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नई दिल्ली [TV 47 न्यूज नेटवर्क ]। भारत और अमेरिका के बीच संबंध सदियों पुराना हैं। दोनों देशों ने अपने द्विपक्षीय सहयोग को मजबूत बनाने के लिए कई कदम उठाए हैं। लेकिन हाल के समय में, वॉशिंगटन की पाकिस्तान नीति और उसके कुछ निर्णयों ने भारत में चिंता और नाराजगी की लहर दौड़ा दी है। यह स्थिति दोनों प्रमुख वैश्विक शक्तियों के बीच संबंधों में नई चुनौती लेकर आई है। इस लेख में, हम विस्तार से जानेंगे कि कैसे भारत-अमेरिका संबंधों में आई यह दरार विकसित हो रही है, वॉशिंगटन की पाकिस्तान नीति के पीछे क्या कारण हैं, और इसका भारतीय सुरक्षा एवं रणनीतिक हितों पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
भारत‑अमेरिका संबंधों का पारंपरिक इतिहास
भारत और अमेरिका के संबंध का इतिहास स्वतंत्रता संग्राम से शुरू होता है, लेकिन वास्तविक मजबूती 21वीं सदी की शुरुआत में देखने को मिली। दोनों देशों ने वाणिज्य, रक्षा, आतंकवाद रोधी प्रयासों, और जलवायु परिवर्तन जैसे क्षेत्रों में मजबूत सहयोग स्थापित किया। भारत का ‘Look East’ और ‘Act East’ नीति, अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करने का माध्यम बनी।
मुख्य क्षेत्रों में सहयोग:
- रक्षा और रणनीतिक साझेदारी
- आर्थिक और व्यापारिक संबंध
- आतंकवाद से मुकाबला
- जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त प्रयास
हाल की घटनाएं और बढ़ती नाराजगी
हाल के महीनों में, कुछ घटनाओं ने दोनों देशों के बीच तनाव को जन्म दिया है, जिनमें प्रमुख हैं:
1. वॉशिंगटन की पाकिस्तान नीति
अमेरिका ने अपनी पाकिस्तान नीति में बदलाव किया है, जिसमें अफगानिस्तान और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई पर जोर दिया गया है। अमेरिका ने पाकिस्तान को एक महत्वपूर्ण भागीदार के रूप में देखना कम कर दिया है, और उसकी जगह भारत को अधिक महत्व देना शुरू किया है।
2. अफगानिस्तान से अमेरिकी वापसी
अमेरिका की अफगानिस्तान से पूर्ण वापसी और तालिबान के पुनः सत्ता में आने के बाद, भारत ने चिंता व्यक्त की है कि इससे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ेगी और आतंकवाद फिर से पनपेगा।
3. रक्षा एवं सामरिक समझौतों में कमी
कुछ रक्षा समझौतों का निष्कर्ष निकलना और संयुक्त सैन्य अभ्यासों में कमी भारत में चिंता का कारण बनी है।
4. भारत की सुरक्षा चिंताएं
चीन के साथ भारत के बढ़ते तनाव और सीमा पर बढ़ती अस्थिरता के मद्देनजर, भारत अमेरिका से अधिक समर्थन की अपेक्षा कर रहा है, लेकिन वर्तमान नीतियों ने उसकी उम्मीदों को धक्का पहुंचाया है।
भारत की प्रतिक्रिया और नाराजगी के कारण
भारत ने इन बदलावों को उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता के लिए खतरा माना है। कुछ मुख्य कारण हैं:
1. पाकिस्तान के प्रति अमेरिकी नीति
अमेरिका का पाकिस्तान के प्रति नरम रवैया और आतंकवादियों को समर्थन देना, भारत के हितों के खिलाफ माना जाता है। भारत का मानना है कि पाकिस्तान की आतंकवादी गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले तत्वों को रोकने में अमेरिका की भूमिका कमजोर हो रही है।
2. अफगानिस्तान की स्थिति
अफगानिस्तान में तालिबान की वापसी और अमेरिका का पीछे हटना, भारत के लिए चिंता का विषय है। भारत का मानना है कि इससे क्षेत्र में अस्थिरता और आतंकवाद को बढ़ावा मिलेगा।
3. रक्षा संबंधों में कमी
रक्षा सहयोग में कमी से भारतीय सेना और सुरक्षा एजेंसियों में निराशा व्याप्त है।
4. आर्थिक और रणनीतिक स्वतंत्रता
भारत चाहता है कि उसकी विदेश नीति स्वतंत्र और स्वायत्त हो। अमेरिका की नीतियों से भारत को अपनी रणनीतिक स्वतंत्रता में बाधा महसूस हो रही है।
भारत और अमेरिका के बीच वर्तमान स्थिति
वर्तमान में, भारत-अमेरिका संबंधों में टकराव का कारण मुख्य रूप से निम्नलिखित है:
- सामरिक आलोचनाएं: अमेरिका की पाकिस्तान नीति, अफगानिस्तान नीति और भारत के साथ रक्षा सहयोग में कमी।
- राजनीतिक तनाव: दोनों देशों के बीच सामरिक और आर्थिक विवाद।
- साझेदारी में कमी: कुछ क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग का स्तर घट रहा है।
भारत की प्रतिक्रिया
भारत ने अपने हितों की रक्षा के लिए नीति में बदलाव किया है, जैसे:
- अपनी सुरक्षा और रणनीतिक स्वायत्तता को मजबूत करना।
- क्षेत्रीय स्थिरता के लिए नए गठजोड़ बनाना।
- अमेरिका के साथ संबंधों में सुधार के लिए प्रयास जारी रखना।
क्या उम्मीदें हैं आगे?
आगामी वर्षों में, भारत और अमेरिका के संबंधों में सुधार की संभावना है, लेकिन वर्तमान में दोनों के बीच असंतोष और नाराजगी व्याप्त है। दोनों देशों को चाहिए कि वे अपने मतभेदों को समझें और द्विपक्षीय हितों को प्राथमिकता दें।
रणनीतिक सुझाव:
- साझेदारी का पुनः मूल्यांकन: दोनों पक्षों को अपने हितों का संतुलन बनाना चाहिए।
- संवाद और सहयोग: विवादों को बातचीत के माध्यम से हल करने का प्रयास।
- क्षेत्रीय स्थिरता: अफगानिस्तान और दक्षिण एशिया में स्थिरता बनाए रखने के प्रयास।
- आतंकवाद से मुकाबला: आतंकवाद के खिलाफ संयुक्त रणनीति अपनाना।
