नई दिल्ली [ TV 47 न्यूज नेटवर्क ]। टी-20 क्रिकेट की दुनिया में हर मैच एक नई कहानी लिखता है, लेकिन जब बात सेमीफाइनल की हो तो दबाव कई गुना बढ़ जाता है। इसी दबाव के बीच टी-20 वर्ल्ड कप के दूसरे सेमीफाइनल में आज India national cricket team की टक्कर England cricket team से होने जा रही है।
इस मुकाबले का महत्व इसलिए भी बढ़ गया है क्योंकि पहले सेमीफाइनल में New Zealand national cricket team ने South Africa national cricket team को हराकर फाइनल में अपनी जगह बना ली है। अब जो भी टीम दूसरे सेमीफाइनल में जीत दर्ज करेगी, वह 8 मार्च को फाइनल में न्यूजीलैंड से भिड़ेगी।
भारतीय टीम टूर्नामेंट की मौजूदा चैंपियन है और शुरुआत से ही उसे खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा था। लेकिन सेमीफाइनल तक पहुंचते-पहुंचते टीम की कुछ कमजोरियां भी सामने आई हैं। क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि अगर इन गलतियों को समय रहते नहीं सुधारा गया तो इंग्लैंड के खिलाफ मुकाबला मुश्किल हो सकता है।
नई गेंद से जोफ्रा आर्चर की चुनौती
टी-20 वर्ल्ड कप के सेमीफाइनल मुकाबले में भारत और इंग्लैंड के बीच होने वाली भिड़ंत से पहले सबसे बड़ी चुनौती इंग्लैंड के तेज गेंदबाज Jofra Archer को माना जा रहा है। नई गेंद से आर्चर की तेज रफ्तार और सटीक लाइन-लेंथ किसी भी बल्लेबाजी क्रम को शुरुआती झटका देने की क्षमता रखती है। ऐसे में भारतीय टीम के लिए पावरप्ले के शुरुआती ओवर बेहद अहम साबित हो सकते हैं।
टूर्नामेंट के शुरुआती मैचों में आर्चर थोड़ा महंगे साबित हुए थे, लेकिन इसके बाद उन्होंने शानदार वापसी की है। आंकड़ों के अनुसार उन्होंने पावरप्ले में कुल 114 गेंदें डाली हैं, जिनमें से 66 गेंदें डॉट रही हैं। इसका मतलब है कि बल्लेबाज उनके खिलाफ आसानी से रन नहीं बना पाए हैं और अक्सर दबाव में आकर गलत शॉट खेलने को मजबूर हुए हैं।
भारतीय टीम के लिए एक और चिंता की बात यह है कि आर्चर का रिकॉर्ड भारतीय विकेटकीपर बल्लेबाज Sanju Samson के खिलाफ काफी मजबूत रहा है। दोनों खिलाड़ियों के बीच खेले गए पांच टी-20 मुकाबलों में आर्चर ने तीन बार सैमसन को आउट किया है। वहीं सैमसन ने आर्चर के खिलाफ 26 गेंदों में सिर्फ 23 रन ही बनाए हैं। इससे साफ है कि इंग्लैंड की रणनीति सैमसन को जल्दी आउट करने की हो सकती है।
इस मुकाबले को लेकर दक्षिण अफ्रीका के पूर्व कप्तान Faf du Plessis ने भी अपनी राय दी है। उनका मानना है कि इंग्लैंड की टीम सैमसन की कमजोरियों को अच्छी तरह समझती है और आर्चर को उसी हिसाब से इस्तेमाल किया जा सकता है।
डु प्लेसिस के मुताबिक सैमसन शॉर्ट गेंदों के खिलाफ अच्छी बल्लेबाजी करते हैं, लेकिन जब गेंदबाज की रफ्तार 140 किलोमीटर प्रति घंटा से ज्यादा हो जाती है तो ऐसे शॉट खेलना आसान नहीं रहता। ऐसे में सेमीफाइनल में आर्चर और भारतीय टॉप ऑर्डर के बीच मुकाबला मैच का रुख तय कर सकता है।
टॉप ऑर्डर की लगातार नाकामी
टी-20 वर्ल्ड कप में सेमीफाइनल तक पहुंचने के बावजूद भारतीय टीम की सबसे बड़ी कमजोरी उसके टॉप ऑर्डर की अस्थिरता रही है। कई मुकाबलों में टीम की शुरुआत अच्छी नहीं रही और शुरुआती ओवरों में ही विकेट गिरने से बल्लेबाजी पर दबाव बन गया। छोटे फॉर्मेट के इस टूर्नामेंट में पावरप्ले के ओवर बेहद महत्वपूर्ण होते हैं, क्योंकि यहीं से टीम बड़े स्कोर की नींव रखती है।
