पटना [ TV 47 न्यूज नेटवर्क ]। बिहार चुनाव 2025 का सियासी महासंग्राम तेज़ी से करीब आ रहा है। इस बार का चुनाव न केवल राज्य के राजनीतिक समीकरणों को नए रंग देने वाला है, बल्कि यह विभिन्न वीआईपी सीटों पर सियासी दलों के बीच कड़ी प्रतिस्पर्धा का भी प्रतिबिंब है। इस समीक्षा में हम जानेंगे कि किन-किन सीटों को VIP सीटें कहा जा रहा है, किन पर दांव लगे हैं, और कौन-कौन से नेता इन सीटों पर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं।
बिहार में चुनाव की पृष्ठभूमि
बिहार का राजनीतिक इतिहास अनेक उतार-चढ़ाव से भरा है। यहां की राजनीति मुख्य रूप से जाति, धर्म, विकास, और सामाजिक समीकरणों के इर्द-गिर्द घूमती है। पिछले चुनावों में जदयू, भाजपा, कांग्रेस, आरजेडी और अन्य छोटी पार्टियों ने अपने-अपने आधार का विस्तार किया है।
2020 के चुनाव में राजनीतिक गठबंधन और जातीय समीकरणों ने एक नई तस्वीर खींची थी। इस बार भी स्थिति समान रूप से जटिल है। राजनीतिक दलों की रणनीतियों में बदलाव, नई उम्मीदवारों की भागीदारी, और सामाजिक मुद्दों का उभार इन चुनावों को खास बना रहा है।
बिहार चुनाव 2025 में महत्वपूर्ण वीआईपी सीटें
1. पटना साहिब
ऐतिहासिक महत्व
पटना साहिब सीट बिहार की राजधानी पटना जिले में है। यह सीट अपनी ऐतिहासिक, धार्मिक और राजनीतिक महत्ता के कारण बहुत ही खास है। यह सीट अक्सर मुख्यमंत्री या वरिष्ठ नेताओं का चुनाव क्षेत्र रहती है।
मौजूदा स्थिति
इस सीट पर भाजपा, जदयू, कांग्रेस और आरजेडी के बीच कड़ी टक्कर की संभावना है। यदि पिछले चुनावों की बात करें तो यहाँ से कई बार मुख्यमंत्री या नेता प्रतिपक्ष चुनाव लड़ चुके हैं।
उम्मीदवार और रणनीति
इस बार भाजपा ने अनुभवी नेता का दाव खेलने का मन बनाया है, जबकि जदयू भी अपनी मजबूत पकड़ को बनाए रखने की कोशिश कर रहा है। कांग्रेस और आरजेडी भी अपने-अपने उम्मीदवारों को मैदान में उतारने की तैयारी कर रहे हैं।
सियासी समीकरण
यह सीट बिहार की राजनीति का एक केंद्रबिंदु है, जहां पर जाति, समुदाय और विकास के मुद्दे अहम भूमिका निभाते हैं। यहाँ का परिणाम न सिर्फ राज्य सरकार की दिशा तय करेगा बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी प्रभाव डालेगा।
2. बेगूसराय
लालू परिवार का गढ़
बेगूसराय सीट का इतिहास लालू प्रसाद यादव का गढ़ माना जाता है। यह सीट लालू यादव और उनके परिवार का स्थायी आधार रही है। यहां का सामाजिक समीकरण यादव, मुसलमान, और अन्य पिछड़ा वर्ग का मजबूत समर्थन प्राप्त है।
वर्तमान स्थिति
इस बार भी आरजेडी अपने पुराने गढ़ को मजबूत करने के प्रयास में है। भाजपा और जदयू की भी निगाहें इस सीट पर लगी हैं, ताकि अपने वोट बैंक का विस्तार कर सकें।
उम्मीदवार
लालू यादव का पुत्र तेजस्वी यादव इस सीट पर अपनी प्रतिष्ठा मजबूत करने के लिए चुनाव लड़ सकते हैं। भाजपा ने भी अपने उम्मीदवार का नाम फाइनल कर लिया है।
सियासी दांव
यह सीट बिहार के विपक्षी दलों के लिए प्रतिष्ठा का सवाल है। यदि भाजपा जीतती है, तो इसका अर्थ होगा लालू परिवार और आरजेडी के लिए झटका, वहीं यदि आरजेडी जीतती है, तो यह उसकी साख को और मजबूत करेगा।
3. गया
धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व
गया, बोधगया के नाम से विश्वविख्यात, अपने धार्मिक महत्व के कारण ही नहीं, बल्कि राजनीतिक परिदृश्य में भी खास है। यहाँ पर दलित, आदिवासी, और पिछड़े वर्ग का वोट बैंक मजबूत है।
मौजूदा स्थिति
गया सीट पर मुख्य रूप से जदयू, भाजपा, कांग्रेस और आरजेडी का मुकाबला होगा। यह सीट सामाजिक व धार्मिक मुद्दों का केंद्र भी है।
उम्मीदवार और चुनावी रणनीति
यहां पर जातीय समीकरणों को ध्यान में रखते हुए उम्मीदवार तय किए गए हैं। विकास और धार्मिक आस्था के मुद्दे चुनावी रैलियों में हावी हैं।
4. भागलपुर
सांस्कृतिक और सामाजिक केंद्र
भागलपुर बिहार की सांस्कृतिक राजधानी है। यहाँ पर राजनीतिक दांव-पेंच तेज होते हैं। इस सीट का इतिहास जाति, धर्म और आर्थिक वर्ग के आधार पर बंटा हुआ है।
मौजूदा स्थिति
यहां पर सभी प्रमुख दल अपने उम्मीदवार उतार रहे हैं। विकास, रोजगार, और सुरक्षा जैसे मुद्दे यहां चुनाव का मुख्य फोकस हैं।
5. किशनगंज
मुस्लिम वोट बैंक का केंद्र
किशनगंज बिहार में मुस्लिम आबादी का बड़ा हिस्सा है। इस सीट का समीकरण राजनीतिक दलों के लिए बहुत महत्वपूर्ण है।
वर्तमान स्थिति
यहां पर मुख्य मुकाबला मुस्लिम वोट बैंक के समर्थन से तय होगा। भाजपा, जदयू, कांग्रेस और आरजेडी सभी की नजरें इस सीट पर टिकी हैं।
बिहार चुनाव 2025 का परिणाम निश्चित रूप से राज्य के भविष्य को निर्धारित करेगा। वीआईपी सीटें, जिन पर सियासी दांव लगे हैं, इन चुनावों का केंद्रबिंदु बनेंगी। राजनीतिक दलों की रणनीतियों, उम्मीदवारों की छवि, और जनता के मूड का विश्लेषण कर यह कहा जा सकता है कि इस बार का चुनाव बेहद रोमांचक होने वाला है।
