फाइल फोटो।
नई दिल्ली [TV 47 न्यूज नेटवर्क ]। भारत का संविधान देश के सर्वोच्च राजनीतिक पदों में से एक, उपराष्ट्रपति पद, का चुनाव लोकतांत्रिक प्रक्रिया के तहत करता है। यह चुनाव देश के राजनीतिक स्थिरता और संवैधानिक व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। 2025 में होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव खास महत्व रखते हैं क्योंकि यह चुनाव देश की राजनीतिक दिशा और आगामी सरकार के कार्यकाल को प्रभावित कर सकता है। इस लेख में हम उपराष्ट्रपति चुनाव 2025 की प्रक्रिया, चुनाव की तिथियां, निर्वाचन आयोग की भूमिका, चुनाव का राजनीतिक महत्त्व, और ऐतिहासिक संदर्भों का विश्लेषण करेंगे।
उपराष्ट्रपति पद का महत्व और भूमिका
संविधान में उपराष्ट्रपति का स्थान
भारतीय संविधान के अनुच्छेद 63 के अनुसार, भारत का उपराष्ट्रपति देश का दूसरा सर्वोच्च नागरिक अधिकारी है। यह पद राष्ट्रपति के अभाव में राष्ट्रपति का कार्यभार संभालता है और संसद के दोनों सदनों की संयुक्त बैठक की अध्यक्षता करता है।
उपराष्ट्रपति का कार्यकाल और शक्तियां
उपराष्ट्रपति का कार्यकाल 5 वर्षों का होता है। यह पद राष्ट्रपति के समकक्ष संवैधानिक अधिकारों का प्रयोग करता है, जिसमें विधायी कार्यों में भागीदारी, विधेयकों पर मतदान, और संसद की कार्यवाही में भूमिका शामिल है।
राजनीतिक और संवैधानिक महत्त्व
उपराष्ट्रपति का पद देश की संवैधानिक व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा है। यह पद स्थिरता, निरंतरता और लोकतंत्र की रक्षा में सहायक है। विशेष रूप से, जब राष्ट्रपति पद रिक्त होता है या राष्ट्रपति असमर्थ होते हैं, तब उपराष्ट्रपति कार्यवाहक राष्ट्रपति का कार्यभार संभालते हैं।
उपराष्ट्रपति पद का चुनाव: प्रक्रिया और नियम
चुनाव की प्रक्रिया का अवलोकन
उपराष्ट्रपति का चुनाव भारत के संविधान और निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों के तहत होता है। यह चुनाव आम जनता द्वारा नहीं, बल्कि सांसदों द्वारा किया जाता है।
चुनाव की प्रक्रिया का विस्तृत विवरण
मतदाता और चुनाव का तरीका
उपराष्ट्रपति का चुनाव संसद के दोनों सदनों, लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों के बीच होता है। मतदान का तरीका आवश्यक रूप से प्रेक्षणीय (secret ballot) होता है।
वोटिंग का नियम और योग्यता
वोटिंग के लिए सांसदों का प्रतिनिधित्व उनके वोट के वजन के आधार पर होता है। लोकसभा और राज्यसभा के सांसदों के वोट का वजन अलग-अलग होता है।
चुनाव का मतदान और परिणाम
मतदान पूर्ण होने के बाद, मतों की गिनती की जाती है और परिणाम घोषित किए जाते हैं। यदि कोई उम्मीदवार बहुमत प्राप्त करता है, तो वही विजेता घोषित किया जाता है।
चुनाव की अधिसूचना और नामांकन
अधिसूचना का प्रकाशन
निर्वाचन आयोग उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए अधिसूचना जारी करता है, जो सामान्यतः चुनाव से लगभग 30 दिनों पहले किया जाता है।
नामांकन प्रक्रिया
उम्मीदवार अपना नामांकन पत्र दाखिल करते हैं। नामांकन की अंतिम तिथि चुनाव के तय कार्यक्रम के अनुसार निर्धारित की जाती है।
चुनाव के दौरान नियम और सावधानियां
उम्मीदवारों को अपने नामांकन पत्र के समर्थन में सांसदों के समर्थन पत्र प्रस्तुत करने होते हैं।
2025 में उपराष्ट्रपति चुनाव की तिथियां और घोषणाएं
निर्वाचन आयोग की घोषणाएं
निर्वाचन आयोग ने 2025 के उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए प्रमुख तिथियों की घोषणा कर दी है।
प्रमुख तिथियां
- अधिसूचना जारी करना: 7 अगस्त 2025
- नामांकन की अंतिम तिथि: 21 अगस्त 2025
- मतदान का दिन: 9 सितंबर 2025
- परिणाम की घोषणा: 9 सितंबर 2025
रिक्त पद की पृष्ठभूमि
22 जुलाई 2025 को, निवर्तमान उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इससे यह पद रिक्त हो गया था। भारत के राष्ट्रपति ने इस रिक्ति को भरने के लिए चुनाव की घोषणा की है।
चुनाव प्रक्रिया का विश्लेषण
निर्वाचन आयोग की भूमिका
निर्वाचन आयोग भारत का स्वतंत्र संवैधानिक निकाय है, जो चुनाव की निष्पक्षता सुनिश्चित करता है। यह उपराष्ट्रपति चुनाव में भी अपने कर्तव्य का पालन करता है।
चुनाव के दौरान सुरक्षा और निष्पक्षता
चुनाव प्रक्रिया में चुनाव आयोग ने सुरक्षा और निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए कड़े प्रबंध किए हैं। मतदान केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था, वोटिंग के दौरान निगरानी और ट्रांसपेरेंसी पर विशेष ध्यान दिया गया है।
राजनीतिक दलों का योगदान
राजनीतिक दल उम्मीदवार का समर्थन करते हैं और अपने सांसदों के माध्यम से मतदान सुनिश्चित करते हैं।
राजनीतिक और संवैधानिक महत्व
देश की स्थिरता में भूमिका
उपराष्ट्रपति का चुनाव देश की राजनीतिक स्थिरता को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाता है। यह सुनिश्चित करता है कि राज्य के महत्वपूर्ण पद निर्वाचित एवं पारदर्शी तरीके से भरे जाएं।
भविष्य की चुनौतियाँ
उपराष्ट्रपति पद का चुनाव लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा, राजनीतिक स्थिरता, और संवैधानिक अनुशासन बनाए रखने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। आगामी चुनाव में राजनीतिक दलों के बीच रणनीतिक साझेदारी और उम्मीदवारों का चयन विशेष ध्यान आकर्षित करता है।
ऐतिहासिक संदर्भ और वर्तमान परिदृश्य
भारत में उपराष्ट्रपति चुनाव का इतिहास
भारत में पहली बार उपराष्ट्रपति का चुनाव 1952 में हुआ था। तब से लेकर अब तक, यह प्रक्रिया निरंतर विकसित होती रही है। विभिन्न चुनावों में राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों ने अपनी रणनीतियों के साथ चुनावी मैदान में कदम रखा है।
पूर्व उपराष्ट्रपतियों का योगदान
डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन, ज्ञानी जैल सिंह, हामिद अंसारी जैसे उपराष्ट्रपतियों ने अपने कार्यकाल में संवैधानिक मूल्यों को स्थापित किया।
वर्तमान परिदृश्य
2025 का चुनाव विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि यह देश की राजनीतिक धारा, गठबंधन और भविष्य के नेतृत्व का संकेत है। राजनीतिक दल अपने उम्मीदवारों का चयन सावधानीपूर्वक कर रहे हैं।