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ मुकाबले में भी भारतीय टीम को इसी समस्या का सामना करना पड़ा था। उस मैच में पावरप्ले के दौरान ही टीम ने तीन अहम विकेट गंवा दिए थे, जिससे बल्लेबाजी क्रम दबाव में आ गया। इसी तरह अमेरिका के खिलाफ मैच में भी भारत की शुरुआत खराब रही और टीम ने शुरुआती ओवरों में चार विकेट खो दिए। लगातार गिरते विकेटों के कारण टीम को संभलने में काफी मशक्कत करनी पड़ी।
हालांकि ऐसे मुश्किल समय में कप्तान Suryakumar Yadav ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए टीम को संकट से बाहर निकाला था। उनकी 84 रन की बेहतरीन पारी की बदौलत भारत एक बड़े उलटफेर से बच गया। लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि हर मैच में किसी एक खिलाड़ी पर निर्भर रहना सही रणनीति नहीं हो सकती।
सेमीफाइनल जैसे बड़े मुकाबले में टीम को एक यूनिट की तरह प्रदर्शन करना होगा। अगर शुरुआती बल्लेबाज जल्दी आउट हो जाते हैं तो मिडिल ऑर्डर पर दबाव कई गुना बढ़ जाता है और रन गति भी प्रभावित होती है। खासकर इंग्लैंड जैसी मजबूत टीम के खिलाफ ऐसी गलती भारी पड़ सकती है। इसलिए भारतीय टीम को सेमीफाइनल में बेहतर शुरुआत करना बेहद जरूरी होगा, ताकि बल्लेबाजी क्रम स्थिर रहे और टीम बड़ा स्कोर खड़ा कर सके।
बल्लेबाजी का यूनिट के रूप में प्रदर्शन नहीं
टी-20 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम की बल्लेबाजी लाइनअप कागज पर बेहद मजबूत दिखाई देती है। टीम में कई ऐसे खिलाड़ी हैं जो अकेले दम पर मैच का रुख बदलने की क्षमता रखते हैं। लेकिन इस टूर्नामेंट में अब तक भारतीय बल्लेबाज एक यूनिट के रूप में प्रदर्शन करते नजर नहीं आए हैं।
अधिकांश मुकाबलों में यह देखा गया कि किसी एक मैच में एक खिलाड़ी चमका, तो अगले मैच में कोई दूसरा बल्लेबाज जिम्मेदारी निभाता दिखा। यानी टीम के बल्लेबाजों ने व्यक्तिगत तौर पर अच्छी पारियां जरूर खेलीं, लेकिन एक साथ मिलकर बड़ी साझेदारी या लगातार मजबूत प्रदर्शन देखने को कम मिला।
उदाहरण के तौर पर विकेटकीपर बल्लेबाज Sanju Samson ने वेस्टइंडीज के खिलाफ शानदार बल्लेबाजी करते हुए 97 रन की नाबाद पारी खेली थी। उनकी इस पारी की बदौलत भारत ने अहम जीत हासिल की और सेमीफाइनल की दौड़ में मजबूती पाई।
वहीं युवा बल्लेबाज Ishan Kishan ने पाकिस्तान और नामीबिया के खिलाफ मुकाबलों में टीम के लिए महत्वपूर्ण रन बनाए और शुरुआत को संभालने की कोशिश की। इसके अलावा ऑलराउंडर Shivam Dube ने भी दो मैचों में उपयोगी पारियां खेलकर टीम को मुश्किल परिस्थितियों से बाहर निकालने में मदद की।
हालांकि इन व्यक्तिगत प्रदर्शनों के बावजूद टीम की बल्लेबाजी में वह सामूहिक लय दिखाई नहीं दी जो किसी बड़े टूर्नामेंट को जीतने के लिए जरूरी होती है। विशेषज्ञों का मानना है कि सेमीफाइनल जैसे बड़े मुकाबले में भारत को एक यूनिट के रूप में बल्लेबाजी करनी होगी। अगर टॉप ऑर्डर से लेकर मिडिल ऑर्डर तक सभी बल्लेबाज योगदान देते हैं, तो टीम का स्कोर ज्यादा मजबूत हो सकता है और विपक्षी टीम पर दबाव भी बढ़ेगा।
