जनता में नाराज़गी का कारण बन रहा है। इससे विभाग की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं।
भ्रष्टाचार और लापरवाही के संकेत
सभी रिपोर्टों से पता चलता है कि विभाग में भ्रष्टाचार और लापरवाही चरम पर है। अधिकारियों का रवैया जनता के प्रति उदासीन है, और विभागीय निर्णय राजनीति के प्रभाव में आ रहे हैं। इससे विभाग की कार्यक्षमता प्रभावित हो रही है और जनता का भरोसा टूटा है।
जनता की नाराज़गी और सरकार की जिम्मेदारी
गर्मी के मौसम में बिजली की भारी मांग के बावजूद, विभाग की खामियों के कारण जनता को पर्याप्त राहत नहीं मिल रही है। लगातार बिजली कटौती, खराब तकनीक, और भ्रष्टाचार ने जनता का भरोसा तोड़ा है। मुख्यमंत्री और विभागीय अधिकारियों को चाहिए कि वे जनता की समस्याओं का समाधान करें और भरोसेमंद बिजली सेवा सुनिश्चित करें।
सरकार का रुख
उत्तर प्रदेश सरकार ने इस मामले को गंभीरता से लिया है। मुख्यमंत्री योगी आज ऊर्जा विभाग की समीक्षा कर रहे हैं, जिसमें विभागीय कार्यप्रणाली, भ्रष्टाचार का मामला, और सुधारों पर चर्चा होगी। सरकार का लक्ष्य है कि विभाग में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जाए, ताकि जनता को बेहतर सेवा मिल सके।