इंग्लैंड के खिलाफ सेमीफाइनल में यही सामूहिक प्रदर्शन भारत की जीत की कुंजी साबित हो सकता है।
अभिषेक शर्मा की फॉर्म चिंता का विषय
टी-20 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम के लिए सबसे बड़ी चिंता ओपनिंग बल्लेबाज Abhishek Sharma का प्रदर्शन रहा है। टूर्नामेंट की शुरुआत से ही उनसे आक्रामक और तेज शुरुआत की उम्मीद की जा रही थी, लेकिन अब तक उनका प्रदर्शन उम्मीदों के मुताबिक नहीं रहा है।
आंकड़ों पर नजर डालें तो अभिषेक शर्मा ने इस वर्ल्ड कप में अब तक छह पारियों में सिर्फ 80 रन बनाए हैं। उनका औसत लगभग 13.33 का रहा है, जो एक ओपनर बल्लेबाज के लिए काफी कम माना जाता है। खास बात यह भी है कि टूर्नामेंट की शुरुआती तीन पारियों में वह शून्य पर आउट हो गए थे, जिससे भारतीय टीम को शुरुआत में ही बड़ा झटका लगा।
टी-20 जैसे छोटे फॉर्मेट में ओपनिंग जोड़ी की भूमिका बेहद अहम होती है। अगर ओपनर बल्लेबाज शुरुआती ओवरों में तेजी से रन बनाते हैं तो इससे टीम को मजबूत शुरुआत मिलती है और मिडिल ऑर्डर पर दबाव कम हो जाता है। लेकिन जब शुरुआती विकेट जल्दी गिरते हैं तो पूरी टीम दबाव में आ जाती है और रन गति भी प्रभावित होती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सेमीफाइनल जैसे बड़े मुकाबले में अभिषेक शर्मा से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद होगी। इंग्लैंड के खिलाफ मैच में उन्हें संयम के साथ बल्लेबाजी करते हुए टीम को ठोस शुरुआत देने की जरूरत होगी। अगर वह पावरप्ले के ओवरों में टिककर बल्लेबाजी कर लेते हैं और कुछ आक्रामक शॉट खेलते हैं, तो इससे भारतीय टीम का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।
सेमीफाइनल मुकाबला बेहद अहम होने वाला है और ऐसे में टीम इंडिया चाहेगी कि उसके ओपनर अच्छी शुरुआत दिलाएं। अभिषेक शर्मा के बल्ले से अगर बड़े रन निकलते हैं, तो भारत के लिए फाइनल की राह काफी आसान हो सकती है।
स्पिन गेंदबाजी की चुनौती
टी-20 वर्ल्ड कप में भारतीय टीम की स्पिन गेंदबाजी की जिम्मेदारी काफी हद तक Varun Chakravarthy पर टिकी हुई है। उन्होंने अब तक शानदार प्रदर्शन करते हुए 12 विकेट हासिल किए हैं और टीम के सबसे सफल गेंदबाज बनकर उभरे हैं। उनकी मिस्ट्री स्पिन ने टूर्नामेंट के शुरुआती मुकाबलों में विरोधी बल्लेबाजों को काफी परेशान किया था।
हालांकि पिछले दो मैचों में उनका प्रदर्शन उतना प्रभावशाली नहीं रहा। South Africa national cricket team के खिलाफ मुकाबले में उन्होंने अपने चार ओवर में 47 रन खर्च किए, जबकि West Indies Cricket Team के खिलाफ भी वह महंगे साबित हुए और 40 रन दे बैठे। इन मुकाबलों में बल्लेबाजों ने उनके खिलाफ खुलकर रन बनाए।
भारत के पूर्व कप्तान और दिग्गज स्पिनर Anil Kumble का मानना है कि अब बल्लेबाज धीरे-धीरे वरुण चक्रवर्ती की गेंदबाजी को समझने लगे हैं। उनके अनुसार शुरुआत में वरुण की मिस्ट्री गेंदों को पढ़ना मुश्किल था, लेकिन लगातार मैच खेलने के बाद बल्लेबाज उनकी रणनीति को बेहतर तरीके से समझने लगे हैं।
ऐसे में सेमीफाइनल जैसे अहम मुकाबले में वरुण चक्रवर्ती पर एक बार फिर बड़ी जिम्मेदारी होगी। अगर वह अपनी लय में लौटते हैं तो भारतीय टीम के लिए इंग्लैंड के बल्लेबाजों को रोकना आसान हो सकता है।
